ट्रिलियन डॉलर की राह पर CE उद्योग का बड़ा दांव
नई दिल्ली में ICEMA के वार्षिक सत्र 2026 में निर्माण उपकरण उद्योग ने भारत की ट्रिलियन डॉलर मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था के लिए अपनी भूमिका पर जोर दिया। सरकार और उद्योग ने लोकलाइजेशन, निर्यात, खनन मशीनीकरण, तकनीक, पूंजीगत खर्च और प्रस्तावित CIE योजना को विकास की अगली रफ्तार का अहम आधार बताया।
- निर्माण उपकरण उद्योग ने 2030 तक 3 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर जोर दिया।
- CIE योजना से लोकलाइजेशन और घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खनन में CE की भूमिका अहम होगी।
Construction Equipment Industry Eyes India’s Trillion-Dollar Manufacturing Ambition : नई दिल्ली में आयोजित भारतीय निर्माण उपकरण निर्माता संघ (ICEMA) के वार्षिक सत्र 2026 में देश के निर्माण उपकरण उद्योग ने भविष्य की विकास रणनीति पर अपना फोकस साफ किया। होटल ताज पैलेस में हुए इस कार्यक्रम का मुख्य विषय भारत की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में निर्माण उपकरण क्षेत्र की भूमिका रहा। सरकार, नीति आयोग और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।

कार्यक्रम में केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद शामिल हुए। ICEMA अध्यक्ष और JCB India के CEO एवं Managing Director दीपक शेट्टी ने उद्योग की ओर से चर्चाओं का नेतृत्व किया।
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केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रस्तावित निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण संवर्धन योजना महत्वपूर्ण मशीनों और कलपुर्जों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे सकती है।
उनके मुताबिक, इससे सप्लाई चेन मजबूत होने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। सरकार और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से भारत को निर्माण उपकरणों के निर्माण और तकनीक का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
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हालांकि वित्त वर्ष 2026 में घरेलू बाजार में कुछ दबाव देखने को मिला, लेकिन निर्यात के मोर्चे पर उद्योग का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस दौरान कुल निर्माण उपकरण बिक्री 1,36,995 यूनिट रही, जो वित्त वर्ष 2025 से करीब 2 प्रतिशत कम है। घरेलू मांग में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट इसका प्रमुख कारण रही।
इसके उलट, निर्यात में करीब 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उद्योग के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत में निर्मित निर्माण उपकरणों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत मिलता है।
ICEMA के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में उद्योग के दोबारा विकास की राह पर आने की उम्मीद है। सरकार के पूंजीगत खर्च, परियोजनाओं में तेजी और प्रस्तावित CIE योजना से मांग को सहारा मिलने की संभावना है। वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार के 12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को भी उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।



