क्विक कॉमर्स बाजार 90 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

भारत में क्विक कॉमर्स का कारोबार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में करीब 13 अरब डॉलर का यह बाजार वित्त वर्ष 2031 तक 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस दौरान हर महीने लेनदेन करने वाले यूजर्स की संख्या भी 10 करोड़ से ज्यादा होने की उम्मीद है।

  • क्विक कॉमर्स: FY31 तक 90 अरब डॉलर का बाजार बनने का अनुमान।
  • क्विक कॉमर्स यूजर्स: हर महीने लेनदेन करने वाले यूजर्स 10 करोड़ पार कर सकते हैं।
  • क्विक कॉमर्स मार्केट: मेट्रो शहरों से ग्रोथ को सबसे ज्यादा रफ्तार मिलने की उम्मीद।

India’s Quick Commerce Market May Reach $90 Billion : नई दिल्ली। भारत में क्विक कॉमर्स का विस्तार अब सिर्फ कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं रह गया है। किराना और रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ यह सेक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी कैटेगरी में भी अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में करीब 13 अरब डॉलर का क्विक कॉमर्स बाजार वित्त वर्ष 2031 तक 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि इस अवधि तक हर महीने क्विक कॉमर्स पर लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। आने वाले समय में मेट्रो शहर इस विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगे, हालांकि गैर-मेट्रो शहरों में भी खरीदारी की आदतों में बदलाव से बाजार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

त्योहारी सीजन में भी तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा त्योहारी सीजन में क्विक कॉमर्स की बिक्री सालाना आधार पर करीब 110 फीसदी बढ़ सकती है। अनुमान है कि ऑनलाइन फेस्टिव खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी लगभग 18 फीसदी तक पहुंच सकती है।

मेट्रो शहरों में ग्राहकों के खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। अभी यह करीब 6 फीसदी है, जो वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 20 से 23 फीसदी तक पहुंच सकती है।

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इसी दौरान मेट्रो शहरों में क्विक कॉमर्स के यूजर्स की संख्या करीब 2.8 करोड़ से बढ़कर लगभग 5 करोड़ होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2031 तक इस सेक्टर की अतिरिक्त वृद्धि में मेट्रो शहरों की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी रह सकती है।

सिर्फ ‘टॉप-अप ऑर्डर’ से आगे बढ़ने की जरूरत

क्विक कॉमर्स ने शहरी ग्राहकों की खरीदारी की आदत में अपनी जगह बना ली है। अब अगला बड़ा अवसर किराना और पेंट्री की नियमित खरीदारी को अपने प्लेटफॉर्म पर लाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स को ग्राहकों को केवल जरूरत पड़ने पर छोटे-मोटे ‘टॉप-अप ऑर्डर’ करने की आदत से आगे ले जाकर घर के नियमित राशन और पेंट्री की खरीदारी के लिए क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल बढ़ाना होगा।

इसके लिए उत्पादों की ताजगी, सप्लाई चेन में पारदर्शिता, बड़े पैक की उपलब्धता और बेहतर कीमत जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होगा। साथ ही, ग्राहकों को दोबारा खरीदारी के लिए रिमाइंडर और व्यक्तिगत रीप्लेनिशमेंट कैंपेन के जरिए नियमित ऑर्डर की आदत विकसित करने की कोशिश की जा सकती है।

मेट्रो के साथ गैर-मेट्रो बाजार भी अहम

गूगल इंडिया में क्विक कॉमर्स और फूडटेक के इंडस्ट्री हेड करण दुगल के मुताबिक, भारत का क्विक कॉमर्स बाजार अब एक ही बिजनेस मॉडल पर निर्भर नहीं है। मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में ग्राहकों की खरीदारी की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स तक अलग-अलग कैटेगरी अब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदी जा रही हैं। ऐसे में बाजार के अगले चरण में वही ब्रांड आगे बढ़ पाएंगे, जो अलग-अलग ग्राहक समूहों की जरूरत और खरीदारी के व्यवहार को समझ सकें।

दुगल के मुताबिक, 10 करोड़ मासिक ट्रांजैक्टिंग यूजर्स के पड़ाव की ओर बढ़ते बाजार में नए ग्राहकों के साथ भरोसा कायम करना, पुराने ग्राहकों को दोबारा जोड़ना और लंबे समय तक ब्रांड लॉयल्टी विकसित करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, भारत में क्विक कॉमर्स अब सुविधा आधारित खरीदारी से आगे बढ़कर नियमित घरेलू खरीदारी का हिस्सा बनने की दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इसका विस्तार किन शहरों और कैटेगरी में सबसे तेज होता है, यह इस सेक्टर की अगली बड़ी कहानी तय करेगा।

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