फिल्म जय हो की तर्ज पर शिक्षा की अलख जगा रहे है आरटीओ जैन

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अलवर
हिन्दी फिल्म जय हो की तर्ज पर सड़क सुरक्षा की क्लास लेकर अलवर आरटीओ अनिल जैन शिक्षा का अलख जगा रहे है उन्होंने चंद ही महिनों में हजारों की संख्या में युवक -युवतियों को सड़ेक सुरक्षा की शिक्षा देकर साबित कर दिया है कि अगर अधिकारी चाहे तो क्या नही किया जा सकता है1 चाहे काम की कितनी ही व्यस्तता हो लेकिन लोगों को सड़क़ सुरक्षा का पाठ पढ़ा नही भूलते आरटीओ अनिल जैन वे कितने भी सरकारी कार्य की व्यस्तता में फंसे हो लेकिन आरटीओ जैन एक बार कार्यालय में आकर लाईसेंस बनवाने वाले नवयुवकों को सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का पाठ जरूर पढ़ाते है। आरटीओ जैन का मानना है कि सिर्फ दिखावे के लिए कुछ लोगों को सडक़ सुरक्षा के लिए जागरूक करके इतिश्री नही की जा सकती इसलिए जितना ज्यादा हो सके लोगों को जागरूक करना उनका फर्ज है और वे इसी फर्ज को निभाते हुए अपने व्यस्तम समय में से आधा घंटे का समय जरूर निकालते है और एक बार कार्यालय में लाईसेंस बनवाने के लिए आने वाले युवाओं को सडक़ सुरक्षा का पाठ जरूर पढ़ाते है ताकि आगे लाईसेंस मिलने के बाद युवा कुशल वाहन चालक बन सके। वे क्लास लेने के बाद युवाओं से प्रशन भी पूछते है और जो युवा उनके प्रशन का उत्तर सही देता है तो वे उस युवा को प्रोत्सानवश पारितोषित भी देना नही भूलते वे तुरंत अपनी जेब से सौ से दो सो रूपये युवाओं को ईनाम देते जिससे युवाओं में आरटीओ के प्रति सम्मान झलकता है। वे हाल में खड़े रहकर भी क्लास में जैन का लैक्चर सुनते है। यहां पर उल्लेखनीय है कि आरटीओं अनिल जैन ने क्लास रूम के बाहर एक बोर्ड भी लगा रखा है जिसे देखकर सलमान खान की हिन्दी फिल्म जय हो की याद आती जिसमें सलमान खान थैक्यू के बदले तीन आदमी की मदद करने को बोलता है ऐसा ही आरटीओ जैन की क्लास के बाहर बोर्ड पर लिखा कि क्लास में आने वाले सभी लोग 15 लोगों को यहां से मिला ज्ञान बांटे यही क्लास की फीस है।