केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश: उच्च शिक्षा, अनुसंधान और जनजातीय कल्याण का उभरता केंद्र
आंध्र प्रदेश के विजयनगरम स्थित केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा, शोध और जनजातीय कल्याण को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश जारी है। राजस्थान के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक विस्तार, शोध परियोजनाओं, गांव गोद लेने, जनजातीय स्वास्थ्य और स्थायी परिसर के निर्माण से जुड़ी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी।
राजस्थान से आए पत्रकारों के अध्ययन दल के समक्ष विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रस्तुत की अपनी उपलब्धियां व भावी योजनाएं
विनोद शर्मा
विजयनगरम (आंध्र प्रदेश)। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के आउटरीच कार्यक्रम के तहत आंध्र प्रदेश के दौरे पर आए राजस्थान के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने विजयनगरम जिले में स्थित केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का दौरा किया और बैठक की।

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. टी. श्रीनिवासन (प्रोफेसर ऑफ बॉटनी) तथा कुलसचिव (प्रभारी) प्रो. जितेंद्र मोहन मिश्रा और अन्य अधिकारियों ने बैठक में संस्थान की स्थापना और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संसद के अधिनियम 2019 के तहत स्थापित इस विश्वविद्यालय की नींव 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत रखी गई थी। संस्थान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना और अनुसंधान के माध्यम से उनके कल्याण के लिए कार्य करना है।
केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश (CTUAP) ने क्षेत्र में उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनजातीय समुदायों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
बैठक के प्रमुख बिंदू :

• शैक्षणिक संरचना व एनईपी 2020 का समावेश: विश्वविद्यालय में वर्तमान में 3 प्रमुख स्कूल (साइंस, ह्यूमैनिटीज व सोशल साइंस, और मैनेजमेंट) तथा 13 शिक्षण विभाग संचालित हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 6 स्नातक (UG), 8 स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी पाठ्यक्रम पेश किए जा रहे हैं।
• विद्यार्थी क्षमता: वर्तमान में विश्वविद्यालय में 638 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें 48% छात्राएं शामिल हैं। यहाँ देश के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
• 5.6 करोड़ रुपये की शोध परियोजनाएं: विश्वविद्यालय में 5.59 करोड़ रुपये से अधिक की 4 प्रमुख शोध परियोजनाएं चल रही हैं। संस्थान द्वारा 100 शोध पत्र, 29 पुस्तकें/अध्याय और 23 पेटेंट दर्ज कराए गए हैं।
• फोर्टिफाइड राइस खेती की पहल: ट्राइबल सब-प्लान के तहत जेग्गुदोरावलसा जनजातीय गांव के 63 किसानों को जिंक-फोर्टिफाइड (DRR Dhan 48) कम ग्लाइसेमिक राइस उगाने के लिए प्रशिक्षित व सहायता प्रदान की गई है।
• सिकल सेल एनीमिया पर शोध व स्वास्थ्य मिशन: एएसआर जिले में 92% जनजातीय आबादी के बीच सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए विशेष स्वास्थ्य परियोजना संचालित की जा रही है।
• एसटीआई हब प्रोजेक्ट: पार्वतीपुरम मन्यम जिले में फिंगर मिलेट (रागी) की जैविक खेती और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 3-वर्षीय परियोजना जारी है।
• अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा: विजयनगरम के कोंडाकाराकम में ट्रांजिट कैंपस के अलावा, चेन्नामेडपल्ली व मरिवालसा में 561.88 एकड़ भूमि पर मुख्य परिसर का निर्माण तेजी से चल रहा है।
• शुरुआत ट्रांजिट कैंपस से : स्थायी परिसर तैयार होने तक विश्वविद्यालय कोंडाकरकम गांव, विजयनगरम स्थित ट्रांजिट कैंपस से संचालित होता रहा। आरंभिक वर्षों में सीमित बुनियादी ढांचे के बावजूद विश्वविद्यालय ने क्रमश: स्नातक, स्नातकोत्तर, एकीकृत तथा शोध कार्यक्रम शुरू किए। 2019-20 से विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्टों में इसकी अकादमिक एवं प्रशासनिक प्रगति दर्ज होती रही है।
संस्कृति संरक्षण एवं गांव गोद लेने की पहल

