राना के सहयोग से राजस्थानियों की कनाडा के शिक्षा क्षेत्र मेंं भागीदारी बढ़ाने के प्रयास होंगे : गजसिंह

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पहली बार कनाडा पहुंचने पर जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह जी का हुआ भव्य स्वागत 

राना कनाडा और एमिटी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित हुआ सम्मान समारोह

  • पहली बार कनाडा आने पर पूर्व महाराजा गजसिंह जी का भव्य समारोह पूर्वक राजस्थानी एसोसियेशन ऑफ नार्थ अमेरिका, कनाडा ‘राना’ व एमिटी फांउडेशन ने किया स्वागत 
  • कौंसिल जनरल ऑफ इंडिया, कनाडा दिनेश भाटिया, स्थानीय एमपीपी दीपक आनंद, ब्रैंपटन के मेयर पेट्रिक व मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान, भारत से जुड़े लोगों ने समारोह में लिया भाग 
  • हर साल लाखों भारतीय छात्र कनाडा आते है मगर राजस्थान के छात्रों का प्रतिशत काफी कम, इसे राना के माध्यम से बढ़ाने व शैक्षिणिक सशक्तिकरण की योजना पर हुआ विचार 
  • राजस्थानी एसोसियेशन ऑफ नार्थ अमेरिका, कनाडा ‘राना’ प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख संस्था है, जो कनाडा में राजस्थानियों की हर संभव मदद के साथ राजस्थानी संस्कृति को संजोय रखने में अग्रसर है
  • सम्मान समारोह में पूरे परिवार सहित उपस्थित हुए प्रवासियों ने पूर्व महाराजा के साथ मुलाकात व फोटोज ले अपने आप को गौरवांवित महसूस किया 
  • पूर्व महाराजा गजसिंह बने राना कनाडा के मानद संरक्षक
  • रॉयल ओंटारियों म्यूजियम में टे्रजर्स ऑफ अ डेजर्ट किंगडम प्रदर्शनी के टिकट पर राना सदस्यों को मिला 20 प्रतिशत डिकाउंट का उपहार
  • पूर्व महाराजा ने ब्रैंपटन के मेयर पेट्रिक ब्राउन को जोधपुर आने का दिया न्यौता

 

 दीपक मेहता, ओंटारियो, कनाडा।

विश्व का दूसरा सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला देश कनाड़ा और उसका मध्य पूर्व में बसा सबसे बड़ा राज्य ओंटारिया। इसके ब्रैंपटन शहर में सगन कन्वेंशन एंड बैंकेट हॉल जहां बर्फीली हवाओं और बर्फबारी के बीच प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख संस्था राना के सदस्य समारोह स्थल को अपने हाथों से सजा रहे थे। मौका था जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह जी का पहली बार कनाडा आने पर स्वागत सम्मान समारोह। 

राजस्थानी एसोसियेशन ऑफ नार्थ अमेरिका कनाडा ‘राना’  और एमिटी फांउडेशन की ओर से आयोजित समारोह में कौंसिल जनरल ऑफ इंडिया, कनाडा दिनेश भाटिया उनकी पत्नि सीमा भाटिया, ब्रैंपटन के मेयर पेट्रिक ब्राउन, दीपक आंनद ओंटारियो विधानसभा के सदस्य (मिसिसॉगा-माल्टन),  अमृत मंगत ओंटारिया विधानसभा की पूर्व सदस्य (वर्ष 2007 से वर्ष 2018 तक),  इंडो-कैनेडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष राज कोठारी, राकेश गोइनका, नवल बजाज, धर्मा जैन, राना के संस्थापक सदस्य आलोक गोयल, एमिटी फांउडेंशन के कोषाध्यक्ष राजेन्द्र पाहुजा, राना की अध्यक्षा स्वाति सिंघल,  सहित राना के बोर्ड सदस्य सहित राना परिवार व अमेटी फांडडेशन के बोर्ड सदस्य मौजूद रहे।

समारोह में सर्वप्रथम पूर्व महाराजा गजसिंह जी का राजस्थानी परम्परा से साफा पहना कर राना के संस्थापक सदस्य आलोक गोयल व तिलक लगा विजेता बलानी ने स्वागत किया। 

एमिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष व राना के संस्थापक सदस्य राकेश गोइनका ने स्वागत भाषण की शुरूआत खम्मा घणी हुकुम और आपरौ घणैमान कनाडा में स्वागत है से किया। उन्होंने जोधपुर की विरासत और पूर्व महाराज गजसिंह जी के जीवन दर्शन के बारे में विस्तार से उपस्थित जन को जानकारी दी। साथ ही उन्होंने राना द्वारा किये जा रहे कार्यो पर प्रकाश डाला तथा कनाडा में किस प्रकार राजस्थानी संस्कृति, भाषा और परम्परा को जीवंत रख आगे बढा रही है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि भारत से लाखों छात्र हर वर्ष कनाडा आते है मगर उसमें राजस्थानी छात्रों का प्रतिशत बहुत कम है और उन्होंने पूर्व महाराजा से अपील की कि वे इस दिशा में राना के साथ एक योजना बना कार्य करें जिससे यहां प्रवासी राजस्थानियों की संख्या बढ़े और दोनो देशों का विकास हो सके। उन्होंने कनाडा में पढ़ाई कर रही विजेता बलानी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार राजस्थान से आये बच्चें यहां अच्छा प्रदर्शन कर रहे है और राना भी उन्हें हर सम्भव सहयोग दे रहा है।

