16 वर्षों बाद तारानगरवासियों को आध्यात्मिक अभिसिंचन देने पहुंचे महातपस्वी

विकार को छोड़ संस्कार प्राप्ति की दिशा में बढें आगे : आचार्य महाश्रमण

विशेष प्रतिनिधि, तारानगर

बुधवार को राजस्थान के चूरू जिले का तारानगर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक प्रकाश से जगमगा उठा। 16 वर्षों बाद अपने आध्यात्मिक गुरु से आध्यात्मिक अभिसिंचन प्राप्त कर जन-जन का मन अध्यात्म भावों से ओत-प्रोत हो उठा। लम्बी प्रतीक्षा के बाद सौभाग्य से प्राप्त इस अवसर का ताराहुमारा ने पूर्ण लाभ उठाया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ अपने आराध्य को लेकर श्री ओसवाल पंचायत भवन में प्रवेश, मंगल प्रवचन, अभिवंदना कार्यक्रम के उपरान्त भी श्रद्धालु पूरे दिन अपने आराध्य के निकट सान्निध्य व सेवा में संलग्न रहे।

बुधवार को प्रात: आचार्यश्री महाश्रमणजी ने जिगसाना ताल से मंगल प्रस्थान किया। आज आचार्यश्री उस श्रद्धा के क्षेत्र की ओर गतिमान थे जो 16 वर्षों से अपने आराध्य के मंगल पदार्पण की बाट जोह रहा था। वर्ष 2006 के बाद इस क्षेत्र में आचार्यों का पदार्पण ही नहीं हुआ। ऐसे प्यासे श्रद्धा के क्षेत्र की प्यास बुझाने को महातपस्वी महाश्रमणजी गतिमान हुए तो उत्साही तारानगरवासी जिगसाना ताल से ही अपने आराध्य के चरणों का अनुगमन करने लगे। आसमान से आतप बरसा रहे सूर्य की किरणें भी आज मानों श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के कारण अपना पूर्ण असर नहीं दिखा पा रही थीं। जैसे-जैसे आचार्यश्री तारानगर के निकट होते जा रहे थे, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का उत्साह और उपस्थिति दोनों ही बढ़ती जा रही थी।

अपनी धवल सेना संग आचार्यश्री ने तारानगर में अहिंसा द्वार से मंगल प्रवेश किया तो ज्योतिचरण के चरणरज पाकर तारानगर देदीप्यमान हो उठा। स्वागत को खड़े हजारों श्रद्धालुओं के बुलंद जयघोष पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। नगर में संचालित विभिन्न स्कूलों के छात्र, एनसीसी के कैडेट, तेरापंथ समाज के सभी संगठनों के सदस्य अपने-अपने गणवेश तेरापंथ के महासूर्य की अभिवंदना कर रहे थे। तारानगर के विधायक नरेन्द्र बुडानियां, प्रधान संजय कास्वां, नगरपालिका अध्यक्ष प्रियंका उस्मान बानो आदि अनेक गणमान्य लोगों ने भी आचार्यश्री का हार्दिक स्वागत किया। भव्य स्वागत जुलूस के साथ नगरवासियों पर आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री तारानगर के श्री ओसवाल पंचायत भवन में पधारे।

पंचायत भवन के सन्निकट बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अभिसिंचन देने के लिए मंचासीन हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में धर्म है तो अधर्म भी चलता है। अहिंसा, शांति धर्म है तो अशांति, अनैतिकता अधर्म है। धर्म को सबसे उत्कृष्ट मंगल बताया गया है। अहिंसा, संयम और तप धर्म हैं। जैन शास्त्रों में अहिंसा का सूक्ष्म विवेचन प्राप्त होता है। हम साधु लोग तो उस सूक्ष्म अहिंसा के पालक होते हैं। उसके लिए साधु सूर्यास्त के बाद न तो खाना खाते हैं, और न ही पानी पीते हैं। गृहस्थ जीवन में अहिंसा को सूक्ष्म रूप से नहीं पाला जा सकता है तो छोटे-छोटे नियमों के माध्यम से यथासंभव अहिंसा का पालन करने का प्रयास करना चाहिएं संकल्पपूर्वक किसी भी प्राणी की हिंसा से बचने का प्रयास होना चाहिए। आजीविका चलाने के लिए वृत्ति आवश्यक है तो उसमें भी नैतिकता और प्रमाणिकता बनी रहे। शेष पृष्ठ 3 पर

आदमी को अपने जीवन और कर्मस्थान में नैतिकता और ईमानदारी को विशेष स्थान देने का प्रयास करना चाहिए। संयम करने और यथासंभव तप कर विकारों को छोड़ संस्कार की दिशा में आगे बढऩे का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने तारानगर आगमन के संदर्भ में कहा कि थली की यात्रा के दौरान आज तारानगर में आना हुआ है। सन् 2000 में आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का मर्यादा महोत्सव यहां आयोजित हुआ था। तारानगरवासियों में आध्यात्मिकता, धार्मिकता और नैतिकता का विकास होता रहे। मुनि ऋषभकुमारजी ने अपनी जन्मभूमि में आचार्यश्री के स्वागत में अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी।

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय विधायक श्री नरेन्द्र बुडानियां ने कहा कि मैं समस्त क्षेत्र की जनता की ओर से राष्ट्रसंत आचार्यश्री महाश्रमणजी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं और आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करता हूं, क्योंकि आज आपके मंगल संदेश की आवश्यकता पूरे देश को है, समाज को है। मेरे मन में आपके दर्शन की लालसा कई दिनों से थी जो आज फलीभूत हुई है। आपके प्रवचन को सुनकर मुझे ऐसा लगा कि आपके प्रवचन लोगों की चेतना को पवित्र बनाने वाले हैं। आपकी कृप

तारानगरवासियों पर सदैव बनी रहे। तेरापंथी सभा-तारानगर के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र बोथरा, श्री अशोक बरमेचा, मुमुक्षु रोशनी लुणिया, वार्ड-8 की पार्षद सरिता बैद, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह राठौड़, राजस्थान शिक्षा सेवा लेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम कड़वासरा व ओसवाल पंचायत समिति के मंत्री श्री विमलजी ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। समणी मृदुप्रज्ञाजी, स्थानीय तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ कन्या मण्डल, तेरापंथ युवक परिषद ने पृथक्-पृथक् गीत का संगान किया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। शासनमाता विशेषांक ‘जिनागमÓ पूज्यचरणों में लोकार्पित की गई।