अयोध्या मामला फैसला कभी भी, राज्यों को किया अलर्ट

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अयोध्या
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले आने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैसले से पहले देश के सभी राज्यों को अलर्ट पर रहने को कहा है। केंद्र ने अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवान भी उत्तर प्रदेश के लिए भेजे हैं। वहीं अयोध्या में प्रशासन ने 10 दिसंबर तक धारा-144 लागू कर दी है। पड़ोसी जिले अंबेडकर नगर में 8 अस्थायी जेल बनाई गई हैं। ये सभी जेल, कॉलेजों में बनाई गई हैं। इधर, विहिप ने राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम रोक दिया।


प्रशासन ने फोर्स की 100 कंपनियां मांगीं
अयोध्या जिले को चार जोन- रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटा गया है। इनमें 48 सेक्टर बनाए गए हैं। विवादित परिसर, रेड जोन में स्थित है। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा योजना इस तरह बनाई जा रही है कि एक आदेश पर पूरी अयोध्या को सील किया जा सके। प्रशासन ने फैसले का समय नजदीक आने पर, अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त 100 कंपनियां मांगी हैं। इससे पहले दीपोत्सव पर यहां सुरक्षाबलों की 47 कंपनियां पहुंची थीं, जो अभी भी तैनात है।


विहिप ने अपने सभी कार्यक्रम किए रद्द 
अयोध्या में विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम रोक दिया गया है। 1990 के बाद यह पहला मौका है, जब पत्थर तराशना बंद किया गया है। अब तक 1.25 लाख घनफीट पत्थर तराशा जा चुका है। अभी 1.75 लाख घनफीट पत्थर को तराशना बाकी है। पत्थर तराशने में लगे कारीगर घर लौट गए हैं। विहिप प्रवक्ता ने कहा- फैसले के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही विहिप ने अपने सभी कार्यक्रम भी निरस्त कर दिए।

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