विशाखापट्टनम पोर्ट: इतिहास, प्राकृतिक सुरक्षा और आधुनिक क्षमताओं का संगम

भारत के पूर्वी तट पर स्थित विशाखापट्टनम पोर्ट अपनी प्राकृतिक भौगोलिक सुरक्षा, आधुनिक कार्गो सुविधाओं और मजबूत रेल-रोड कनेक्टिविटी के चलते समुद्री व्यापार का अहम केंद्र बना हुआ है। कंटेनर टर्मिनल के विस्तार, डिजिटल तकनीक, हरित पहल और उत्तर भारत व नेपाल तक बेहतर कनेक्टिविटी की योजनाएं इसकी भूमिका को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

विनोद शर्मा 

विशाखापट्टनम : भारत के पूर्वी तट पर स्थित विशाखापट्टनम पोर्ट (वीपीए) देश के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है। प्राकृतिक रूप से सुरक्षित भौगोलिक स्थिति, आधुनिक बुनियादी ढांचे और व्यापक रेल-रोड कनेक्टिविटी के कारण यह पूर्वी भारत के समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ऐतिहासिक शुरुआत

विशाखापट्टनम का व्यापारिक महत्व सदियों पुराना है। आधुनिक बंदरगाह के विकास की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई। मध्य भारत के खनिज संसाधनों को समुद्री मार्ग से निर्यात करने की आवश्यकता के चलते बंदरगाह के विकास पर काम शुरू हुआ। निर्माण कार्य 1927 में कर्नल एच.सी. कार्टराइट की देखरेख में शुरू हुआ और 7 अक्टूबर 1933 को लॉर्ड विलिंगडन ने इसका उद्घाटन किया। उद्घाटन के अवसर पर ‘एस.एस. जलादुर्गा’ पहला मालवाहक जहाज यहां पहुंचा।

प्राकृतिक संरचना बनी ताकत

बंदरगाह की प्रमुख विशेषता इसकी प्राकृतिक भौगोलिक स्थिति है। ‘डॉल्फिन नोज’ समुद्री चट्टान और याराडा पहाड़ियों से घिरा होने के कारण इसे समुद्री लहरों और चक्रवाती परिस्थितियों से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। पोर्ट के इनर और आउटर हार्बर अलग-अलग आकार के जहाजों एवं कार्गो संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं। आउटर हार्बर के विकास ने बड़े मालवाहक जहाजों के संचालन की क्षमता को बढ़ाया।

आजादी के बाद हुआ विस्तार

विशाखापट्टनम पोर्ट: इतिहास, प्राकृतिक सुरक्षा और आधुनिक क्षमताओं का संगम
Image Source : Via dainik jaltedeep

स्वतंत्रता के बाद देश के औद्योगिक विकास के साथ विशाखापट्टनम पोर्ट की सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ। लौह अयस्क सहित विभिन्न खनिजों के निर्यात के लिए यहां बुनियादी ढांचा विकसित किया गया। 1976 में आउटर हार्बर के शुरू होने के बाद बड़े मालवाहक जहाजों के संचालन की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। बाद के वर्षों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भी बंदरगाह की सुविधाओं और कार्गो हैंडलिंग क्षमता का विस्तार हुआ।

आधुनिक तकनीक और हरित पहल

वर्तमान में विशाखापट्टनम पोर्ट अथॉरिटी देश के प्रमुख मेजर पोर्ट्स में शामिल है। यहां क्रूड ऑयल, लौह अयस्क, कोयला, उर्वरक और कंटेनर सहित विभिन्न प्रकार के कार्गो का संचालन होता है। सागरमाला जैसी पहलों के तहत पोर्ट पर डिजिटल सेवाओं, आधुनिक क्रेन, ट्रैकिंग सिस्टम और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए भी पोर्ट पर सौर ऊर्जा, मैकेनाइज्ड कार्गो हैंडलिंग, धूल नियंत्रण तथा अपशिष्ट जल के उपचार और पुनर्चक्रण जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है।

