चीनी पर 15 दिन की स्टॉक लिमिट
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े औद्योगिक एवं संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए नया नियम लागू किया है। 1 सितंबर से 30 नवंबर तक 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक खपत वाले उपभोक्ता केवल 15 दिन की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।
- चीनी स्टॉक सीमा: बड़े उपभोक्ता अब सिर्फ 15 दिन का भंडार रख सकेंगे।
- कीमतों पर नियंत्रण: बढ़ती चीनी कीमतों और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का कदम।
- त्योहारी सीजन तैयारी: मिठाई, कन्फेक्शनरी और खाद्य उद्योगों पर नया नियम लागू।
Government Tightens Sugar Stock Limits: केंद्र सरकार ने त्योहारी मांग बढ़ने से पहले चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक सीमा और सख्त कर दी है। अब बड़े औद्योगिक और संस्थागत उपभोक्ता अपनी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा नहीं कर सकेंगे। नया आदेश 1 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।
सरकार के अनुसार, जिन संस्थानों की मासिक चीनी खपत 10 मीट्रिक टन से अधिक है, वे अधिकतम 15 दिन की औसत जरूरत के बराबर ही स्टॉक रख पाएंगे। इस दायरे में मिठाई निर्माता, कन्फेक्शनरी कंपनियां, शीतल पेय उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, हलवाई और अन्य बड़े संस्थागत खरीदार शामिल हैं।
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उपभोक्ताओं की स्टॉक सीमा का निर्धारण पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर किया जाएगा। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा स्थानीय निकायों से जुड़ी संस्थाओं को इस नियम से बाहर रखा गया है।
सरकार ने चीनी की बिक्री और खपत पर निगरानी भी बढ़ाने का फैसला किया है। चीनी मिलों द्वारा बड़े खरीदारों को सीधे या डीलरों के माध्यम से की जाने वाली बिक्री का सत्यापन जीएसटी रिटर्न और संबंधित एचएसएन कोड के जरिए किया जाएगा। इसका उद्देश्य वास्तविक खरीद और खपत की जानकारी जुटाना है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब सरकार पहले ही डीलरों के लिए चीनी भंडारण सीमा 30 दिन तक सीमित कर चुकी है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में तेजी जारी रही। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जो एक साल पहले 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम था। यानी कीमतों में सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सरकार को उम्मीद है कि नई स्टॉक सीमा से जमाखोरी की संभावना कम होगी और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी।



