सीएम गहलोत के निर्देशों के बाद अधूरे प्रोजेक्ट्स पकडेगे रफ्तार

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नो दिन में चले ढाई कोस जैसी स्थिति में फंसे नगरीय विकास विभाग के प्रोजेक्ट्स

विवादों से जनता के प्रोजेक्ट्स का रहा नाता

जयपुर

प्रदेश में नई सरकार के गठन को 10 महिने गुजर चुके है... बीते इस वक्त में यूडीएच विभाग के कई अहम प्रोजेक्ट्स गति नही पड़ पाये।कुछ परियोजनाएं तो ऐसी है जिनका काम पूरी तरह से थम सा गया है।लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर पर हुई समीक्षा के बाद अब फिर से ये प्रोजेक्ट धरातल की ओर बढने की उम्मीद जगी है।हमने पडताल करने की कोशिश की आखिर प्रोजेक्ट्स कहां अटके है।इन प्रोजेक्ट्स को लेकर सरकार को संबधित ऐजेंसिया आखिर कर रहा रही है।

सुस्त इंजीनियरों को जगाया सरकार ने
राज्य में ऩई सरकार के गठन को 10 माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकार बदलने के बाद यह उम्मीद जगी थी की सरकार के द्वारा चलाए जा रहे जनहितेशी प्रोजेक्ट तय़ समय पर पुरे होंगे।सीएम अशोक गहलोत के निर्देशों और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के फील्ड में सक्रिय होने के बाद उम्मीदे पुरी होती दिख रही थी मगर सरकार इजीनियरिंग की सुस्ती के चलते फील्ड में यह हो नही पा रहा है।हालात यह है कि जेडीए के स्तर पर रोजाना इन प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।फिलहाल लगातार राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अन्य शहरों में चल रहे जनता से जुडे प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य कछुआ चाल चल रहे है।

 किसी ना किसी विवाद ने कर ही दिया लेट  

पडताल में सामने आया कि किसी ना किसी विवाद या सरकारी पेचीदगियों के कारण जनता से जुडे प्रोजेक्ट्स सुस्त गति से चल रहे है।अकेले राजधानी जयपुर में चार बडे प्रोजेक्ट् के निर्माण की रफ्तार ऐसी है कि जिसके बारे में जब हमने ग्राउंड पर हाल जाना तो यही सामने आया कि इनका निर्माण कब पुरा होगा।

 

दृव्यवती नदी सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट

47 किलोमीटर है प्रोजेक्ट की लंबाई

करीब 1550 करोड रुपए का है ये प्रोजेक्ट 

4 अगस्त 2016 को हुआ इसका शिलान्यास

15 अगस्त 2018 तक पूरा करने का दावा 

2 अक्टूबर को मात्र 16 किमी कॉरिडोर का उद्घाटन

अब तक 5 बार बढी इस  प्रोजेक्ट की डेडलाइन 

अब दिसंबर 2019 तक पूरा होने की उम्मीद

6 जून को यूडीएच मंत्री ने किया था प्रोजेक्ट का दौरा

10 प्रतिशत काम अभी भी बाकी

ठेकेदारों की हडताल से प्रभावित हुआ प्रोजेक्ट

 

सोडाला एलिवेटेड रोड

250 करोड़ है प्रोजेक्ट की लागत

2.8 किलोमीटर लंबा है प्रोजेक्ट 

40 प्रतिशत काम अभी भी अधूरा

दिसंम्बर 2016 को हुआ था प्रोजेक्ट का शिलान्यास

पहले जनवरी 2018 तक होना था पूरा काम

अब भी दिसंबर 2019 तक पूरा होने का लक्ष्य

5 जून को मंत्री शांति धारीवाल कर चुके है निरीक्षण

 

रिंग रोड परियोजना

कुल 46.4 किलोमीटर है प्रोजेक्ट की लंबाई

कुल 810 करोड का है ये पूरा प्रोजेक्ट

आगरा रोड से अजमेर रोड़ तक है ये प्रोजेक्ट

आचार संहिता से पहले मार्च में अधूरे प्रोजेक्ट का हुआ उदघान

केन्द्र सरकार ने किया उद्घाटन

19 किलोमीटर अधूरा है प्रोेजेक्ट

अब दिसंबर 2019 तक भी प्रोजेक्ट के पूरा होने की उम्मीद नही

पिछले दिनों मंत्री धारीवाल ने किया था दौरा

प्रोजेक्ट शुरू होने से भारी ट्रांसपोर्ट होगा सुगम

 

परकोटे में मेट्रो—फेज 1 बी

चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक भूमिगत कोरिडोर

1.9 किलोमीटर है प्रोजेक्ट की लंबाई

1126 करोड़ है प्रोजेक्ट की कोस्ट

देरी के कारण 300 करोड़ का हुआ अतिरिक्त भार

पहले अगस्त 2019 तक पूरा होना था काम

अब दिसंबर 2019 तक परकोटे में चलेगी मेट्रो

पिछली गहलोत सरकार में हुआ था प्रोजेक्ट का शिलान्यास

भाजपा सरकार ने कछुआ चाल से आगे बढा ये प्रोजेक्ट

यूडीएच मंत्री दो बार कर चुके प्रोजेक्ट का दौरा

 

चार के अलावा कई और भी लेट

इन चार बडे प्रोजेक्ट्स में देरी होने के कारण इनकी निर्माण की लागत का भार भी जेडीए पर आ गया है।जिसके चलते यह प्रोजेक्ट्स अच्छे खासे महंगे पड रहे है।इन चार बडे प्रोजेक्ट्स के अलावा जनता की गाडी कमाई से कई प्रोजेक्ट्स का काम फिलहाल सुस्त गति से चल रहा है। जिनमे झोटवाडा आरओबी,दांतली फ्लाईओवर,जाहोता फ्लाईओवर भी शामिल है।

 

अब निर्माण रफ्तार में आएगी तेजी-रविकांत

हजारों करोड रुपये के इन प्रोजेक्ट्स को पुरा करने के लिए अब जेडीए के आयुक्त टी.रविकांत रोजाना अपने स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग कर रहे है।जेडीसी  टी.रविकांत की माने तो सभी प्रोजेक्ट्स के विवादों को दुर कर दिया गया अब निर्माण कार्य रफ्तार पकडेंगे।

 

मॉनिटरिंग नही की तो फिर होंगे लेट

बहरहाल इन प्रोजेक्ट्स को पुरा करने पर सरकार ने अपनी और से कई बार निर्देश दिए जा चुके है।पहले जमीनों के विवाद फिर ठेकेदारों के विवाद और कई तरह के विवादों से इन प्रोजेक्ट्स को दूर करने के बाद अब इन प्रोजेक्ट्स के तेजी से पुरा करने की बात महकमें के अधिकारी कह रहे है।लेकिन अगर जनता से जुडे इन प्रोजेक्ट्स की समय समय पर मॉनिटरिंग नही की गई तो शायद फिर से इन प्रोजेक्ट्स पर कोई ग्रहण ना लग जाए।ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिेए की इन प्रोजेक्ट्स को अब इंजिनियरिंग विंग रफ्तार देगी ताकि जनता की जरुरते पुरी हो सके।