विशाखापटनम एचपीसीएल रिफाइनरी: हरित ऊर्जा और क्षमता विस्तार के साथ नए भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को दे रही गति
विशाखापट्टनम स्थित एचपीसीएल की विशाख रिफाइनरी क्षमता विस्तार, आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा पहलों के जरिए देश की ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका निभा रही है। रिफाइनरी ने 15 एमएमटीपीए क्षमता हासिल करने के साथ रिकॉर्ड कच्चा तेल प्रसंस्करण दर्ज किया है। ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, उन्नत अवशेष प्रसंस्करण और पर्यावरण संरक्षण पर भी यहां खास जोर दिया जा रहा है।
दैनिक जलतेदीप/ विनोद शर्मा
विशाखापटनम । हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाखापटनम (विसाख) रिफाइनरी ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक यात्रा और आधुनिक तकनीकी प्रगति से एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। 1955 में निर्माण शुरू होने और 1957 में 0.675 MMTPA की क्षमता के साथ स्थापित हुई यह रिफाइनरी आज देश की प्रमुख महारत्न कंपनियों में से एक है। 1970 के दशक में राष्ट्रीयकरण और 1974 में एचपीसीएल के गठन के बाद, रिफाइनरी का निरंतर विस्तार किया गया। हाल ही में वीआरएमपी परियोजना के तहत इसकी शोधन क्षमता को 8.33 MMTPA से बढ़ाकर 13.7 MMTPA और फिर 15 MMTPA तक पहुंचाया गया है।
पीआईबी के आउटरीच कार्यक्रम के तहत आंध्र प्रदेश दौरे पर आए राजस्थान के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के उच्चाधिकारियों से मुलाकात की। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को विशाख रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता, आधुनिकीकरण एवं विस्तार परियोजनाओं के साथ ऊर्जा क्षेत्र में इसकी भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एचपीसीएल ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, सामाजिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान दे रहा है।
परिचालन उत्कृष्टता का नया कीर्तिमान : वित्त वर्ष 2025-26 में विशाख रिफाइनरी ने 16.04 मिलियन मीट्रिक टन का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कच्चा तेल प्रसंस्करण दर्ज किया। यह रिफाइनरी की बढ़ी हुई प्रसंस्करण क्षमता और परिचालन दक्षता को दर्शाता है। रिफाइनरी में मोटर स्पिरिट, हाई स्पीड डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, एलपीजी, सुपीरियर केरोसिन ऑयल, लाइट डीजल ऑयल, बिटुमेन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। ये उत्पाद देशभर में उपभोक्ताओं और विभिन्न उद्योगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान देते हैं।
प्रमुख तकनीकी और पर्यावरण-अनुकूल उपलब्धियां :

पर्यावरण संरक्षण: रिफाइनरी बीएस-6 (BS-VI) मानक वाले ईंधनों का उत्पादन कर रही है और पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन कर रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन पहल: एचपीसीएल देश की पहली ऐसी तेल कंपनी बन गई है जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 370 टन प्रति वर्ष क्षमता का इलेक्ट्रोलाइज़र सिस्टम स्थापित कर रही है।
ऊर्जा दक्षता: रिफाइनरी में 1.1 मेगावाट का रूफटॉप सोलर प्लांट, भारत की सबसे बड़ी VGO हाइड्रोक्रैकर यूनिट और आधुनिक क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट शामिल हैं।
तकनीकी नवाचार: भारत में पहली बार बॉटम अपग्रेडेशन तकनीक अपनाई गई है, जो 93 प्रतिशत भारी फीडस्टॉक को हल्के और उपयोगी उत्पादों में बदल देती है।
भविष्य की रणनीतियों के तहत एचपीसीएल विसाख रिफाइनरी की क्षमता को और बढ़ाते हुए 21.3 MMTPA तक ले जाने की दिशा में अग्रसर है। नई सोच और ऊर्जा के साथ यह रिफाइनरी देश को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी अहम योगदान दे रही है।
आधुनिकीकरण के साथ नई क्षमता : विशाख रिफाइनरी मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत रिफाइनरी का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कच्चे तेल प्रसंस्करण क्षमता 8.3 MMTPA से बढ़कर 15 MMTPA हो गई। इस परियोजना ने विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल के प्रसंस्करण तथा उच्च मूल्य वाले पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन की रिफाइनरी की क्षमता को भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है।
