राजस्थान में बंद किए गए 7 लाख मोबाइल कनेक्शन

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टेलीकॉम
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60 हजार से ज्यादा कनेक्शन के जरिए अलवर-भरतपुर से हो रही थी ऑनलाइन ठगी

जयपुर। राजस्थान में 7 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं। इनमें से 6.28 लाख कनेक्शन काफी समय से यूज में नहीं लिए जा रहे थे। वहीं, 60 हजार से ज्यादा कनेक्शन केवल अलवर-भरतपुर बेल्ट के मेवात एरिया के बताए जा रहे हैं। जो ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से जुड़े थे। इन पर कंट्रोल के लिए पुलिस और दूरसंचार विभाग की टीम लगातार कार्यवाही कर रही थी। इसके बावजूद मामले कम नहीं हो रहे थे। आखिर सभी नंबर बंद कर गिए गए हैं। ये सभी नंबर फर्जी आईडी के जरिए उठाए गए थे।

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टेलीकॉम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मेवात क्षेत्र में पहाड़ी, जुहररा, नगर, सिकरी, खो, कैथवाड़ा, गोपालगढ़, कामां थाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए हैं। जिन हैंडसेट में मोबाइल सिम उपयोग की गई। उनमें से 74131 को भी ब्लॉक कर दिया है। इनके आईईएमआई नम्बर बंद कर दिए हैं।

ये कारण रहा मोबाइल कनेक्शन बंद करने का

टेलीकॉम डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक जो नंबर लम्बे समय से उपयोग में नहीं थे ऐसे करीब 6.28 लाख कनेक्शन थे, जिन्हें बंद किया गया। इसके अलावा मेवात क्षेत्र में बिना वेरीफिकेशन करवाए करीब 60 हजार कनेक्शन चल रहे थे, जिन्हे बंद किया गया। वहीं, एक ही फोटो से कई फर्जी कनेक्शन लेने के मामले में 12 हजार से ज्यादा कनेक्शन बंद किए गए है।

आपके नाम से फर्जी सिम उठाने का आप यूं कर सकेंगे पता

टेलीकॉम विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए नया सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत लोगों की आईडी से फर्जी तरीके से सिम अलॉर्ट करवाने पर लोग पता कर सकेंगे कि उनके नाम से कितनी सिम चल रही है। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने एक पोर्टल तैयार किया है, जिसका नाम टेफकोप (टेलीकॉम एनालेटिक्स फॉर फाड मैनेजमेंट एण्ड कंज्युमर प्रोटेक्शन) है।

इसी पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता फर्जी तरीके से संचालित सिम कनेक्शन को बंद करा सकता है। पोर्टल पर मौजूद विकल्प पर इसकी जानकारी देनी होगी। इसके बाद डीओटी यह जानकारी संबंधित मोबाइल ऑपरेटर को भेजेगा। यहां से संबंधित उपभोक्ता से मामले की तस्दीक की जाएगी और सही पाए जाने पर कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा।

एक आईडी से 9 कनेक्शन लिए जा सकते हैं

एक व्यक्ति अपनी आईडी से अधिकतम 9 मोबाइल सिम कनेक्शन ले सकता है। फर्जी तरीके से मोबाइल सिम हासिल कर अवैध गतिविधि करने के मामले सामने आते रहे हैं। स्थिति यह है कि लोगों को पता ही नहीं लग पा रहा था कि उनके नाम से कितने मोबाइल कनेक्शन जारी हैं।

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