वैश्विक मंदी का असर भारत पर : जावड़ेकर

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नई दिल्ली
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि वैश्विक मंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाला है। जावड़ेकर ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार के 6 महीने पूरे होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, दुनिया भर में दिखाई दे रही आर्थिक मंदी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। जावड़ेकर ने कहा- विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के बीच मोदी सरकार ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। इनमें बैंक मर्जर, बैंकों को 70,000 करोड़ रु. के ऋण, सार्वजनिक उद्यमों का विनिवेश शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत में कॉर्पोरेट टैक्स की दर अब दुनिया में सबसे कम है। इसने दुनिया भर के निवेशकों के बीच भारत में निवेश की उम्मीद जगाई है। प्रधानमंत्री के विदेश दौरों ने दुनिया में भारत की छवि मजबूत करने में मदद की है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध जैसे कदम से लोगों के बर्ताव में सकारात्मक बदलाव आया है।

अप्रेल से जून की तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5 प्रतिशत रही
सीतारमण ने बताया कि 2009-2014 तक जीडीपी ग्रोथ 6.4 प्रतिशत थी, जबकि 2014 से 2019 के बीच 7.5 प्रतिशत रही। पिछली कुछ तिमाही से जीडीपी ग्रोथ में लगातार कमी आ रही है। अप्रैल-जून में यह 5 प्रतिशत रह गई थी। इसको लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। 

जीडीपी में गिरावट की वजह दोहरी बैलेंस शीट : सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (27 नवंबर) को राज्यसभा में अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर कहा था कि समझदारी से देखेंगे तो पता चलेगा कि आर्थिक विकास दर भले ही कम हुई है, लेकिन अभी तक मंदी नहीं है, ऐसा आगे भी नहीं होगा। सीतारमण के मुताबिक, बैंकों की दोहरी बैलेंस शीट की समस्या की वजह से बीते 2 वित्त वर्षों में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट आई। दोहरी बैलेंस शीट के मायने ये हैं कि एक तरफ बैंक एनपीए से जूझ रहे थे, दूसरी ओर कारोबारी भी कर्ज के दबाव में थे।

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