देशभर में रिफाइनिंग क्षमता और एचपीसीएल का स्थान :

एचपीसीएल की कुल क्षमता (विशाखापट्टनम, मुंबई और संयुक्त उद्यमों सहित) लगभग 44 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) तक पहुंच चुकी है।
विशाखा रिफाइनरी की यात्रा: 1957 में कैल्टेक्स के रूप में 0.675 MMTPA क्षमता के साथ शुरू हुई यह रिफाइनरी 1976 में राष्ट्रीयकृत हुई और 1978 में HPCL में एकीकृत की गई।
विस्तार चरण: 1985 में VR EAP-1 के तहत क्षमता 4.5 MMTPA और 1999 में VREP-2 के तहत बढ़कर 7.5 MMTPA की गई।
आधुनिक सुधार: BS-IV और BS-VI पर्यावरण मानकों को पूरा करने के लिए क्रमशः MS ब्लॉक और DHT ब्लॉक चालू किए गए।
वीआरएमपी परियोजना: हाल ही में 2023 में विशाखा रिफाइनरी मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट (वीआरएमपी) के तहत ऊर्जा-कुशल CDU-4 और FCHCU चालू करके रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाकर 15 MMTPA की गई है। इसके अलावा, 2025 में रेसिड्यू अपग्रेडेशन सुविधा को भी चालू किया गया, जिससे भारी अवशेषों को 93 प्रतिशत तक उच्च मूल्य वाले डीजल व पेट्रोल में बदला जा सकता है।
कच्चे तेल का प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स :
तटीय रिफाइनरी होने के नाते विशाखा रिफाइनरी को समुद्री मार्ग से कच्चा तेल (क्रूड ऑइल) प्राप्त करने में बड़ा लाभ मिलता है।
अनलोडिंग सुविधाएं: रिफाइनरी के पास दो प्रमुख सुविधाएं हैं ऑफशोर टैंकर टर्मिनल जो ब्रेकवाटर के भीतर स्थित है और सिंगल पॉइंट मूअरिंग जो गहरे समुद्र में स्थित है। एसपीएम का उपयोग करके 2,50,000 से 3,00,000 डीएमटी क्षमता वाले बड़े जहाजों से महज 2 दिनों में क्रूड अनलोड किया जा सकता है।
अंडरग्राउंड क्रूड कैवर्न (रणनीतिक भंडारण)
विशाखापट्टनम में पहाड़ी के नीचे प्राकृतिक टनल बनाकर रणनीतिक क्रूड स्टोरेज तैयार किया गया है। यह भारत के चुनिंदा स्टोरेज स्थलों में से एक है (अन्य पादुर और मैंगलोर में हैं), यह प्राकृतिक संरचना में कच्चा तेल सुरक्षित रखने का बेहद कम लागत वाला और सुरक्षित जरिया है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट या युद्ध जैसी स्थिति में देश की सैन्य और नागरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार इस प्रकार के क्रूड बैंकों में आपातकालीन स्टॉक रखती है।
तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण

विशाखा रिफाइनरी ने पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन और एडवांस कंट्रोल सिस्टम्स को अपनाने में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं :
फ्लू गैस स्क्रबर: उत्सर्जन और पार्टिकुलेट मैटर को नियंत्रित करने के लिए फ्लू गैस स्क्रबिंग तकनीक अपनाने वाली यह पहली रिफाइनरी बनी।
समुद्री ईंधन : जहाजों के लिए अत्यंत कम सल्फर वाला (0.5% से कम सल्फर) लो सल्फर फ्यूल ऑइल तैयार करने वाली पहली सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी बनी।
फ्लुइडाइज्ड कैटेलिटिक क्रैकिंग : भारी क्रूड से अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल निकालने के लिए इस प्रक्रिया का प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे क्रूड आयात पर निर्भरता कम होती है।
कूलिंग के लिए समुद्री जल का उपयोग: रिफाइनरी प्रक्रिया में हीटिंग और कूलिंग चक्रों के लिए समुद्री जल का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाता है।
एचपीसीएल अपनी व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क और विशाखा रिफाइनरी के आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से देश के अंदरूनी हिस्सों तक पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है।
इथेनॉल सम्मिश्रण से इंजन दक्षता पर कोई बड़ा असर नहीं, क्रूड आयात घटाना मुख्य लक्ष्य :
