बांसुरी एवं अलगोजा की धुनों से गुंजायमान हुआ सिटी पैलेस

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सिटी पैलेस में आयोजित 'सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर' में बच्चे सीख रहे हैं वाद्ययंत्रों एवं लोक नृत्यों की बारीकियां

जयपुर
प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी सिटी पैलेस में 'सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर' आयोजित किया जा रहा है। ग्रीष्मकालीन इस शिविर में बांसुरी, अलगोजा, गिटार, घूमर एवं जयपुर घराना के कथक नृत्य जैसी विभिन्न कार्यशालाओं में सभी की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिल रही है। कैम्प के तहत आयोजित की जा रही इन कार्यशालाओं में 8 वर्ष से 30 वर्ष की आयु के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स वर्कशॉप: म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स वर्कशॉप में 30 से अधिक प्रतिभागी बांसुरी एवं अलगोजा वादन और 10 स्टूडेंट गिटार बजाना सीख रहे हैं। रहमान हरफनमौला द्वारा गिटार वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस वर्कशॉप में अधिकांश स्टूडेंट अपने प्रशिक्षण के आरम्भिक स्तर पर हैं। इन्हें गिटार की बनावट, स्ट्रिंग्स के नाम, ट्यूनिंग, मुख्य तार और गिटार वादन की मुद्राओं सहित गिटार वादन के बुनियादी सिद्धांत सिखाए जा रहे हैं। बांसुरी एवं अलगोजा वर्कशॉप आर. डी. गौड़ द्वारा संचालित की जा रही है। उन्हें बांसुरी वादन में 40 वर्षों तथा अलगोजा वादन में 28 वर्षों का व्यापक अनुभव है। इन्होंने बताया कि इन वाद्ययंत्रों को सीखने से समन्वय, याददाश्त और एकाग्रता में वृद्दि होती है और तनाव भी कम होता है। प्रतिभागियों को प्रारम्भ में इन वाद्ययत्रों के मूल सिद्धांतों, इनकी पोजिशन एंगल एवं साउंड टेक्नीक की जानकारी दी गई है। इसके पश्चात् इन्हें सरगम, अलंकार एवं राग भोपाली का अभ्यास कराया जा रहा है। वर्कशॉप के दौरान बच्चों को अन्य राग भी सिखाए जाएंगे।

डांस वर्कशॉप : डांस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को डॉ. ज्योति भारती द्वारा कथक, राजस्थानी लोक नृत्य और जयपुर घराने का कथक नृत्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी अत्यधिक उत्साह के साथ कथक सीख रहे हैं। डॉ. ज्योति भारती ने बताया कि छोटे बच्चों को कथक के 'लय' एवं 'ताल' सिखानें के लिए पक्षियों एवं तारों की कविताओं की मदद ली जा रही है। इस वर्कशॉप में डॉ. ज्योति भारती प्रतिभागियों को राजस्थानी लोक नृत्य, घूमर, गणेश वंदना के साथ-साथ लोक गीत 'नैना रा लोभी' पर भी नृत्य करना सिखा रही हैं।