रेपो रेट पर बढ़ोतरी के संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति बैठक से पहले एसबीआई की एक रिपोर्ट में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में महंगाई, रुपये की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक जोखिम और बदलती तरलता को प्रमुख वजहों में गिनाया गया है। एमपीसी की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है।
- रेपो रेट: एसबीआई रिपोर्ट में 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान।
- RBI MPC: 5 से 7 अक्टूबर तक होगी मौद्रिक नीति समिति की बैठक।
- महंगाई: अगस्त में CPI बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंचने का रिपोर्ट में जिक्र।
SBI Sees 25 bps Repo Rate Hike: RBI की बैठक से पहले क्या है संकेत? भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली है। इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में रेपो रेट में 25 आधार अंक यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना बन रही है।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव, तरलता की स्थिति और नए वैश्विक जोखिमों के कारण ब्याज दर को लेकर जोखिमों का संतुलन बदल गया है। रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, यह एसबीआई की रिपोर्ट में व्यक्त किया गया अनुमान है। अंतिम फैसला आरबीआई की एमपीसी बैठक में लिया जाएगा।
महंगाई और रुपये पर भी नजर
रिपोर्ट में महंगाई के आंकड़ों को भी दर बढ़ाने की संभावना से जोड़ा गया है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई।
एसबीआई ने रुपये की कमजोरी और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली के कारण पिछले शुक्रवार से करीब 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई। ऐसे माहौल में बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की आरबीआई की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
GDP और महंगाई अनुमान में बदलाव की उम्मीद
एसबीआई रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि के अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के बीच केंद्रीय बैंक को पहले से एहतियाती कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
मानसून और रबी फसल भी चिंता का विषय
एसबीआई ने मानसून की स्थिति को भी एक अहम जोखिम बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला रहा और दीर्घकालिक औसत का करीब 87 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।
रिपोर्ट में मजबूत अल नीनो परिस्थितियों और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका को रबी फसलों के उत्पादन के लिए जोखिम बताया गया है। कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की स्थिति में खाद्य कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
बैंकिंग सिस्टम में तरलता को लेकर क्या कहा?
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल तरलता पर्याप्त होने के बावजूद प्रभावी तरलता का स्तर उतना मजबूत नहीं है। रिपोर्ट में विशेष स्वैप सुविधा के तहत 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह का उल्लेख किया गया है।
इसके साथ ही CRR, SLR और LCR जैसी नियामकीय आवश्यकताओं के कारण बैंकों के लिए अतिरिक्त जमा राशि का इस्तेमाल सीमित रहने की बात कही गई है। एसबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत ऋण वृद्धि को सहारा देने के लिए बैंकों के स्तर पर करीब 8.2 लाख करोड़ रुपये के जमा सृजन का अंतर बना रह सकता है।
कुल मिलाकर, एसबीआई की रिपोर्ट ने ब्याज दर, महंगाई, रुपये, मानसून और वैश्विक आर्थिक जोखिमों को आगामी मौद्रिक नीति के लिए महत्वपूर्ण कारक बताया है। अब नजर 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली MPC बैठक और आरबीआई के आधिकारिक फैसले पर रहेगी।



