भारत-चीन बॉर्डर पर शहीद हुए कमांडो नाइमा तेनजिंग का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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29-30 अगस्त की रात लद्दाख में चीन की घुसपैठ की कोशिश भारतीय जवानों ने नाकाम कर दी थी

लेह। भारत-चीन बॉर्डर पर शहीद हुए स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो नाइमा तेनजिंग (51) का आज लेह में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान लोगों ने तिरंगा थामकर भारत माता के जयकारे लगाए। अगस्त के आखिरी हफ्ते में लद्दाख में चीन की घुसपैठ की कोशिश के दौरान हुए माइन ब्लास्ट में तेनजिंग शहीद हुए थे।

नाइमा की श्रद्धांजलि देने भाजपा के महासचिव राम माधव भी पहुंचे। नाइमा जिस स्पेशल फोर्स में तैनात थे, उसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। इस फोर्स के जवानों की शहीद होने पर आमतौर खबरें सामने नहीं आतीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

तिब्बतियों की विकास रेजीमेंट में थे तेजजिंग

तेनजिंग चुशूल के ब्लैक टॉप पर चीन के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए थे। 29-30 अगस्त की रात भारतीय जवानों ने लद्दाख के पैंगॉन्ग इलाके में चीन की घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी थी। ऑपरेशन में तिब्बती जवानों की विकास रेजीमेंट भी शामिल थी। इस रेजीमेंट में तिब्बत के निर्वासित लोगों और गुरिल्ला युद्ध में महारत रखने वाले सैनिकों को तरजीह दी जाती है।

सरकार ने नहीं दी थी नाइमा की शहादत की सूचना

तेनजिंग स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) में कंपनी लीडर थे। वे 33 साल से र्फो में थे। इस फोर्स का गठन 1962 में भारत-चीन युद्ध के वक्त हुआ था। तेनजिंग की शहादत को लेकर केंद्र सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की थी। रक्षा मंत्रालय ने 29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों की तरफ से हुई घुसपैठ और भारतीय जवानों द्वारा उन्हें खदेडऩे को लेकर बयान जारी किया था। तिब्बती संसद की निर्वासित सदस्य नामग्याल डोलकर लघियारी ने एएफपी न्यूज एजेंसी को बताया कि संघर्ष के दौरान तिब्बती मूल का सैनिक शहीद हो गया। नाइमा के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।