पिद्दू बने सिद्धू-ठोको ताली

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इस बार किसी ने  नही कहा। इस बार किसी ने प्रेरित नही किया। इस बार किसी ने प्रोत्साहित नहीं किया। जो कुछ कहा-स्वप्रेरित होकर कहा। इस बार जो ठोका-ठोकी हुई, अपने मन से हुई। इस बार जो ठुकाई हुई, मन की गहराइयों से हुई। हमेशा वो ठुकवाते थे-आज हमी ने ठोक दी। शहर की एक हथाई पर आज उसी के चर्चे हो रहे थे। प्रेरित-प्रोत्साहित-स्वप्रेरित-ठोका-ठोका और मन की गहराइयों पर ज्यादा पत्रवाचन करने की जरूरत नहीं। जहां तक अपना खयाल है, हर मानखा इन सबसे अच्छी तरह से वाकीफ है। कोई इन के बारे में ज्यादा जानता होगा, कोई कम। कोई बिल्कुल अनजान हो या कोई इनके बारे में बिल्कुल ही नही जानता हो, ऐसा संभव नहीं है। कोई 'जाणगेला कला' का प्रदर्शन कर दे तो बात कुछ और है। अब आप पूछेंगे कि भला ये कला कहां से आई। जाणगेला कला का लोकार्पण कब हुआ। जाणगेला कला का प्रदर्शन किसने किया। कलाएं तो देखी। भांत-भांत की देखी। कलाओं के बारे में सुना-जम के सुना। चित्रकला से लेकर पाककला। उस्ता कला से लेकर चोरी कला। अपने यहां छत्तीस कलाएं खास कलाओं की सूची में दर्ज है। अब उन की संख्या दोगुनी-तिगुनी-चौगुनी हो गई होगी। कला बुक में नित नई कला जुडती जा रही होगी पर 'जाणगेला कला' के बारे में कभी नहीं सुना। अगर कोई ऐसा कहता है तो वह झूठ बोलता है। अगर कोई इस कला से अनभिज्ञता दर्शाता है तो वह झूठला है। जो जानबूझ कर अनजान बना रहे उसे राजस्थानी भाषा में 'जाणगेला' कहा जाता है। प्रेरित-प्रोत्साहन और स्वप्रेरित के बारे में सुधि पाठक नहीं जानते हों, ऐसा संभव नहीं है। बात रही ठोका-ठोकी की, तो प्यारे उन्होंने खूब ठुकवाई। बात-बात पे ठुकवाई। आह्वान कर के ठुकवाई। इस बार हम ने खुद ने ठोक दी। ना उन्होंने कहा ना और किसी ने। जैसे ही खबर मिली कि पिद्दूजी  'द कपिल शर्मा शो' से निकल दिए गए तो इतनी तालियां ठोकी.. इतनी तालियां ठोकीं कि रूकने का नाम नहीं ले रही। हम तो कहें कि उन्हें पंजाब मंत्रिमंडल और कांग्रेस से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए। पिद्दूजी पढ-सुन कर समझने वाले समझ गए कि इशारा किस की ओर है। पिद्दू पिछले दिनों से पाकिस्तान के प्रति कुछ ज्यादा ही प्रेम दिखा रहे हैं। जबसे इमरान वहां के पीएम बने तब से उनकी पाक से मौहब्बत कुछ ज्यादा ही बढ गई। पुलवामा में इतना बड़ा कांड हो जाने के बावजूद वो पाकिस्तान से वार्ता करने की पैरवी कर रहे हैं। जो राग पाक परस्त महबूबा मुफ्ती आलाप रही है, वही राग पिद्दू जी आलाप रहे हैं। पता नहीं उन्हें क्या हो गया कि जादू उतर ही नहीं रहा। सारा देश पाकिस्तान पर लानत डाल रहा है और पिद्दूजी जाहिल पड़ोसी के वकील बने नजर आ रहे हैं। हथाईबाजों को याद है कि इससे पहले पिद्दुजी को पाकिस्तान जाने का 'बड़का' बड़ा और गए भी। उन्होंने वहां प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में भाग लिया। पिद्दुजी खुद क्रिकेटर रह चुके हैं। इस में कोई दो राय नहीं कि वो प्रतिभा संपन्न मानखे हैं। वो अच्छे वक्ता हैं। वो तामाशाई  नेता हैं। उनमें भीड़ जुटाने की कला है। वो बोलते हैं तो भीड़ तन्मयता से सुनती है। वो माननीय रह चुके हैं। वो अच्छे कॉमेंटेटर रह चुके हैं। कपिल शर्मा के लाफ्टर शो में उनके ठहाके गंूजते रहे। ठोको ताली उनका तकिया कलाम है। विगत दिनों उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस का पल्ला पकड़ लिया और पंजाब के मंत्री बन गए। हमें याद है पिद्दुजी के वो भाषण जिनमें उन्होंने कांग्रेस और पाकिस्तान को लस्सी पी-पी के कटके काढे थे। वो भाजपा को अपनी मातृ भूमि कहा करते थे। वो कहते हैं ना कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं। कौन, कब, किस को छोड़कर किसको पकड़ ले। कुछ कहा नहीं जा सकता। पिद्दुजी अपनी मातृभूमि को छोडकर कांग्रेस में चले गए। चले गए तो चले गए। कौनसी भाजपा की सामर सूनी हो गई और कौन सी कांग्रेस की गागर छलक गई। उलटे वो कांग्रेस के लिए बोझ बनते जा रहे है। पिद्दुजी को क्रिकेट फ्रेंड रह चुके इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में आने का न्यौता मिला था। हमारे हिसाब से उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए था। कारण ये कि उसने ना तो हमारे पीएम सर को बुलाया न किसी अन्य बड़े नेता को। बुलाया तो गावस्कर और कपिल सर को भी था मगर वो नहीं गए। इमरान उनके भी क्रिकेट दोस्त रह चुके हैं। चाहते तो वो भी जा सकते थे। पर नहीं गए। बहाना बना के टाल दिया। पर पिद्दु भाई को ऐसा बड़का बड़ा कि चले गए। वो कुछ भी कहें पर देश दुनिया ने देखा कि वहां उनकी कैसी इज्जत की गई। उन्हें ढोल-थाली के साथ बधारते तो लगता कि इमरान यार ने यारी निभाई। अगुवानी करते तो लगता कि दोस्त की इज्जत की गई। वहां तो उलटा-पुलटा हो गया। पिद्दुजी ने वहां उस सेनाध्यक्ष को 'झप्पी' दे डाली जिसके इशारे पे कश्मीर में उग्रवाद पनप रहा है। उस सेनाध्यक्ष को गले लगाया जिसके कसाई सैनिक हमारे वीरों का सिर काट के ले गए थे। पिद्दूजी आज भी उन की पैरवी कर रहे है। देशभर में फजीहत होने के बावजूद वो अपने बयान और पाक प्रेम पर कायम है। देश को उनकी सफाई कत्तई नहीं जंची। अव्वल तो उन्हें पहले सांपों के डेरे में जाना ही नहीं चाहिए था। उन्हें पाकिस्तान से बातचीत की पैरवी करनी ही नहीं चाहिए थी। और अब सफाई भी दी तो टुच्ची सी। तभी तो उन्हें शो से बाहर निकाल दिया। तभी तो ताली ठोकी। वो पंजाब मंत्रिमंडल और कांग्रेस से बाहर निकाल दिए जाएं तो हथाईबाज पूरा दम लगा कर कहेंगे-'ठोको ताली।

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