वामिका गब्बी बनीं जल बाथ फिटिंग्स की नई ब्रांड एंबेसडर
प्रीमियम बाथ फिटिंग्स और सैनेटरीवेयर ब्रांड जल बाथ फिटिंग्स ने अभिनेत्री वामिका गब्बी को अपना आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर बनाया है। कंपनी ने नई डिजिटल ब्रांड फिल्म भी जारी की है। इस साझेदारी के जरिए जल की नजर डिजाइन पसंद करने वाले युवा भारतीय ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने और प्रीमियम बाथरूम स्पेस को लेकर बदलती उपभोक्ता सोच को सामने लाने पर है।
- वामिका गब्बी: अभिनेत्री को जल बाथ फिटिंग्स ने अपना नया ब्रांड एंबेसडर चुना।
- जल बाथ फिटिंग्स: कंपनी ने नई डिजिटल ब्रांड फिल्म भी लॉन्च की।
- बाथ फिटिंग्स: ब्रांड ने डिजाइन, गुणवत्ता और वैल्यू को अपनी नई कैंपेन की थीम बनाया।
Vamika Gabbi Joins Jal Bath Fittings : जल बाथ फिटिंग्स का कहना है कि आज के ग्राहक घर के हर हिस्से को सिर्फ जरूरत के हिसाब से नहीं देखते। खासकर बाथरूम अब घर की डिजाइन और व्यक्तिगत पसंद का हिस्सा बनता जा रहा है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने वामिका गब्बी के साथ यह साझेदारी की है।

कंपनी के मुताबिक, नई पीढ़ी के उपभोक्ता ऐसे प्रोडक्ट चाहते हैं जिनमें अच्छा डिजाइन और भरोसेमंद गुणवत्ता होने के साथ कीमत के लिहाज से भी उचित वैल्यू मिले। ब्रांड की नई डिजिटल फिल्म इसी सोच को कहानी के जरिए सामने लाती है।
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जल बाथ फिटिंग्स के डायरेक्टर मार्केटिंग सिद्धांत कपूर ने कहा कि वामिका गब्बी ब्रांड की सोच से मेल खाती हैं। उनके मुताबिक, गुणवत्ता, खूबसूरती और आत्मविश्वास जैसे पहलुओं को अभिनेत्री स्वाभाविक तरीके से दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी इस साझेदारी को सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसके जरिए आधुनिक जीवनशैली और डिजाइन को लेकर बदलती पसंद से जुड़ना चाहती है।
वहीं, जल बाथ फिटिंग्स के डायरेक्टर विवेक कपूर ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य केवल कारोबार का विस्तार करना नहीं है। ब्रांड भारतीय घरों में प्रीमियम बाथरूम डिजाइन को लेकर लोगों की सोच में बदलाव लाने की दिशा में भी काम करना चाहता है। उनके अनुसार, वामिका इस संदेश को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए उपयुक्त चेहरा हैं।
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नई डिजिटल ब्रांड फिल्म में राहुल और प्रिया नाम के एक शहरी कामकाजी दंपती की रोजमर्रा की जिंदगी दिखाई गई है। दोनों की खरीदारी को लेकर सोच अलग है। प्रिया को किसी प्रोडक्ट का लुक और अनुभव ज्यादा आकर्षित करता है, जबकि राहुल कीमत और उपयोगिता के बीच बेहतर संतुलन तलाशते हैं।
फिल्म में इसी अंतर को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। कभी कॉफी पर जरूरत से ज्यादा खर्च हो जाता है, कभी आरामदायक समझकर खरीदा गया सोफा उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और कभी स्टोर में पसंद आया स्पीकर घर पहुंचने के बाद निराश करता है।



