भारत का फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड स्तर पर
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 44.90 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की बड़ी भूमिका रही। इस उछाल से देश की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।
- फॉरेक्स रिजर्व 44.90 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हुईं।
- आरबीआई के रिकॉर्ड से भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और मजबूत होने के संकेत मिले।
India’s Forex Reserves Hit Record: मुंबई। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 44.90 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर हो गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
इससे पहले भी विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में रिजर्व 11.47 अरब डॉलर बढ़ा था और यह 740.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। यानी लगातार दो सप्ताह में कुल वृद्धि 56 अरब डॉलर से अधिक रही है।
ताजा आंकड़ों में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) का रहा। समीक्षा अवधि में FCA में 47.498 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 648.17 अरब डॉलर हो गई। मार्च 2026 के अंत के मुकाबले विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 95.886 अरब डॉलर ज्यादा हैं।
सालाना आधार पर भी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में मजबूत बढ़ोतरी दिखाई दी है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इनमें 63.692 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे कुल फॉरेक्स रिजर्व को नई ऊंचाई तक पहुंचने में अहम मदद मिली।
हालांकि, इसी सप्ताह भारत के स्वर्ण भंडार में कमी दर्ज की गई। गोल्ड रिजर्व 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद एक साल पहले की तुलना में भारत का स्वर्ण भंडार 23.517 अरब डॉलर ज्यादा है। वहीं, मार्च 2026 के अंत के स्तर से इसमें 1.580 अरब डॉलर की गिरावट आई है।
आईएमएफ से जुड़े आंकड़ों में भी मामूली बदलाव हुआ है। भारत की विशेष आहरण अधिकार (SDR) होल्डिंग्स 4 मिलियन डॉलर घटकर 18.806 अरब डॉलर रह गईं। हालांकि, मार्च 2026 के अंत की तुलना में SDR होल्डिंग्स 184 मिलियन डॉलर और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 64 मिलियन डॉलर अधिक हैं।
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दूसरी ओर, आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन में मामूली सुधार हुआ। यह 2 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर पर पहुंच गई। यह राशि मार्च 2026 के अंत से 108 मिलियन डॉलर और एक साल पहले के स्तर से 168 मिलियन डॉलर ज्यादा है।
कुल तस्वीर देखें तो मार्च 2026 के अंत से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 94.599 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 87.438 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।
फॉरेक्स रिजर्व में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बाहरी वित्तीय झटकों के दौरान अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
इसके अलावा पर्याप्त रिजर्व से रुपये की स्थिरता बनाए रखने, जरूरी आयात के भुगतान को समर्थन देने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के दौरान अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। ताजा आंकड़े भारत की मजबूत होती बाहरी वित्तीय स्थिति की ओर भी संकेत कर रहे हैं।



