मुफ्त सुविधाओं के मामले में डीएमके और आप भी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

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Supreme Court
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नई दिल्ली। कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी और तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट में मुफ्त सुविधाओं के खिलाफ दायर याचिका में पक्षकार बनाने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है। डीएमके ने कहा है कि कल्याणकारी योजनाएं सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करती हैं और उन्हें मुफ्त की सुविधाएं नहीं कहा जा सकता है। इस मामले पर कल यानी 17 अगस्त को सुनवाई होगी।

याचिका में डीएमके ने कहा है कि मुफ्त बिजली देने के कई प्रभाव होते हैं। बिजली से रोशनी, गर्मी और शीतलता प्रदान की जा सकती है, जो एक बेहतर जीवन स्तर में तब्दील होता है। इससे एक बच्चे को अपनी पढ़ाई में मदद मिलती है। इसे मुफ्त की सुविधाएं कहकर इसके कल्याणकारी प्रभाव को खारिज नहीं किया जा सकता है। डीएमके ने अपनी याचिका में कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में केवल केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को ही पक्षकार बनाया है, जबकि इसमें राज्य सरकारों की नीति की भी समीक्षा होनी है। कोर्ट को सभी पक्षकारों का पक्ष सुनना चाहिए।

डीएमके ने कहा है कि केंद्र सरकार की टैक्स हॉलिडे और लोन माफ करने की योजनाओं पर भी कोर्ट को विचार करना चाहिए। केंद्र सरकार विदेशी कंपनियों को टैक्स हॉलिडे देती हैं और प्रभावशाली उद्योगपतियों का लोन माफ करती है। यहां तक कि उद्योगपतियों को प्रमुख ठेके दिए जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर

इस मामले में आज ही आम आदमी पार्टी ने मुफ्त सुविधाओं के बचाव में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि चुनावी भाषणों पर किसी तरह का प्रतिबंध संविधान से मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन होगा। नेताओं का अपने मंच से कोई वादा करना और चुनी हुई सरकार का उस पर अमल अलग-अलग बातें हैं। इस मामले पर कल यानी 17 अगस्त को सुनवाई होने वाली है।

इस मामले में आम आदमी पार्टी का कहना है कि चुनावी भाषणों पर लगाम के जरिये आर्थिक घाटे को पाटने की कोशिश एक निरर्थक कवायद ही साबित होगी। 11 अगस्त को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को इस बात के लिए फटकार लगाई थी कि अखबारों में उनका हलफनामा छप गया लेकिन कल दस बजे रात तक सुप्रीम कोर्ट को नहीं मिला। जब ये अखबार में पहुंच सकता है तो कोर्ट क्यों नहीं आ सकता है।

कोर्ट ने सभी पक्षों से अपने सुझाव देने को कहा था। सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने विशेषज्ञ कमेटी के गठन को गैरजरूरी बताया था। आम आदमी पार्टी ने मामले में खुद को भी पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने मुफ्त सुविधाओं , इस तरह की घोषणाओं को राजनीतिक पार्टियों का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार बताया। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय को भाजपा का सदस्य बताते हुए उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।

उल्लेखनीय है कि 6 अगस्त को अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो रिजर्व बैंक, नीति आयोग समेत अन्य संस्थानों और विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ लेकर विचार करके सरकार एक रिपोर्ट तैयार करे और कोर्ट के समक्ष रखे। अश्विनी उपाध्याय ने चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त में उपहार देने वाली घोषणाएं करने वाले राजनीतिक दलों की मान्यता खत्म करने की मांग की है ।