डिजिटल फ्रॉड पर आरबीआई का नया चक्रव्यूह: 8 बैंकों में शुरू हुआ सुरक्षा कवच, क्या सुरक्षित रहेगा आपका पैसा?
देश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में 'आईडीपीआईसी' प्लेटफॉर्म को 8 प्रमुख बैंकों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत उतारा गया है। आरबीआई डिप्टी गवर्नर के मुताबिक, आधुनिक एआई तकनीक से लैस यह नया सिस्टम संदिग्ध लेनदेन को तुरंत भांपकर आम खाताधारकों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखेगा।
- आरबीआई का नया सुरक्षा कवच: ऑनलाइन फ्रॉड से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने 8 प्रमुख बैंकों में ‘आईडीपीआईसी’ का सफल ट्रायल शुरू किया।
- डिजिटल फ्रॉड पर तुरंत रोक: एआई (AI) और बिग डेटा से लैस यह नया नेटवर्क संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की रियल-टाइम सूचना सभी बैंकों से साझा करेगा।
- नकद और डिजिटल का संतुलन: ऑनलाइन पेमेंट में भारी उछाल के बावजूद नकदी का महत्व बरकरार, आरबीआई नियमों को और ज्यादा पारदर्शी बनाने में जुटा।
RBI Pilots IDPIC Across 8 Banks to Tackle Digital Fraud: डिजिटल पेमेंट की बढ़ती रफ्तार के बीच ऑनलाइन ठगी के मामलों ने आम आदमी से लेकर देश के केंद्रीय बैंक तक की चिंता बढ़ा दी है। इसी चुनौती से दो-दो हाथ करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक ऐसा सुरक्षा तंत्र खड़ा कर रहा है, जो साइबर अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर देगा। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन’ (IDPIC) का 8 बैंकों में पायलट रन शुरू कर दिया गया है।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि बैंक इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर इसे जल्द से जल्द पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। इस पहल की सबसे बड़ी ताकत इसकी आधुनिक तकनीक होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से वित्तीय संस्थानों के बीच संदिग्ध लेन-देन का रियल-टाइम अलर्ट साझा होगा, जिससे फ्रॉड होने से पहले ही पकड़ में आ सके।
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दिलचस्प बात यह है कि देश में यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ने के बावजूद नकदी (कैश) का दबदबा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। डिप्टी गवर्नर ने इस जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए कहा कि लेन-देन के लिए भले ही लोग मोबाइल और कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा रहे हों, लेकिन संकट के समय या बचत (स्टोर ऑफ वैल्यू) के लिए आज भी नकद पर भरोसा कायम है। आम परिवारों की आर्थिक स्थिति और नकदी के जुड़ाव को देखते हुए डिजिटल और कैश दोनों का सह-अस्तित्व बना रहेगा।
बैंकिंग नियमों को सरल और सख्त बनाने के मोर्चे पर भी आरबीआई लगातार सक्रिय है। मुर्मू ने जानकारी दी कि पिछले एक साल में रिजर्व बैंक ने 600 से ज्यादा ड्राफ्ट और फाइनल सर्कुलर जारी किए हैं। नियमों को सटीक बनाए रखने के लिए विनियमित संस्थाओं को 11 श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि हर संस्थान अपनी जिम्मेदारी को लेकर पूरी तरह सजग रहे और देश का आम उपभोक्ता बेफिक्र होकर डिजिटल इंडिया का हिस्सा बना रहे।