विश्वविद्यालय ने कोंडाकाराकम और एस. बूर्जुवलसा नामक दो जनजातीय बहुल गांवों को गोद लिया है, जहां स्वच्छता, सरकारी योजनाओं की जागरूकता और सामुदायिक विकास के कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा जनजातीय युवाओं के लिए ‘ट्राइबल स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ और कला संरक्षण के लिए ‘आदि चित्तारा’ जैसी विशेष पहल भी की गई है।
स्थायी परिसर जून 2027 में निर्माण अपेक्षित
कुंतिनवलसा और चिनामेडापल्ली क्षेत्र में स्थायी परिसर निर्माणाधीन है। 2023 में केंद्र और राज्य स्तर पर परिसर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठे। उस समय विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए केंद्र ने लगभग 834 करोड़ रूपए की मंजूरी दी थी, जिसमें प्रथम चरण के लिए करीब 420 करोड़ रूपए शामिल थे। प्रस्तावित परिसर में कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, छात्रावास, आवासीय भवन, सामुदायिक सुविधाओं और विभिन्न अकादमिक विभागों का प्रावधान किया गया ।
अकादमिक विस्तार
शुरुआत में सीमित कार्यक्रमों से आगे बढ़ते हुए विश्वविद्यालय ने अब विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, पत्रकारिता, पर्यटन और जनजातीय अध्ययन सहित अनेक क्षेत्रों में पाठ्यक्रम विकसित किए हैं।
विश्वविद्यालय की वर्तमान सूची में प्रमुख कार्यक्रम
बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बीएससी केमिस्ट्री, बीएससी बॉटनी, बीएससी जियोलॉजी, बीबीए टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट, एमएससी केमिस्ट्री, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमए अंग्रेजी, एमए समाजशास्त्र, एमए ट्राइबल स्टडीज, एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, एमबीए, मास्टर ऑफ सोशल वर्क, एकीकृत बीएससी-एमएससी कार्यक्रम, एकीकृत बीबीए-एमबीए कार्यक्रम और पीएचडी कार्यक्रम।
2026-27 में विश्वविद्यालय ने बीएससी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी और बीबीए टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट जैसे स्नातक कार्यक्रमों में सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश जारी रखा।
शोध को जनजातीय जीवन से जोड़ने पर जोर

विश्वविद्यालय की विशेषता इसका जनजातीय अध्ययन को आधुनिक विज्ञान और स्थानीय विकास से जोड़ने का प्रयास है। विश्वविद्यालय के अनुसार उसके शोध प्रस्तावों में सेमीकंडक्टर, सिकिल सेल बीमारी, स्वदेशी चिकित्सा और मिलेट खेती जैसे विषय शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने बताया कि उसने विभिन्न शोध परियोजनाओं के लिए 65 करोड़ रूपए से अधिक के प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं।
लैब टू लैंड और लैंड टू लैब की सोच
विश्वविद्यालय ने अपने विकास मॉडल में “2026 में लैब टू लैंड और लैंड टू लैब की सोच की अवधारणा को प्रमुखता दी है। इसका अर्थ प्रयोगशाला में विकसित ज्ञान को ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाना और दूसरी ओर जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संसाधनों तथा समस्याओं को शोध का विषय बनाकर प्रयोगशाला तक लाना है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार ट्राइबल स्किल डेवलपमेंट सेंटर वर्ष 2022 से संचालित है तथा कोंडाकरकम और एस. बुर्जवलसा गांवों को सामुदायिक विकास गतिविधियों के लिए अपनाया गया है।
आधुनिक सुविधाओं की ओर विस्तार :

विश्वविद्यालय के 2026 के प्रॉस्पेक्टस में उपलब्ध सुविधाओं में स्मार्ट क्लासरूम, वाई-फाई कैंपस, पोर्टेबल साइंस लैबोरेटरीज, एडवांस्ड कंप्यूटर लैब, जियोलॉजी म्यूजियम, टेलीविजन स्टूडियो, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, केंद्रीय पुस्तकालय, परिवहन तथा प्लेसमेंट एवं ट्रेनिंग सेल शामिल हैं।
सात वर्ष में पहला बड़ा पड़ाव- पहला दीक्षांत समारोह :

विश्वविद्यालय की विकास यात्रा में 30 जून 2026 को महत्वपूर्ण पड़ाव आया, जब इसका पहला दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विशाखापट्टनम के वी कन्वेंशन सेंटर, नोवोटेल में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी समारोह में उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दीक्षांत समारोह में जनजातीय समुदायों की आजीविका से जुड़े क्षेत्रों वनोपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधे, ईको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रथम दीक्षांत समारोह में भी विश्वविद्यालय से जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ उनकी संस्कृति और स्थानीय ज्ञान से जोड़े रखने तथा शिक्षा को आजीविका एवं क्षेत्रीय विकास से जोड़ने की अपेक्षा व्यक्त की।
यह समारोह इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि सात वर्ष की यात्रा के बाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पहली बार औपचारिक रूप से डिग्री और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय के अनुसार प्रथम दीक्षांत समारोह तक इसकी अकादमिक गतिविधियां 13 विभागों और विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर, एकीकृत एवं शोध कार्यक्रमों तक पहुंच चुकी थीं।



