अनुष्का रंजन ने बताया IVF का दर्द, बोलीं- लगा मेरी बॉडी में ही कमी है

अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के मुश्किल दौर को याद करते हुए IVF से जुड़े शारीरिक और भावनात्मक अनुभव साझा किए। आदित्य सील के साथ ‘डबल डेट’ शो में पहुंचीं अनुष्का ने बताया कि नेचुरली कंसीव करने की कोशिश के बाद उन्होंने IUI और फिर IVF का सहारा लिया। इस दौरान उन्हें खुद को लेकर अपराधबोध और मानसिक दबाव भी महसूस हुआ।

  • अनुष्का रंजन ने IVF जर्नी के भावनात्मक दर्द पर खुलकर बात की।
  • IVF के दौरान उन्हें अपनी बॉडी को लेकर कमी महसूस होने लगी थी।
  • आदित्य सील ने बताया कि उन्होंने गोद लेने का विकल्प भी खुला रखा था।

Anushka Ranjan Opens Up About IVF Journey: मुंबई। अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी के ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जिनसे कई कपल खुद को जोड़ सकते हैं। पति और अभिनेता आदित्य सील के साथ नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो ‘डबल डेट’ में पहुंचीं अनुष्का ने बताया कि बच्चे की प्लानिंग से लेकर IVF तक का सफर उनके लिए सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक तौर पर भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

अनुष्का के मुताबिक, शुरुआत में उन्होंने और आदित्य ने नेचुरली कंसीव करने की कोशिश की थी। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार दोनों ने कुछ समय तक इंतजार किया। इसके बाद उन्हें IUI कराने की सलाह दी गई। अभिनेत्री ने बताया कि IUI, IVF की तुलना में अपेक्षाकृत कम जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इसमें भी दवाइयों और इंजेक्शन का दौर काफी मुश्किल महसूस हुआ।

उन्होंने बताया कि IUI के दौरान उन्हें करीब तीन-चार इंजेक्शन लेने पड़ते थे और इसके अलावा काफी दवाइयां भी चलती थीं। इन दवाइयों की वजह से उन्हें शरीर में अजीब तरह के बदलाव महसूस होते थे। धीरे-धीरे उन्हें लगा कि शायद IVF उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें गर्भधारण की संभावना IUI की तुलना में ज्यादा मानी जाती है।

लेकिन IVF का फैसला उनके लिए सिर्फ मेडिकल प्रक्रिया नहीं था। अनुष्का ने बताया कि इस पूरे सफर का मानसिक असर भी काफी गहरा था। उन्हें कई बार ऐसा महसूस होने लगा कि शायद उनकी अपनी बॉडी में ही कोई कमी है। एक समय पर वह खुद को लेकर सवाल करने लगी थीं और बेवजह अपराधबोध महसूस करने लगी थीं।

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अभिनेत्री ने यह भी बताया कि उस दौरान उनके मन में कई तरह के विचार आते थे। उन्हें लगता था कि शायद उन्हें शराब नहीं पीनी चाहिए थी या नॉनवेज नहीं खाना चाहिए था। इसके साथ ही बच्चे की प्लानिंग के बारे में किसी को बताने में भी उन्हें झिझक और शर्म महसूस होने लगी थी। यह अनुभव उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी भारी था।

आदित्य सील ने भी शो में उस दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि IVF प्रक्रिया के दौरान अनुष्का को शारीरिक तकलीफ और भावनात्मक तनाव से गुजरते देखना उनके लिए आसान नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने मन बना लिया था कि अगर यह कोशिश सफल नहीं हुई, तो वह अनुष्का को दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरते नहीं देखना चाहेंगे।

इस दौरान दोनों ने एक और विकल्प के बारे में भी सोचा था—बच्चे को गोद लेना। कपल का मानना था कि अगर वे बायोलॉजिकल तरीके से माता-पिता नहीं बन पाते, तो भी किसी बच्चे को प्यार, सुरक्षित माहौल और अच्छी जिंदगी दी जा सकती है।

अनुष्का और आदित्य की यह बातचीत IVF से गुजर रहे कपल्स के सामने आने वाले उस भावनात्मक पक्ष को भी सामने लाती है, जिसके बारे में अक्सर खुलकर बात नहीं होती। उनकी कहानी बताती है कि इस तरह की यात्रा में मेडिकल उपचार के साथ मानसिक और भावनात्मक सहारे की भूमिका भी बेहद अहम हो सकती है।

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