समीक्षा भटनागर बोलीं- किरदार को जस्टिफाई करना एक्टर की जिम्मेदारी
टीवी अभिनेत्री समीक्षा भटनागर इन दिनों ‘अनुपमा’ में श्रुति आहूजा का किरदार निभा रही हैं। उनका कहना है कि किसी भी भूमिका को पर्दे पर निभाना सिर्फ संवाद बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह किरदार की भावनाओं और सोच को समझे। समीक्षा के लिए दर्शकों का किरदार से जुड़ना सबसे अहम है।
- समीक्षा भटनागर: ‘अनुपमा’ में श्रुति आहूजा का किरदार निभा रहीं
- श्रुति आहूजा: नेगेटिव नहीं, मां की भावनाओं वाला किरदार
- एक्टर की जिम्मेदारी: किरदार को स्क्रीन पर सही तरीके से पेश करना
Sameeksha Bhatnagar on Playing Shruti Ahuja: मुंबई। टेलीविजन अभिनेत्री समीक्षा भटनागर इन दिनों लोकप्रिय सीरियल ‘अनुपमा’ में श्रुति आहूजा की भूमिका में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री का कहना है कि उन्हें इस किरदार को निभाने का मौका मिलना उनके लिए खास अनुभव है। वह डायरेक्टर्स कट प्रोडक्शन (DKP) के साथ काम करने को लेकर भी उत्साहित हैं।
समीक्षा के मुताबिक, जब उन्हें श्रुति आहूजा का रोल ऑफर हुआ तो उन्होंने तुरंत हां नहीं कही, बल्कि पहले किरदार को समझने की कोशिश की। उन्हें लगा कि इस भूमिका में कुछ अलग करने की गुंजाइश है और यह उनकी अभिनय क्षमता के अनुरूप भी है। यही वजह रही कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का फैसला किया।
श्रुति को नेगेटिव दिखाना नहीं चाहती थीं
श्रुति आहूजा के किरदार को लेकर समीक्षा ने कहा कि हर भूमिका अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आती है। उनके मुताबिक श्रुति एक मां है, जो अपनी बेटी के लिए कई परिस्थितियों में खुद को सही साबित करने की कोशिश करती है।
अभिनेत्री ने साफ किया कि वह नहीं चाहती थीं कि दर्शक श्रुति को सिर्फ एक नेगेटिव किरदार के रूप में देखें। उनके लिए यह जरूरी था कि किरदार के पीछे छिपी मां की भावनाओं और उसकी परिस्थितियों को भी पर्दे पर दिखाया जाए।
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किरदार को समझना सबसे पहले
समीक्षा का मानना है कि किसी भी भूमिका को निभाने से पहले कलाकार को यह समझना चाहिए कि वह किरदार वास्तव में है क्या। उनके अनुसार, जब भी उन्हें कोई नया रोल मिलता है, तो वह सबसे पहले यह सोचती हैं कि उसमें अपनी तरफ से क्या नया जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर उनकी भूमिका सिर्फ दिए गए किरदार को निभाने तक सीमित नहीं रहती। किरदार की सोच को समझना और उसमें अपना रचनात्मक योगदान देना भी उतना ही जरूरी है।
दर्शकों से कनेक्शन बनाना अहम
समीक्षा के लिए किसी भी भूमिका की सफलता का एक बड़ा पैमाना दर्शकों का उससे जुड़ाव है। उनका मानना है कि कलाकार को स्क्रीन पर अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करना चाहिए, ताकि दर्शकों को उसकी भावनाएं वास्तविक लगें।
उन्होंने कहा कि एक्टर की जिम्मेदारी है कि वह किरदार को पर्दे पर इस तरह पेश करे कि दर्शक उसकी कहानी और भावनाओं को महसूस कर सकें। यही सोच श्रुति आहूजा के किरदार को निभाते समय भी उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रही।



