पद्मश्री कन्हैया लाल सेठिया की जन्मस्थली सुजानगढ़ में हर साल होंगे आयोजन

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जयपुर
राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की तरफ से सुजानगढ़ में हर साल कविता उत्सव के साथ ही फिल्म संगीत पर संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। महाकवि कन्हैया लाल सेठिया के जन्म शताब्दी वर्ष पर प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से सुजानगढ़ में आयोजित अंचल सृजन यात्रा' में लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋतुराज ने ये जानकारी दी। प्रलेस के महासचिव ईशमधु ने बताया कि राज्य गीत बन चुके धरती धोरा री' जैसी रचनाएं लिखने वाले अकादमी पुरस्कार विजेता, पद्मश्री कन्हैया लाल सेठिया की जन्म स्थली के साथ ही यह महान संगीतकारों की भी धरती है। उन्होंने कहा कि महल फिल्म के चर्चित गीत आएगा आने वाला' से लता मंगेशकर को रातों रात सुपर सितारा बना देने वाले संगीतकार खेमचंद प्रकाश के साथ ही तानसेन के शिष्यों की पीढ़ी के जमाल सेन, दिलीप सेन-समीर सेन की भी यह धरती है। इसकी पांचवीं पीढ़ी के सोहेल सेन अभी काम कर रहे हैं। इसके अलावा दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा' जैसे गीत लिखने वाले फिल्म गीतकार पीके मिश्रा की भी यह धरती है। टाइम पत्रिका ने इक्कीसवीं शताब्दी के टॉप-10 गीतों में इसे शामिल किया था। सुजानगढ़ की इस पृष्ठभूमि को देखते हुए ही यहां फिल्म संगीत उत्सव भी आयोजित किया जाएगा। तलवार ने कहा कि सुजानगढ़ में विश्व कविता संग्रहालय बनने से यहां देश विदेश से शोधार्थी आएंगे, जो निकट के ताल छापर में दुर्लभ काले हिरणों का अभयारण्य भी देख सकेंगे। अंचल सृजन यात्रा में सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत सेठिया की चर्चित रचना धरती धोरा री' के गायन से हुई से हुई। इसमें लोक कलाकारों के गायन के साथ ही मुकेश वर्मा ने जन गीतों की सुरीली 
प्रस्तुति दी। इसके बाद कवि, लेखक फारूक आफरीदी ने कन्हैया लाल सेठिया पर पर्चा पढ़ा, जबकि आलोचक राजाराम भादू ने उनके रचना कर्म की सामाजिक परिवेश की दृष्टि से व्याख्या की। ईशमधु तलवार ने सुजानगढ़ की संगीत हस्तियों के उपादान पर रोशनी डाली। विख्यात कथाकार जितेंद्र भाटिया ने फिल्म संगीत के सफर पर दिलचस्प व्याख्यान दिया।