पेट्रोल में इथेनॉल सम्मिश्रण से वाहनों के इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए तेल कंपनी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इससे सामान्य वाहनों के प्रदर्शन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के कच्चे तेल के आयात बिल में कटौती करना और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब इथेनॉल सम्मिश्रण और यूरिया के इस्तेमाल से इंजन की ताकत घटने और जीवनकाल कम होने के दावों पर सवाल पूछा गया, तो अधिकारियों ने बताया कि यूरिया का उपयोग इंजन के ‘डाउनस्ट्रीम’ (उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली) में होता है, जिससे इंजन के खराब होने या प्रदर्शन पर असर पड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इथेनॉल के संदर्भ में उन्होंने बताया कि इससे पावर में बहुत मामूली कमी आती है, लेकिन यह इतनी कम होती है कि सामान्य दैनिक ड्राइविंग में इसका पता नहीं चलता। केवल रेसिंग जैसे विशेष मामलों में ही इसका असर देखा जा सकता है।
रिफाइनरी तकनीक में भारत का बड़ा कदम
विशाखापट्टनम (वाइज़ाग) स्थित रिफाइनरी के विस्तार और नई तकनीकों का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने बताया कि भारत में पहली बार ‘रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी’ जैसी उन्नत तकनीक लागू की गई है। पुरानी रिफाइनरी तकनीकें जहां केवल 70 प्रतिशत तक अवशेषों को परिवर्तित कर पाती थीं, वहीं यह नई तकनीक 93 प्रतिशत तक रूपांतरण सुनिश्चित करती है। शेष 7 प्रतिशत बचे हिस्से को पेटकॉक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो कोयले की तुलना में अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।
हर तरह के क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम
वेनेजुएला जैसे देशों से आने वाले भारी तेल को रिफाइन करने के सवाल पर बताया गया कि भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई है। वर्तमान में भारतीय रिफाइनरियों की ‘क्रूड बास्केट’ में दुनिया भर के 200 से अधिक प्रकार के क्रूड ऑयल शामिल हैं। रिफाइनरी तकनीक में निरंतर हो रहे नवाचारों के कारण अब रोड डामर जैसे भारी अवशेषों को भी पेट्रोल और डीजल में परिवर्तित किया जा सकता है।
जीरो डिस्चार्ज और हरित ऊर्जा पहल
तटीय पर्यावरण और अपशिष्ट प्रबंधन पर बात करते हुए अधिकारियों ने कहा कि रिफाइनरी पूरी तरह से ‘जीरो डिस्चार्ज’ नीति पर काम करती है। ठोस कचरे का निपटान सरकार द्वारा अनुमोदित एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि तरल कचरे को पूरी तरह से ट्रीट और रीसायकल करके कूलिंग वॉटर के रूप में पुनः उपयोग में लाया जाता है। हरित ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए रिफाइनरी परिसर में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट भी स्थापित किया जा चुका है।
समाज और पर्यावरण के साथ विकास (सीएसआर)
एचपीसीएल की विशाख रिफाइनरी अपने औद्योगिक एवं ऊर्जा उत्पादन दायित्वों के साथ सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में भी योगदान दे रही है। सीएसआर के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल विकास, सामुदायिक सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता दी गई है।
शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं, फर्नीचर एवं कंप्यूटर उपलब्ध कराने, विद्यार्थियों को सहयोग तथा स्वास्थ्य जागरूकता एवं चिकित्सा शिविरों जैसी गतिविधियां की गई हैं। स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने में भी सहयोग दिया गया है।
स्वच्छता एवं पेयजल से जुड़े कार्यों के तहत स्कूलों और सामुदायिक क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं तथा जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है। स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता पखवाड़े के माध्यम से भी लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधरोपण एवं हरित क्षेत्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विशाखापत्तनम में ‘ग्रीन विशाखा’ और ‘वनम-मनम’ जैसी पहलों में रिफाइनरी की भागीदारी रही है। उपलब्ध पर्यावरण अनुपालन विवरण के अनुसार बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर हरित पट्टी विकसित की गई है।
एचपीसीएल के व्यापक सीएसआर कार्यक्रमों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, बाल कल्याण, पर्यावरण एवं सामुदायिक विकास प्रमुख क्षेत्र हैं। इस तरह विशाख रिफाइनरी के सीएसआर प्रयास औद्योगिक गतिविधियों के साथ स्थानीय समुदाय की सामाजिक आवश्यकताओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को जोड़ने पर केंद्रित हैं।



