मसाला उद्योग में किसानों पर बड़ा फोकस

जयपुर में 5वीं नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2026 शुरू हुई, जहां मसाला उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों को प्रमुख मुद्दा बनाया। सम्मेलन में तकनीक, बेहतर बाजार संपर्क, ट्रेसेबिलिटी और टिकाऊ उत्पादन पर चर्चा हुई। किसान, एफपीओ, निर्यातक, नियामक और उद्योग प्रतिनिधि मसाला क्षेत्र को मजबूत बनाने के उपायों पर मंथन कर रहे हैं।

  • नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2026 में किसानों की आय बढ़ाने पर जोर।
  • मसाला उद्योग में फूड सेफ्टी और ट्रेसेबिलिटी को अहम बताया गया।
  • किसान और FPO को बाजार व तकनीक से बेहतर जोड़ने पर चर्चा।

Spice Conference Puts Farmers and Food Safety in Focus :  राजस्थान के जयपुर स्थित नोवोटेल जयपुर कन्वेंशन सेंटर में 5वीं नेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2026 की शुरुआत हुई। दो दिवसीय सम्मेलन में देश के मसाला क्षेत्र से जुड़े किसान, एफपीओ, उद्योग जगत, नीति निर्माता, नियामक और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं।

मसाला उद्योग में किसानों पर बड़ा फोकस
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

‘किसानों का सशक्तिकरण, उपभोक्ताओं की सुरक्षा’ थीम पर आयोजित सम्मेलन का मकसद खेत से बाजार तक मसालों की पूरी वैल्यू चेन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है। आयोजन की शुरुआत प्रदर्शनी और उद्घाटन सत्र से हुई।

सम्मेलन के शुरुआती सत्र में किसानों की आय और आजीविका को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बेहतर मार्केट लिंकेज, तकनीक तक पहुंच और वैल्यू चेन में किसानों की भागीदारी बढ़ाने को जरूरी बताया गया।

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वर्ल्ड स्पाइस ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन रामकुमार मेनन ने कहा कि मसाला क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के साथ उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने सस्टेनेबिलिटी, जिम्मेदार सोर्सिंग और ट्रेसेबिलिटी को भी अहम बताया।

सम्मेलन में मसालों में पेस्टिसाइड अवशेष, गुणवत्ता मानक और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। विशेषज्ञों ने खेती और प्रोसेसिंग के बेहतर तरीकों, टेस्टिंग क्षमता और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।

स्पाइसेस बोर्ड के सचिव एम.एस. मणिवन्नन ने कहा कि किसानों की आजीविका मजबूत करने के साथ गुणवत्ता, फूड सेफ्टी और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी है। उन्होंने तकनीक और क्षमता निर्माण को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

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कॉन्फ्रेंस में फार्म-लेवल तकनीक, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, एडवांस्ड टेस्टिंग, प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग पर भी चर्चा हुई। इन तकनीकों के जरिए उत्पाद की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने खेती, कटाई के बाद फसल प्रबंधन, बाजार तक पहुंच और बदलती मांग से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी साझा कीं। इससे चर्चा को जमीनी जरूरतों से जोड़ने की कोशिश की गई।

सम्मेलन के दूसरे दिन ऑर्गेनिक खेती और सर्टिफिकेशन से जुड़े बदलते नियम, फूड सेफ्टी और कंज्यूमर प्रोटेक्शन में एफपीओ की भूमिका तथा खरीदारों की जरूरतों पर चर्चा होगी।

कार्यक्रम का समापन बायर-सेलर मीट के साथ होगा। इसके जरिए किसानों और खरीदारों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ाने और नए बाजार अवसर तलाशने पर ध्यान दिया जाएगा।

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