नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करेंगे नीतीश

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पटना
एनडीए के घटक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करने का फैसला लिया है। यह निर्णय जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया। बैठक में तय किया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और केसी त्यागी असम गण परिषद की रैली में जदयू का प्रतिनिधत्व करेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में जदयू अपने मंत्री और विधायकों को टिकट नहीं देगी। बैठक में पार्टी में लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी तय करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, इसमें प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह और उर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव शामिल हैं। जदयू के निर्णय के बाद कई मंत्रियों के लिए लोकसभा का टिकट पाने का रास्ता बंद हो गया है। इस समय जदयू के दो-तीन मंत्री लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं। पार्टी के नए निर्णय के बाद इनकी दावेदारी खत्म मानी जा रही है। जदयू लोकसभा की 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक फरवरी के अंत में पटना में करने का निर्णय भी लिया गया। इसमें पूरे देश भर के पार्टी पदाधिकारी व प्रतिनिधि शामिल होंगे। पार्टी लक्षद्वीप में लोकसभा का चुनाव लड़ेगी।
नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 में लोकसभा में नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके निवास काल को 11 से घटाकर छह वर्ष कर दिया गया है।यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है। यह बिल लोकसभा में 15 जुलाई 2016 को पेश हुआ था जबकि 1955 नागरिकता अधिनियम के अनुसार, बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज के बिना या फिर वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा।

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