सोना-चांदी में आई बड़ी नरमी, निवेशकों की बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों के बदलते रुख का असर बुधवार को सोना और चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में कीमती धातुओं के भाव कमजोर रहे। वहीं डॉलर इंडेक्स की मजबूती और शेयर बाजारों में तेजी ने भी निवेशकों का रुख प्रभावित किया।
- सोना-चांदी की कीमतों में करीब आधा प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई।
- मध्य पूर्व तनाव और मजबूत डॉलर इंडेक्स का बाजार पर असर दिखा।
- वैश्विक बाजारों की तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुले।
Gold and Silver Prices Slip Amid Global Tensions: मुंबई। बुधवार के कारोबारी सत्र में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे दोनों कीमती धातुओं के भाव फिसल गए।
एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोने का वायदा कारोबार पिछली क्लोजिंग की तुलना में गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार के दौरान सोने में लगभग 0.43 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,40,740 रुपये के निचले स्तर तक पहुंची, जबकि उच्च स्तर 1,41,695 रुपये रहा।
चांदी में भी नरमी का रुख देखने को मिला। 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाला वायदा अनुबंध शुरुआती कारोबार में पिछली क्लोजिंग से नीचे खुला और करीब 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। सोने की कीमत करीब 0.71 प्रतिशत और चांदी करीब 0.45 प्रतिशत तक कमजोर रही। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर इंडेक्स के 100 के ऊपर बने रहने से कीमती धातुओं में दबाव देखने को मिल रहा है।
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दूसरी ओर, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखा। बुधवार सुबह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ खुले। एशियाई बाजारों में टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, जबकि शंघाई में हल्की कमजोरी रही।
अमेरिकी बाजारों का रुख भी सकारात्मक रहा। मंगलवार को डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी आधारित नैस्डैक में करीब 0.90 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर बनी हुई है, जो आगे सोना-चांदी की चाल तय कर सकती हैं।



