NBFC की अगली उड़ान में टेक्नोलॉजी और भरोसा अहम: RBI

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मु ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ता शहरीकरण और डिजिटलीकरण एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। हालांकि, सेक्टर की रफ्तार तभी टिकाऊ होगी, जब तकनीकी बदलाव के साथ ग्राहक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, बेहतर अंडरराइटिंग और लोगों का भरोसा भी मजबूत बना रहे।

  • NBFC ग्रोथ में टेक्नोलॉजी और भरोसा अहम भूमिका निभाएंगे।
  • RBI ने ग्राहक सुरक्षा और एसेट क्वालिटी से समझौता न करने की चेतावनी दी।
  • टेक्नोलॉजी के साथ साइबर सुरक्षा और जवाबदेही मजबूत करना जरूरी होगा।

Technology and Trust to Drive NBFC Growth: नई दिल्ली। भारत की तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों यानी NBFC और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मु ने कहा कि देश में आर्थिक विकास के साथ शहरीकरण और डिजिटलीकरण बढ़ रहा है, जिससे वित्तीय क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

7वें सीआईआई एनबीएफसी और एचएफसी समिट को संबोधित करते हुए मुर्मु ने कहा कि सेक्टर की अगली पीढ़ी की ग्रोथ में दो चीजें सबसे अहम रहेंगी—टेक्नोलॉजी और भरोसा। उनके मुताबिक, भारत को विकसित, समावेशी और तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मजबूत और विविध क्रेडिट सिस्टम की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि एनबीएफसी सेक्टर के विस्तार में वित्तीय समावेशन, अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता और प्रोडक्ट डिजाइन एवं डिलीवरी में इनोवेशन अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन कंपनियों की पहुंच उन ग्राहकों तक भी बढ़ सकती है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से आसानी से वित्तीय सेवाएं नहीं मिल पातीं।

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आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने सेक्टर के बढ़ते क्रेडिट का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, एनबीएफसी क्रेडिट अब नॉमिनल जीडीपी के करीब 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह 15.9 प्रतिशत था। वहीं, शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की ओर से दिए जाने वाले कुल क्रेडिट में एनबीएफसी की हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले साल 26 प्रतिशत थी।

हालांकि, मुर्मु ने तेज ग्रोथ के बीच वित्तीय संस्थानों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कारोबार बढ़ाने के लिए अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड, एसेट क्वालिटी और ग्राहक सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

जैसे-जैसे एनबीएफसी का आकार बढ़ रहा है और उनका कारोबार अधिक जटिल हो रहा है, वैसे-वैसे संस्थानों की बुनियादी व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है। मुर्मु ने कहा कि केवल तेजी से विस्तार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कंपनियों को जोखिम प्रबंधन और संस्थागत क्षमता पर भी लगातार काम करना होगा।

डिजिटलाइजेशन को लेकर उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बेहतर फैसले लेने में मदद के लिए होना चाहिए, लेकिन इससे संस्थागत जवाबदेही कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। डिजिटल सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

मुर्मु ने साइबर सुरक्षा और कारोबार की निरंतरता को भी महत्वपूर्ण बताया। वित्तीय कंपनियों के डिजिटल विस्तार के साथ साइबर खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत करना जरूरी है, ताकि किसी व्यवधान की स्थिति में ग्राहकों को सेवाएं प्रभावित न हों और सिस्टम पर भरोसा कायम रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि टिकाऊ कारोबार की बुनियाद ग्राहक विश्वास पर टिकी होती है। इनोवेशन और नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की होड़ में कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर का संदेश साफ है कि NBFC सेक्टर की अगली ग्रोथ सिर्फ तकनीकी बदलाव से नहीं आएगी। तकनीक के साथ जिम्मेदार लोनिंग, मजबूत जोखिम प्रबंधन, ग्राहक सुरक्षा और भरोसे को बराबर महत्व देना होगा। यही संतुलन सेक्टर की लंबी अवधि की मजबूती तय करेगा।

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