8923. पर-संपत देखै जरां

  • मानै कर निज मीच, पर-संपत देखै जरां।
  • निपट दुखी ह्वै नीच, रीसां बळ-बळ राजिया।।

जो निम्न व्यक्ति होता है, वह जब दूसरों के पास संपति देखता है तो, हाथ भींच कर जलता है और बहुत दुखी होता है कि और इतने संपन्न क्यों है?
एक बहेलिया नित्य जंगल में शिकार करने जाया करता था। एक दिन जंगल में एक हंस और हंसिनी को उसने देखा। उसने उन्हें तीर का निशाना बनाना चाहा। तब हंस और हंसिनी ने उससे कहा कि तुम हमें मत मारो। हमें मारकर तुम्हें क्या मिलेगा, हमारा मांस ही। लेकिन यदि तुम हमें नहीं मारोगे, तो हम तुम्हें नित्य दो मोती दे दिया करेंगे। यह तो तुम जानते ही हो कि मोती बड़े कीमती होते हैं। उनकी बात सुनकर बहेलिया मान गया। हंस और हंसनी ने तब उसे दो मोती दिए, उनको लेकर वह अपने घर आ गया। अब वह उनसे नित्य दो मोती ले आता और उन्हें जाकर बाजार में बेच देता। इस प्रकार कुछ ही दिनों उसके पास काफी रूपये इकटठे हो गए। पडोसिन ने जब बहेलिये की बदलती दशा देखी तो उसे बड़ा आश्चय हुआ। उसने मन में विचार किया कि इस बात का पता लगाना चाहिए। पडोसिन ने बहेलिये की स्त्री सारी बात का पता लगा लिया। उसे बडी ईष्र्या हुई कि यह बहेलिया तो नित्य दो मोती प्राप्त करके एक दिन बहुत ही पैसे वाला हो जाएगा। फिर इसके सामने हमारी कोई इज्जत नहीं रह जाएगी। इसलिए किसी न किसी तरह हंस और हंसिनी को मरवा देने चाहिए। उसने सोचा तो उसे एक रास्ता नजर आया। दरअसल बहेलिया के कोई संतान नहीं थी, इसलिए दोनों पति पत्नी बहुत दुखी रहते थे। पडोसिन फिर जब बहेलिये की स्त्री से मिली और उससे बातें करने लगी तो बोली कि अब तो तुम्हारे किस बात की कमी है। दो मोती नित्य जो मिलते हैं। तब बहेलिये की स्त्री कहने लगी कि बहन, इससे हमारे पास धन तो खूब हो जाएगा, लेकिन क्या फायदा। हमारे तो कोई संतान नहीं है। फिर यह धन किसके काम आएगा। तब पडोसिन बोली कि सुनो बहन, संतान प्राप्ति का उपाय हे और वह पुत्र प्राप्ति का। यदि तुम कर सको तो तुम्हें अवश्य पुत्र की प्रापित हो सकती है। बहेलिये की स्त्री ने पूछा कि मुझे क्या करना होगा? पडोसिन ने कह दिया कि यदि तुम हंस का मांस खा लो, तो निश्चय ही तुम्हारे पुत्र होगा। बहेलिये की स्9ी ने अपने पति को सारी बात बताकर हंस मांस लाने को कहा। अगले ही दिन बहेलया जंगल पहुंचा और हंस हंसिनी को उसने मारना चाहा। हंसों ने बहुत प्रार्थना की, लेकिन वह नहीं माना। बहुत सोर मोती देने को कहा तो भी वह टस का मस नहीं हुआ। संयोग से उसी वक्त शिकार खेलता हुआ राजा भी वहां आ पहुंचा। हंस हंसिनी की करूण पुकार सुनकर राजा ने बहेलिये से कहा कि या तो तू इन्हें छोड दे अन्यथा मैं तुम्हे जान से मार डालंंूगा। बहेलिया डर गया और उसने हंस हंसिनी को छोड़ दिया। राजा हंस हंसिनी के जोड़े को अपने महल में ले गया।