BRICS से भारत को नई आर्थिक उड़ान
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और बिजनेस फोरम में उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक ताकत, डिजिटल क्षमता और उद्यमिता को वैश्विक विकास के लिए अहम बताया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिक्स देशों के साथ बढ़ता सहयोग व्यापार, निवेश, रोजगार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के क्षेत्र में भारत के लिए नए रास्ते खोल सकता है और उसकी वैश्विक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
- BRICS और भारत: आर्थिक सहयोग से नए वैश्विक अवसर बनने की उम्मीद।
- डिजिटल इंडिया: UPI और डिजिटल पेमेंट मॉडल भारत का प्रभाव बढ़ा सकते हैं।
- क्रिटिकल मिनरल्स: खनिज सहयोग से सुरक्षित वैश्विक सप्लाई चेन बनाने पर जोर।
India’s New BRICS Growth Opportunity: नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को लेकर उद्योग जगत और वैश्विक विशेषज्ञों ने सकारात्मक राय रखी। उनका कहना है कि तेज आर्थिक विकास के साथ भारत की उद्यमिता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग के नए अवसर तैयार कर सकती हैं।
फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज के मुताबिक, ब्रिक्स अब 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों वाला एक बड़ा वैश्विक समूह बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्पादन, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक जैसी अहम वैश्विक सप्लाई चेन में इस समूह की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, आपसी सहयोग से रोजगार, नवाचार और कारोबार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
द कॉर्पोरेट प्रोफाइल्स इंडिया के संस्थापक और अध्यक्ष नीरज भटनागर ने भारत की ताकत को सिर्फ आर्थिक विकास दर से जोड़कर देखने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि देश की असली ताकत उसकी उद्यमशीलता और लोगों की आगे बढ़कर अपना कारोबार खड़ा करने की क्षमता में है। उनके मुताबिक, नवाचार और उद्यमिता के मामले में भारत ब्रिक्स समेत दुनिया के कई देशों के लिए उदाहरण बन सकता है।
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डिजिटल क्षेत्र को लेकर भी विशेषज्ञों ने भारत की उपलब्धियों को रेखांकित किया। बरिस्ता कॉफी के सीईओ रजत अग्रवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने एक मजबूत डिजिटल भुगतान व्यवस्था तैयार की है और इसका फायदा देश के दूरदराज इलाकों तक पहुंचा है। उनका मानना है कि अगर UPI और भारतीय डिजिटल पेमेंट मॉडल को दूसरे देशों में विस्तार मिलता है तो इससे भारत की वित्तीय कूटनीति और आर्थिक प्रभाव दोनों मजबूत हो सकते हैं।
यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोरा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों और वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को देश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, ब्रिक्स जैसे मंच पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदगी भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देती है।
ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार का मुद्दा भी चर्चा में रहा। जेके पेपर लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयर हर्षपति सिंघानिया ने कहा कि भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने इसे सीधे तौर पर डि-डॉलराइजेशन से जोड़ने से सावधान किया। उनका कहना है कि वैश्विक व्यापार में डॉलर की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन कुछ द्विपक्षीय सौदों में स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है।
इस बीच, महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर भी भारत के प्रयासों की सराहना हुई। फ्रांस की भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्था BRGM में अंतरराष्ट्रीय भू-क्षेत्रों के निदेशक ओलिवियर फ्रेजो ने भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन को अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक विकास के साथ रेयर अर्थ एलिमेंट्स, टंगस्टन और कॉपर जैसे खनिजों की मांग बढ़ेगी।
फ्रेजो के मुताबिक, कॉपर विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, भूवैज्ञानिक डेटा, संसाधनों और खनिज प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। BRGM और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के बीच अन्वेषण, डेटा साइंस और खनिज प्रसंस्करण को लेकर भी साझेदारी जारी है।
उन्होंने कहा कि भारत का अलग-अलग देशों के साथ खनिज क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे किसी एक देश पर निर्भरता घटाने और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बढ़ती मांग को केवल रीसाइक्लिंग के जरिए पूरा करना संभव नहीं होगा। ऐसे में नए खनिज स्रोत तलाशने और टिकाऊ उत्पादन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत आगे और बढ़ेगी।
विशेषज्ञों की इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि ब्रिक्स भारत के लिए सिर्फ व्यापार और निवेश का मंच नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, खनिज संसाधन और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग का माध्यम भी बन सकता है।



