टीवी कंटेंट पर चाहत खन्ना की दो टूक

रोहित रॉय के टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ कहने वाले बयान के बीच चाहत खन्ना ने मौजूदा टीवी कंटेंट की क्रिएटिविटी पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कहानी और रचनात्मकता के मामले में टीवी फिलहाल फिल्मों और ओटीटी से पीछे है। हालांकि, चाहत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने रोहित का पूरा इंटरव्यू नहीं देखा, इसलिए उनके पूरे बयान पर टिप्पणी नहीं करेंगी।

  • चाहत खन्ना ने टीवी कंटेंट की क्रिएटिविटी पर रखी राय
  • रोहित रॉय के बयान के एक हिस्से से जताई सहमति
  • टीवी बनाम ओटीटी में कहानी और क्रिएटिविटी का अंतर बताया

Chahatt Khanna on TV Creativity: मुंबई। टीवी इंडस्ट्री के कंटेंट और क्रिएटिविटी को लेकर शुरू हुई बहस में अब एक्ट्रेस चाहत खन्ना की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने रोहित रॉय के हालिया बयान के उस हिस्से से सहमति जताई, जिसमें अभिनेता ने टीवी के मौजूदा कॉन्सेप्ट और कहानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।

आईएएनएस से बातचीत में चाहत ने कहा कि वह खुद टीवी से आई हैं और इस माध्यम का सम्मान करती हैं। उनके मुताबिक टीवी ने उन्हें एक अभिनेता के तौर पर मजबूत बनाया। उन्होंने यह भी बताया कि टीवी कलाकारों को लंबे समय तक शूटिंग करनी पड़ती है और कई बार 12 से 15 घंटे काम करना सामान्य हो जाता है।

चाहत के मुताबिक फिल्मों और ओटीटी पर काम करने का तरीका टीवी से अलग है। खासकर कहानी की डिटेलिंग और क्रिएटिविटी को लेकर तीनों माध्यमों में काफी अंतर दिखाई देता है। उन्होंने माना कि यदि केवल कहानी और रचनात्मकता की बात करें तो टीवी को अभी काफी आगे जाने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि टीवी का कंटेंट बड़े पैमाने पर मास ऑडियंस को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। दर्शकों की पसंद और बाजार की मांग के आधार पर मेकर्स तय करते हैं कि किस तरह की कहानियां और शो बनाए जाएं। यदि कोई फॉर्मेट बड़ी संख्या में देखा जा रहा है तो उसी तरह के कंटेंट को दोहराने के पीछे व्यावसायिक कारण भी होते हैं।

अपने अनुभव का जिक्र करते हुए चाहत ने बताया कि उन्हें कई टीवी शोज के ऑफर मिलते हैं, लेकिन कुछ कॉन्सेप्ट से वह खुद को जोड़ नहीं पातीं। उन्होंने ‘नागिन’ जैसे शोज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक क्रिएटिव कलाकार के लिए कुछ मौजूदा टीवी कॉन्सेप्ट से जुड़ना मुश्किल हो सकता है।

चाहत ने यह भी कहा कि वह उन्हीं प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना पसंद करती हैं, जिनसे उन्हें व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस हो। उनके अनुसार करियर में बेहतर अवसर मिलने के बावजूद अपनी पसंद और रचनात्मक संतुष्टि से समझौता करना उनके लिए जरूरी नहीं है।

वहीं, रोहित रॉय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में टीवी और फिल्मों के अंतर पर चर्चा करते हुए मौजूदा टीवी कंटेंट की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि कई शोज में एक जैसे कॉन्सेप्ट दोहराए जा रहे हैं और काफी कंटेंट दर्शकों के बीच लंबे समय तक याद नहीं रहता। इसी दौरान उन्होंने टीवी को ‘डस्टबिन मीडियम’ बताया था। चाहत ने हालांकि साफ किया कि उन्होंने रोहित का पूरा इंटरव्यू नहीं देखा है।

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