सरसों की खेती बदलेगी, 40 हजार किसानों तक पहुंचेगा ‘सरसों संकल्प’
राजस्थान में सरसों की खेती को ज्यादा टिकाऊ और मौसम के बदलावों के अनुकूल बनाने के लिए पांच वर्षीय ‘सरसों संकल्प’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। बूंदी, टोंक और झालावाड़ से शुरू होने वाली इस पहल का लक्ष्य 2030-31 तक 40 हजार किसानों को जोड़ना है। मिट्टी की सेहत, पानी की बचत, आधुनिक तकनीक और किसानों की आय से जुड़े कृषि परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- सरसों संकल्प: बूंदी, टोंक और झालावाड़ में आधुनिक सरसों खेती को मिलेगा बढ़ावा।
- 40 हजार किसान: 2030-31 तक बड़े स्तर पर किसानों को जोड़ने की योजना।
- सरसों की खेती: मिट्टी, पानी और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर फोकस।
Sarson Sankalp to Reach 40,000 Farmers: राजस्थान में सरसों की खेती को पारंपरिक तरीकों से आगे ले जाने और किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए ‘सरसों संकल्प’ नाम से पांच वर्षीय कार्यक्रम शुरू किया गया है। पहल की शुरुआत बूंदी, टोंक और झालावाड़ जिलों से होगी।

इस कार्यक्रम को सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA), एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड, सॉलिडरीडाड नेटवर्क एशिया लिमिटेड और भारतखंड फाउंडेशन मिलकर संचालित करेंगे। कार्यक्रम के लिए 16 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। संबंधित एमओयू पर मुंबई के द वेस्टिन, पॉवई लेक में SEA की वार्षिक आमसभा और पुरस्कार समारोह के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
पहले चरण में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 15 हजार किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य है। इसके बाद कार्यक्रम का दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा और वित्त वर्ष 2030-31 तक करीब 40 हजार किसानों को इससे जोड़ने की योजना है।
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‘सरसों संकल्प’ में किसानों को केवल कृषि तकनीकों की जानकारी देने के बजाय उन्हें खेत स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके लिए मॉडल और प्रदर्शन फार्म विकसित किए जाएंगे, जहां किसान आधुनिक खेती के तरीकों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकेंगे।
कार्यक्रम के तहत मिट्टी की गुणवत्ता, फसल पोषण, पानी और कृषि इनपुट के बेहतर इस्तेमाल, जलवायु अनुकूल खेती तथा जैव विविधता पर काम किया जाएगा। किसानों को फसल और मिट्टी से जुड़ी सलाह के साथ लगातार तकनीकी मार्गदर्शन देने की व्यवस्था भी रखी गई है।
पहल के परिणामों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कौन-सी कृषि पद्धतियां जमीन पर बेहतर परिणाम दे रही हैं, ताकि सफल तरीकों को ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जा सके।
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कार्यक्रम में एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड सीएसआर के माध्यम से आर्थिक सहयोग देगा। संबंधित कृषि कार्यक्रम के स्तर पर समन्वय और निगरानी में सहायता दी जाएगी। सॉलिडरीडाड नेटवर्क एशिया तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक कृषि पद्धतियों पर मार्गदर्शन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम करेगा। भारतखंड फाउंडेशन जमीनी स्तर पर कार्यक्रम को लागू करने में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड के कार्यकारी उपाध्यक्ष अंशु मलिक ने कहा कि ‘सरसों संकल्प’ किसानों, स्वस्थ मिट्टी और मजबूत कृषि समुदायों में लंबे समय के निवेश की पहल है। उन्होंने कहा कि साझेदारी के जरिए पुनर्योजी खेती के व्यावहारिक तरीकों को लागू करने और उनके प्रभाव को मापने का आधार तैयार होगा।



