कप्तानी को लेकर मोमिनुल बोले- इस बारे में सपने में भी नहीं सोचा था, विराट के सामने खेलकर खुशी होगी

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ढाका
बांग्लादेशी क्रिकेटर मोमिनुल हक का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी कप्तानी करने के बारे में नहीं सोचा था और ना ही वे इस बात के लिए तैयार थे। हक के मुताबिक वे सिर्फ इस बात को सोचकर तैयार हो गए कि उन्हें विराट के नेतृत्व वाली भारतीय टीम का सामना करना है। उन्होंने विराट को सभी फॉर्मेट्स में दुनिया का सबसे अच्छा बल्लेबाज भी बताया। मोमिनुल ने कहा कि जब उन्हें बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के फैसले के बारे में पता चला तो वे बिल्कुल हैरान थे।

 

शाकिब अल हसन पर बैन लगने के बाद मोमिनुल को टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया है। कप्तानी को लेकर मोमिनुल ने कहा, मैं बिल्कुल भी तैयार नहीं था, ये पूरी तरह से अनपेक्षित था। इस बारे में मैंने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं बांग्लादेश का कप्तान बनूंगा या टेस्ट टीम की कप्तानी करूंगा। उन्होंने कहा, विराट के सामने खेलने को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि विराट कोहली दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर हैं। वे सभी क्रिकेट के सभी प्रारूपों में सबसे बेहतर बल्लेबाज हैं।

 

इस बारे में सोचकर ही मुझे बहुत अच्छा लगता है। ये बात उन्होंने ढाका में संवाददाताओं से बात करते हुए कही। भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज का पहला मैच इंदौर में 14 से 18 नवंबर के बीच खेला जाएगा। जबकि दूसरा टेस्ट कोलकाता में 22 से 26 नवंबर के बीच गुलाबी गेंद से डे-नाइट होगा। डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने के बारे में मोमिनुल ने कहा, हमने फ्लडलाइट्स के नीचे और गुलाबी गेंद से अबतक टेस्ट नहीं खेला है। अच्छा क्रिकेट खेलने के लिए ये बहुत ही अच्छा मौका है।


मोमिनुल को कप्तानी का अनुभव नहीं : 28 साल के मोमिनुल बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और उन्होंने अपने टेस्ट करियर में अबतक 36 मैचों में 2613 रन बनाए हैं। मोमिनुल को किसी बड़ी घरेलू टीम के नेतृत्व का अनुभव तक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भारत के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज में बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम की कप्तानी सौंपी गई है।


अतिरिक्त जिम्मेदारी लूंगा तो दबाव में आ जाऊंगा : हक का कहना है कि कप्तानी का असर उनके खेल पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, मैंने कभी भी कप्तानी को दबाव या जिम्मेदारी के रूप में नहीं लिया। अगर मैं लगातार यही सोचता रहूं कि कप्तान के रूप में मुझे टीम को आगे ले जाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी लेनी होगी तो मैं कुछ दबाव में आ जाऊंगा। लेकिन अगर मैं अपना स्वाभाविक खेल खेलूं और सोचूं कि मैं एक बल्लेबाज हूं जिसे अपनी टीम के लिए रन बनाने की जरूरत है, तो उससे कोई असर नहीं होगा। 

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