ओडिशा पर्यटन का नया दौर: आधुनिकीकरण और डिजिटल ब्रांडिंग से बदलती तस्वीर

ओडिशा पर्यटन विभाग और OTDC के स्तर पर पर्यटन संपत्तियों के आधुनिकीकरण से लेकर नए पर्यटन सर्किट, डिजिटल ब्रांडिंग, आध्यात्मिक पर्यटन, निवेश और युवाओं के कौशल विकास तक कई क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य राज्य की विविध पर्यटन क्षमता को देश और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंचाना और पर्यटन से जुड़े स्थानीय अवसरों को बढ़ाना है।

  • विरासत और पर्यटन: पुरी, कोणार्क, भुवनेश्वर और बौद्ध स्थलों को नए पर्यटन सर्किट से जोड़ने पर जोर।
  • डिजिटल ब्रांडिंग: सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट के जरिए ओडिशा पर्यटन को देश-दुनिया तक पहुंचाने की पहल।
  • विकास और निवेश: पर्यटन संपत्तियों के आधुनिकीकरण, निजी निवेश और युवाओं के कौशल विकास पर फोकस।

(दीपक मेहता)

A New Era for Odisha Tourism: ओडिशा की पहचान लंबे समय से मंदिरों, समुद्र तटों, जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव और समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी रही है। अब राज्य के पर्यटन क्षेत्र को इन अलग-अलग खूबियों के साथ एक व्यापक पर्यटन अनुभव के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस दिशा में ओडिशा पर्यटन विभाग के निदेशक और ओडिशा पर्यटन विकास निगम (OTDC) के प्रबंध निदेशक दीपांकर महापात्रा के स्तर पर कई पहलें आगे बढ़ाई जा रही हैं। इनका फोकस केवल नए पर्यटकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी है।

पर्यटन संपत्तियों को आधुनिक बनाने पर जोर

विकास और विरासत का अद्भुत मॉडल है ओड़िशा
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

राज्य में OTDC और ओडिशा पर्यटन की विभिन्न संपत्तियों को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। होटल, पैंथनिवास और पर्यटक परिसरों जैसी सुविधाओं के आधुनिकीकरण का उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और बेहतर ठहरने का अनुभव देना है।

इसके साथ ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने पर भी ध्यान है। विरासत, वन्यजीव, ईको-टूरिज्म, बौद्ध और तटीय पर्यटन जैसे क्षेत्रों को अलग-अलग थीम के साथ विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से ओडिशा की ब्रांडिंग

विकास और विरासत का अद्भुत मॉडल है ओड़िशा
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

आज पर्यटन की तस्वीर सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट के बिना पूरी नहीं होती। ओडिशा के पर्यटन स्थलों, कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल और ऑडियो-विजुअल अभियानों पर जोर दिया जा रहा है।

YouTube और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को नए अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। इसका मकसद ओडिशा की पर्यटन पहचान को पारंपरिक प्रचार से आगे ले जाकर डिजिटल दर्शकों तक पहुंचाना है।

राज्य से बाहर भी पहुंच रहा ओडिशा का पर्यटन संदेश

ओडिशा पर्यटन का नया दौर: आधुनिकीकरण और डिजिटल ब्रांडिंग से बदलती तस्वीर
Image Source : Via Dainik Jaltedeep

ओडिशा की पर्यटन संभावनाओं को दूसरे राज्यों के लोगों तक पहुंचाने के लिए रोड शो और ‘ओडिशा परब’ जैसे आयोजनों का सहारा लिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य बड़े राज्यों में होने वाले ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटन के साथ-साथ निवेश की संभावनाओं को भी सामने रखने की कोशिश की जा रही है।

इस तरह के आयोजनों में ओडिशा की संस्कृति, खान-पान, कला और पर्यटन स्थलों को एक साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इससे राज्य की अलग-अलग पर्यटन खूबियों को एक व्यापक ब्रांड के रूप में पेश किया जा सकता है।

पुरी के जरिए आध्यात्मिक पर्यटन पर फोकस

ओडिशा में आध्यात्मिक पर्यटन की संभावनाएं काफी व्यापक हैं और इसका सबसे बड़ा केंद्र पुरी है। भगवान जगन्नाथ की नगरी देश-विदेश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

इसी क्षेत्र को व्यापक आध्यात्मिक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में पुरी में ‘4th Global Spiritual Tourism Conclave’ आयोजित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन ओडिशा की आध्यात्मिक विरासत को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जोड़ने का मंच दे सकते हैं।

उद्योग जगत के साथ साझेदारी

पर्यटन क्षेत्र में सरकारी प्रयासों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। PHDCCI जैसे उद्योग संगठनों के साथ सहयोग के जरिए पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में नीतियों, निवेश और नए कार्यक्रमों की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी एजेंसियों और निजी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर है। इससे होटल, हॉस्पिटैलिटी, मनोरंजन और अन्य पर्यटन सेवाओं में नए अवसर विकसित होने की संभावना है।

युवाओं के लिए पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर

पर्यटन का विस्तार तभी व्यापक असर पैदा करता है, जब स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिले। इसी सोच के तहत युवाओं के कौशल विकास और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

पाक कला और शेफ प्रतियोगिताओं, जिनमें ‘आंच – नेशनल यंग शेफ कॉम्पिटिशन’ जैसी पहल शामिल हैं, के जरिए युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से जुड़ने का मंच देने की कोशिश की जा रही है।

ओडिशा को मल्टी-डेस्टिनेशन टूरिज्म हब बनाने की कोशिश

ओडिशा की पर्यटन क्षमता केवल पुरी या कोणार्क तक सीमित नहीं है। यहां धार्मिक पर्यटन के लिए पुरी, ऐतिहासिक और स्थापत्य पर्यटन के लिए कोणार्क व भुवनेश्वर, बौद्ध पर्यटन के लिए रत्नागिरी-उदयगिरि-ललितगिरि, प्रकृति के लिए चिलिका, वन्यजीवों के लिए भीतरकणिका और सिमिलिपाल तथा तटीय पर्यटन के लिए कई समुद्र तट मौजूद हैं।

इन सभी अनुभवों को अलग-अलग पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने से पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ाने और राज्य के कम चर्चित पर्यटन क्षेत्रों को भी मुख्यधारा में लाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल ओडिशा पर्यटन की दिशा में इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्रांडिंग, आध्यात्मिक पर्यटन, निवेश और कौशल विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश दिखाई देती है। आने वाले समय में इन पहलों का असर पर्यटन सुविधाओं, पर्यटकों की संख्या और स्थानीय स्तर पर बनने वाले रोजगार के अवसरों के रूप में देखने को मिल सकता है।

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