ब्रिक्स में महिला नेतृत्व पर बड़ा जोर
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स प्लस डायलॉग 2026 में महिला नेताओं ने नवप्रवर्तन, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्थायी संस्थागत व्यवस्था की मांग उठाई। पैनल ने फंडिंग, बाजार, शिक्षा, एआई, सीमा-पार सहयोग और महिला नेतृत्व को मजबूत करने के लिए साझा तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
- महिला नेतृत्व: ब्रिक्स प्लस देशों में नवप्रवर्तन और तकनीक में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने पर जोर।
- नवप्रवर्तन: महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग और बाजार तक पहुंच आसान बनाने की मांग।
- ब्रिक्स सहयोग: साझा प्लेटफॉर्म, मानकीकरण और महिला उन्नति कोष को मजबूत करने पर चर्चा।
BRICS Women Push for Leadership : नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स प्लस डायलॉग 2026 में महिला नेतृत्व को लेकर एक अहम सवाल सामने आया महिलाओं की प्रतिभा और भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन क्या संस्थागत स्तर पर उन्हें निर्णय लेने की पर्याप्त जगह मिल रही है?
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुए इस उच्चस्तरीय संवाद में ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और भारत की महिला नेताओं तथा विशेषज्ञों ने नवप्रवर्तन पारितंत्र में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने किया। सत्र का विषय था, “हाशिए से मुख्यधारा तक: ब्रिक्स नवाचार पारितंत्र में महिलाओं के नेतृत्व को संस्थागत रूप देना।”
पैनल में ब्रिक्स सीसीआई वुमेन एम्पावरमेंट की अध्यक्ष और वुमेन इन इनोवेशन, साइंस एंड एंटरप्रेन्योरशिप (WISE) की प्रोग्राम लीड रूबी सिन्हा, पूर्व ब्रिक्स शेरपा एवं भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय भट्टाचार्य, दक्षिण अफ्रीका की ब्रिक्स वुमेन्स बिजनेस एलायंस चेयरपर्सन लेबोगांग जुलु, ब्राजील चैप्टर की चेयरपर्सन मोनिका मोंटेरियो, ईरान की शादी सेदघिनेजाद और रूसी एजुकेशन एजेंसी की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं की निदेशक याना ओसेयेवा शामिल थीं।
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रूबी सिन्हा ने कहा कि महिलाओं को केवल मंच और पहचान देने से काम नहीं चलेगा। नवप्रवर्तन और निवेश से जुड़े संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी।
उन्होंने WISE पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका फोकस नवप्रवर्तन एवं सहयोग, फंडिंग तक पहुंच और नीतिगत वकालत पर है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स प्लस देशों की महिलाओं को विज्ञान, तकनीक, एआई और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए तैयार करना है।
सिन्हा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को मिलने वाली पूंजी अभी भी बेहद सीमित है। इसलिए असली चुनौती महिलाओं को दिखाई देने वाले चेहरों तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि उन्हें फंडिंग और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में वास्तविक स्थान देने की है।
उन्होंने कहा कि कोच्चि में ब्रिक्स महिला ट्रैक के तहत संयुक्त बयान आना एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन अब जरूरत यह सुनिश्चित करने की है कि ऐसे संकल्प किसी एक अध्यक्षता या कार्यकाल तक सीमित न रहें।
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दक्षिण अफ्रीका की लेबोगांग जुलु ने ब्रिक्स महिला उन्नति कोष को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, ब्रिक्स महिला स्टार्टअप प्रतियोगिता के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे कारोबार और समाधान सामने आए हैं, जिन्हें ब्रिक्स देशों में व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है।
समस्या यह है कि इन उद्यमों को निवेशकों, खरीदारों और बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए पर्याप्त साझा मंच मौजूद नहीं है। जुलु ने बताया कि 2026 में दक्षिण अफ्रीका की डब्ल्यूबीए अध्यक्षता के प्रमुख एजेंडे में महिला उन्नति कोष के लिए ऐसा ढांचा तैयार करना शामिल है, जो ब्रिक्स और न्यू डेवलपमेंट बैंक की वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप हो।