रणनीतिक एवं आर्थिक महत्व

विशाखापट्टनम पोर्ट का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान और जहाज निर्माण से जुड़ी प्रमुख सुविधाएं भी हैं, जिससे क्षेत्र का सामरिक महत्व बढ़ जाता है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों के उद्योगों के लिए यह महत्वपूर्ण समुद्री लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में कार्य करता है।

विशाखापट्टनम पोर्ट पर आधुनिक सुविधाओं से बढ़ी कंटेनर हैंडलिंग क्षमता

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-नेपाल और उत्तर भारत के लिए रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विस्तार की तैयारी पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल विशाखापट्टनम पोर्ट स्थित जेएम बख्शी टर्मिनल्स आधुनिक तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांचे और रेल कनेक्टिविटी के माध्यम से कंटेनर हैंडलिंग एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं का विस्तार कर रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के आउटरीच कार्यक्रम के तहत आंध्र प्रदेश के दौरे पर आए राजस्थान और पंजाब के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापट्टनम स्थित विशाखा कंटेनर टर्मिनल के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर सांईराम वी. से मुलाकात की। श्री सांइराम के अनुसार टर्मिनल की वार्षिक कंटेनर हैंडलिंग क्षमता 13 लाख टीईयू है, जबकि वर्तमान में औसतन 6 से 8 लाख टीईयू कार्गो प्रतिवर्ष हैंडल किया जा रहा है।

टर्मिनल पर 390 मीटर तक लंबे पोस्ट-पनामैक्स जहाजों को बर्थ करने की क्षमता है। यहां 848 मीटर लंबी क्वे तथा 16.5 मीटर का प्राकृतिक ड्राफ्ट उपलब्ध है। सात आधुनिक क्वे क्रेन सहित आरटीजी क्रेन और रीच स्टैकर्स की सुविधा है। टर्मिनल की क्रेनें विद्युतीकृत हैं और बिजली आपूर्ति में सौर ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है।

श्री सांइराम के अनुसार जहाजों का औसत टर्नअराउंड समय करीब 20 घंटे है तथा एक साथ तीन जहाजों को संभालने की क्षमता है। टर्मिनल ने एक माह में 65 हजार टीईयू तक का थ्रूपुट भी दर्ज किया है।

नेपाल और उत्तर भारत से कनेक्टिविटी पर जोर :

टर्मिनल में इन-बिल्ट रेल साइडिंग होने से कंटेनर कार्गो को रेल नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजने की सुविधा है। नेपाल के आयात-निर्यात कार्गो के लिए विशाखापट्टनम से रेल संपर्क उपलब्ध है। वहीं, प्रबंधन ने दक्षिण-पूर्व एवं सुदूर पूर्व एशिया से आने वाले कार्गो को विशाखापट्टनम के रास्ते सीधे दिल्ली और उत्तर भारत तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लागू होने पर पश्चिमी तट के रास्ते की तुलना में समय और लॉजिस्टिक्स यहां हपाग-लॉयड, मर्सक, एमएससी और सीएमए सीजीएम जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ सेवाएं संचालित की जा रही हैं। टर्मिनल को सुरक्षा संबंधी पुरस्कार एवं आईएसओ प्रमाणपत्र भी प्राप्त हैं।

टर्मिनल में 350 से अधिक कर्मचारी एवं ठेका कर्मी तीन शिफ्टों में कार्य करते हैं। कस्टम विभाग द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 5 से 6 प्रतिशत कंटेनरों की रैंडम स्कैनिंग की जाती है। आधुनिक अवसंरचना, रेल कनेक्टिविटी और विस्तार योजनाओं के साथ जेएम बख्शी टर्मिनल्स विशाखापट्टनम को पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण कंटेनर एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रहा है।

विशाखापट्टनम पोर्ट: इतिहास, प्राकृतिक सुरक्षा और आधुनिक क्षमताओं का संगम
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विशाखा कंटेनर टर्मिनल के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर सांईराम वी. के साथ दैनिक जलतेदीप के विनोद शर्मा।

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