कार्यक्रम में मुद्रा स्कूल ऑफ डांस की प्राची शाह ने मनमोहक कथक प्रस्तुति से सबको आकर्षित किया। वहीं सुप्रसिद्ध कवि व लेखक देवेन्द्र मिश्रा ने पूर्व महाराजा के स्वागत में स्वयं की लिखी दिल को छू लेने वाली कविता ‘हर्षित हिय राना समाज स्वागत करे तुम्हारा, महाराज गजसिंह देवजू तूम हो गर्व हमारा’ का वाचन कर पूरे राजपरिवार व राजस्थान को गौरवांवित किया। उसके पश्चात जोधपुर की बेटी हंसा हेडा ने राजस्थानी भाषा में स्वागत गीत ‘धन्य घणी म्हारा धन्य भाग थ्हे आज पधारिया सा..प्यारा पावणिया’ का गायन कर पूर्व महाराजा सहित उपस्थित जन समूह का मन मोह लिया। स्वयं पूर्व महाराजा ने उनकी प्रशंसा की। 

कार्यक्रम में दिनेश भाटिया, कौंसिल जनरल ऑफ इंडिया, कनाडा ने पूर्व महाराजा का पूरे भारतीय समुदाय कि ओर से स्वागत करते हुए कहा कि आपका आना हमारे लिए गर्व की बात है। हम चाहेंगे कि राजस्थान से ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आये । उन्होंने कनाडा के रॉयल ओंटारियों म्यूजियम में टे्रजर्स ऑफ अ डेजर्ट किंगडम प्रदर्शनी के लिए भी पूर्व महाराजा को शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम में ब्रैंपटन के मेयर पेट्रिक ब्राउन, ओंटारियो विधानसभा के सदस्य(मिसिसॉगा-माल्टन) दीपक आंनद, ओंटारिया विधानसभा की पूर्व सदस्य अमृत मंगत ने भी महाराजा का स्वागत कर अपने उद्गार व्यक्त किये। 

समारोह में पूर्व महाराजा गजसिंह जी ने अपने संबोधन कि शुरूआत राजस्थानी भाषा में की। उन्होंने कनाडा के राजस्थानी समुदाय राना की प्रशंसा की कि वे यह जानकर खुश है कि वे यहां हर तीज त्यौहार पूरा परम्परागत ढंग से मनाते है और राजस्थान की संस्कृति को कनाडा में जीवित रखे है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी जहां भी रहते है वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते है और अपनी भाषा संस्कृति को हमेशा आगे बढ़ाते आये है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि  कनाडा में शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थानियों की भागीदारी बढ़ाने की रूपरेखा बनाई जायेंगी और इसे आगे बढ़ाया जायेगा। उन्होंने अपने स्वागत के लिए राना परिवार को धन्यवाद दिया तथा दी गई प्रस्तुतियों के लिए विशेष आभार जताया। 

कार्यक्रम के अंत में राना की अध्यक्षा स्वाति सिंघल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होने पूर्व महाराजा गजसिंह जी को राना कनाडा के आनरेरी पैट्रन स्वीकारने के लिए धन्यवाद भी दिया। माणक पत्रिका का इस समारोह को सफल बनाने में सहयोग करने और कवर करने के लिए विशेष आभार जताया। उन्होंने राना बोर्ड मैंबरर्स और सदस्यों को इस समारोह को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। समारोह में पूरे परिवार सहित पधारे प्रवासियों ने पूर्व महाराजा के साथ मुलाकात कर उनके साथ फोटोज खिचवाई और अपने आप को गौरवांवित महसूस किया। 

इस मौके प्रवासी राजस्थानी व राना सदस्य राम गुप्ता व गरिमा गुप्ता की 42वीं शादी की सालगिरह राना परिवार की ओर से केक काट जश्नपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम के अंत में आलोक गोयल व गौरी गोयल ने एमिटी फांउडेशन की तरफ से पूर्व महाराजा को स्मृति चिंह भेंट कर पधारने के लिए धन्यवाद दिया।

 

 

राजस्थानी भाषा की एकमात्र पारिवारिक मासिक पत्रिका माणक की हुई प्रशंसा

 

समारोह में पूर्व महाराजा गजसिंह जी ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी भाषा में निकलने वाली एक मात्र पारिवारिक मासिक पत्रिका माणक की भूरी भूरी प्रशंसा की। उन्होंने प्रवासियों को मातृभाषा में ज्यादा से ज्यादा बात करने और पिछले 38 वर्षों से मातृभाषा में प्रकाशित हो रही माणक के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रवासियों को अपनी मातृभाषा में लिखने पढऩे की बात कहीं तथा साथ ही चुनिंदा लोगों को माणक में अपने लेख भेजने की मंशा दर्शायी। 

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