राशा के बटरफ्लाई टैटू का खास कनेक्शन

रवीना टंडन ने अपनी बेटी राशा के बटरफ्लाई टैटू से जुड़ी भावुक कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि राशा ने यह टैटू अपने नाना के निधन के बाद बनवाया था। राशा मानती हैं कि शूटिंग के दौरान उनके पास आने वाली तितली उनके नाना के आशीर्वाद का संकेत है। टैटू में भगवान कृष्ण और भगवान शिव से जुड़े प्रतीक भी शामिल हैं।

  • राशा का बटरफ्लाई टैटू: नाना की याद और आशीर्वाद से जुड़ा है।
  • रवीना टंडन: बेटी के टैटू में भगवान कृष्ण और भगवान शिव के प्रतीक बताए।
  • टैटू की परंपरा: रवीना ने भारत की पुरानी गोदना परंपरा का भी जिक्र किया।

Raveena Reveals the Emotional Story Behind Rasha’s Butterfly Tattoo: मुंबई। अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपनी बेटी राशा थडानी के बटरफ्लाई टैटू से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि यह टैटू सिर्फ एक डिजाइन नहीं है, बल्कि राशा के लिए अपने नाना की याद और उनसे जुड़े एक खास एहसास का प्रतीक है।

रवीना हाल ही में डांस रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ में स्पेशल गेस्ट के तौर पर पहुंची थीं। शो के दौरान एक कंटेस्टेंट ने अपनी मां को टैटू बनवाने के लिए मनाने में रवीना से मदद मांगी। इसी बातचीत के दौरान अभिनेत्री ने अपने टैटू और परिवार से जुड़ी कई बातें शेयर कीं।

रवीना ने बताया कि राशा ने अपने नाना के निधन के बाद बटरफ्लाई टैटू बनवाया था। उनके मुताबिक, राशा को ऐसा महसूस होता है कि जब वह शूटिंग करती हैं तो एक तितली उनके पास आकर बैठती है। राशा इसे अपने नाना से जोड़ती हैं और मानती हैं कि तितली के रूप में उनके नाना उन्हें आशीर्वाद देने आते हैं।

यही भावनात्मक जुड़ाव इस टैटू के पीछे की खास वजह है। रवीना के अनुसार, राशा के टैटू में केवल तितली ही नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतीकों को भी जगह दी गई है। तितली के पंखों के भीतर भगवान कृष्ण के मोर पंख से जुड़ा डिजाइन है, जबकि टैटू में भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को भी दर्शाया गया है।

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रवीना ने बताया कि यह डिजाइन राशा की निजी भावनाओं और उनकी आस्था से जुड़ा है। उनके लिए यह टैटू मुश्किल पलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा का भी हिस्सा है।

बातचीत के दौरान रवीना ने भारत में शरीर पर टैटू या गोदना बनवाने की पुरानी परंपरा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों और आदिवासी समुदायों में सदियों से शरीर पर गोदना बनवाने की परंपरा रही है। पुराने समय में गोदना बनाने का तरीका आज के आधुनिक टैटू से अलग था और इसके लिए सुई का इस्तेमाल किया जाता था।

रवीना ने अपने टैटू के बारे में भी बताया। उन्होंने अपने बच्चों के नाम के टैटू बनवाए हैं। इसके अलावा उनके शरीर पर पंजों के निशान और बिच्छू का टैटू भी है।

राशा के बटरफ्लाई टैटू की कहानी में परिवार की याद, आस्था और भावनात्मक जुड़ाव तीनों नजर आते हैं। यही वजह है कि उनके लिए यह टैटू सिर्फ शरीर पर बना एक डिजाइन नहीं, बल्कि नाना की याद को अपने साथ रखने का एक खास तरीका है।

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