टिम पेन और डेविड वॉर्नर 'विवाद' ने दिलाई राहुल द्रविड़ के फैसले की याद

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नई दिल्ली
पाकिस्तान के खिलाफ एडिलेड में जारी सीरीज के दूसरे टेस्ट की पहली पारी में ऑस्ट्रेलियाई तूफानी ओपनर डेविड वॉर्नर ने इतिहास रच दिया। उन्होंने पहली पारी में 418 गेंदों में 39 चौके और एक छक्का की मदद से नाबाद 335 रनों की पारी खेलते हुए कई रेकॉर्ड अपने नाम किए और कई ऐतिहासिक रेकॉर्ड लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया। बावजूद इसके वह निराश होंगे। दरसअल, वह जब 335 रन बनाकर खेल रहे थे, तभी कप्तान टिम पेन ने 127 ओवरों में 3 विकेट पर 589 रन के टीम स्कोर पर पारी घोषित कर दी।
इसकी शायद ही किसी को उम्मीद थी कि ऑस्ट्रेलियाई कैप्टन टिम पेन यह फैसला उस वक्त लेंगे, जब वॉर्नर के पास टेस्ट पारी में सर्वाधिक 400 रनों के वर्ल्ड रेकॉर्ड, जो वेस्ट इंडीज के ब्रायन लारा के नाम है, को तोडऩे का मौका था। सभी पेन के इस फैसले से हैरान दिखे। पविलियन की ओर बढ़ रहे वॉर्नर के कदम उस बात का सबूत थे कि पारी खत्म हो चुकी है और इस पारी में वॉर्नर के नाम नाबाद 335 रन ही रहेंगे। क्रिकेट फैन्स पेन को ट्विटर पर ट्रोल कर रहे हैं। टिम पेन के इस चौंकाने वाले फैसले ने इतिहास के पन्नों में दबे राहुल द्रविड़ और सचिन तेंडुलकर विवाद की याद दिला दी। यह बात है मार्च-अप्रैल 2004 की। भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर थी। सीरीज का पहला टेस्ट मैच 28 मार्च से मुल्तान में शुरू हुआ। यह मैच जितना मुल्तान के सुल्तान कहे जाने वाले वीरेंदर सहवाग के ट्रिपल सेंचुरी के लिए जाना जाता है, उतना ही राहुल द्रविड़ के एक विवादित फैसले के लिए भी। मैच में भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने टॉस जीता और पहले बैटिंग का फैसला किया। ओपनर सहवाग ने 375 गेंदों में 39 चौके और 6 छक्के लगाते हुए 309 रन की पारी खेली और टेस्ट में तिहरा शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बने। इसी पारी में भारत ने 5 विकेट पर जैसे ही 675 रन बनाए, तभी राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी और सचिन तेंडुलकर अपना दोहरा शतक केवल 6 रन से चूक गए। जब सचिन मैदान से वापस लौट रहे थे तो उनका चेहरा दोहरा शतक ना बना पाने की वजह से गुस्से में तमतमा रहा था। कहा जाता है कि अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाने वाले मास्टर इतने गुस्से में थे कि काफी समय तक द्रविड़ से बात नहीं की। राहुल के इस फैसले पर काफी विवाद हुआ, लेकिन दोनों ने कभी खुलकर इस पर बात नहीं की। सचिन-द्रविड़ भले ही उस विवाद को भूल गए हों, लेकिन जब भी कप्तान के ऐसे फैसले आते हैं तो भारतीय क्रिकेट इतिहास का यह विवाद लोगों के जेहन में ताजा हो जाता है।

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