भारतीय निवेश के लिए कृषि प्रसंस्करण, विनिर्माण और आईसीटी क्षेत्र में अवसर : एक्ज़िम बैंक

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मुंबई
एक्ज़िम बैंक के अध्ययन में दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (एसएडीसी) क्षेत्र में वर्तमान व्यापार और निवेश परिदृश्य तथा भारतीय व्यतवसाय के लिए विद्यमान अवसरों का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में दक्षिण अफ्रीकी विकास समुदाय के अंतरक्षेत्रीय एवं वैश्विक व्यापार तथा विदेशी निवेश के रुझानों को रेखांकित करते हुए व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए रणनीति बताई गई है।सैडेक देश अफ्रीकी क्षेत्र का अभिन्न अंग हैं जिनका 2017 में अफ्रीका के कुल भौगोलिक क्षेत्र, जीडीपी और आबादी में  लगभग एक तिहाई हिस्सात था। अफ्रीका के प्रमुख क्षेत्रीय व्यापार संगठनों में, सैडेक का 2017 में अफ्रीका के सकल घरेलू उत्पाद (सांकेतिक) का सबसे ज्या।दा योगदान रहा है। विश्व व्यायपार संगठन (डब्यूे स टीओ) के अनुसार, अफ्रीकी क्षेत्रीय व्या पार करार (आरटीए) में सैडेक का मूल्यर की दृष्टि से पहला स्थाडन है और 2017 में कुल अफ्रीकी निर्यातों में इसका 37.3 प्रतिशत हिस्साष रहा है। अन्य विकासशील देशों को भारत के बढ़ते वैश्विक व्यापार के चलते सैडेक भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्या पार भागीदार के रूप में उभरा है। पिछले दस वर्षों में सैडेक देशों के साथ भारत का कुल व्याूपार वर्ष 2008 में 13.7 अरब यू एस डॉलर से लगभग दोगुना बढ़कर 2017 में 25.5 अरब यू एस डॉलर हो गया है। सैडेक को भारत के निर्यात में खनिज ईंधन और दवा उत्पादों का दबदबा बना हुआ है। वर्ष 2017 में सैडेक को भारत के कुल निर्यात में इनका 46.7 प्रतिशत हिस्सा  रहा। हालांकि खनिज ईंधन की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई, किन्तु  पिछले दस वर्षों के दौरान दवा उत्पादों की संख्या में दोगुनी से अधिक वृद्धि हो गई है। दक्षिण अफ्रीका सैडेक में भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जिसका 2017 में भारत के कुल निर्यात का लगभग 44.9 प्रतिशत हिस्सार रहा है। सैडेक अन्यज प्रमुख निर्यात बाजार तंजानिया, मोजाम्बिक तथा मॉरिशस हैं। भारत से 2017 में सैडेक क्षेत्र द्वारा लगभग 78 प्रतिशत खनिज ईंधन, तैल तथा इसके उत्पाबद, (प्रमुख रूप से क्रूड ऑयल) तथा मोती एवं कीमती पत्थेर आदि का आयात किया गया है। दक्षिण अफ्रीका भारत से प्रमुख आयातक देश है, इसके बाद  अंगोला, बोत्सदवाना, तंजानिया, मोजम्बिक तथा जाम्बिया हैं। एस ए डी सी के व्यापारिक पार्टनर के रूप में भारत के बढ़ते महत्व का आकलन इस तथ्य से किया जा सकता है कि एसएडीसी के वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 2008 में 2.9 प्रतिशत से लगभग दोगुना बढ़कर 2017 में 6.4 प्रतिशत हो गई है, जिसमें अफ्रीका में भारत के कुल व्याजपार में सैडेक की हिस्सेकदारी 2008 के 32.8 प्रतिशत से बढ़कर 2017 में 42.4 प्रतिशत हो गई है। इस अध्य यन में उल्लेेख किया गया है‍ कि यद्यपि 2008 में एफ टी ए की स्थातपना के बाद एसएडीसी का व्याधपार काफी ज्यालदा बढ़ा है तथापि सैडेक के क्षेत्रीय और समग्र व्याापार को बढ़ाने की प्रचुर संभावनाएं विद्यमान हैं। मुख्य रणनीतियों में अंतर क्षेत्रीय व्यायपार को बढ़ाना, उत्पा द एवं बाजार विविधता, नॉन-टैरिफ बैरियर्स (एन टी बी) में कमी तथा व्या्पार के लिए अन्य बाधाओं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मूल्यम श्रृंखलाओं का विकास शामिल हैं। अफ्रीका में अप्रैल 1996 से मार्च 2018 तक भारत के निवेश में सैडेक क्षेत्र का 94 प्रतिशत हिस्सा रहा है। हालांकि, ये निवेश अधिकांशतः मॉरिशस, मो‍जाम्बिक तथा दक्षिण अफ्रीका में केन्द्रित रहे हैं। इस अध्यतयन में कुछ क्षेत्रों जैसे कृषि प्रसंस्ककरण, खनिज प्रसंस्कारण तथा विनिर्माण (औषधि, उपभोक्ता‍ वस्तुधएं जिनमें टेक्स्टाइल तथा वस्त्र, चमड़ा तथा जूते-चप्पल एवं ऑटोमोटिव सामग्री शामिल हैं) क्षेत्रों तथा विकासशील सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) इंफ्रास्ट्र्क्चणर का उल्लेसख किया गया है, जिसमें भारत के निवेश को बढ़ाया जा सकता है। 

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