राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता और राजभाषा कैसे बने वेबिनार का आयोजन

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अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य सरकार क्षेत्रीय भाषा को राजभाषा बना सकती है – डॉ. इन्द्रदान चारण

जै जै राजस्थान टीम की तरफ से राजस्थानी भाषा संकल्प दिवस पर वेबिनार का आयोजन किया गया | इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गौरीशंकर प्रजापत बीकानेर ने की | कार्यक्रम की शुरुआत में प्रशांत जैन ने पत्र लेखन पर बात की तथा कप्तान बोरावड़ राजस्थानी भाषा के लिए किसी भी आन्दोलन करने के लिए तैयार रहने की बात बताई | हरिराम बिश्नोई ने राजस्थानी विषय खुलवाने के लिए एसडीएमसी से प्रस्ताव लाकर अतिरिक्त विषय के रूप मे राजस्थानी विषय खुलवाने की बात कही | सुरेन्द्र स्वामी कहा स्कूलो के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालयों में राजस्थानी विभाग नही है वहां खुलवाया जावे तथा स्थायी विभाग बनवाया जावे |

राजस्थानी भाषा के लिए संविधान के अनुच्छेदों द्वारा मान्यता की बात कही

डाॅ रामरतन लटियाल ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए बनी सभी संस्थाओं को एक साथ हो मजबूती से राजनेताओं पर दबाव देना चाहिए | डॉ. इंद्रदान चारण नै राजस्थानी भाषा के लिए संविधान के अनुच्छेदों द्वारा मान्यता की बात कही तथा बताया कि जो लोग राजस्थानी की बोलियो पर सवाल करते है उनके लिए कहा कि ”माठ रै चक्कर माय खेत गमाय दो ला’ तथा कहा कि जब किसी को अपने ह्रदय के उदगार प्रकट करने के लिए मातृभाषा से सरल और कोई भाषा नही हो सकती |

सत्रह साल से केंद्र के पास अटका पड़ा है राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव

डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने राजस्थानी भासा की मान्यता के लिए छात्रों को राजस्थानी विषय लेने के प्रोत्साहित करने तथा अपनी भाषा को बचाने की बात कही |

इस कार्यक्रम का मंचसंचालन छैलू चारण छैल ने किया तथा कार्यक्रम मे पधारे अतिथियों का हनवंत सिंह राजपुरोहित (यूके), किरण राजपुरोहित, सत्यनारायण राजस्थानी, आकाश मोदी, अचल सोनी, अरूण तापङिया, फाऊलाल प्रजापत और अशोक स्वामी आदि ने आभार व्यक्त किया |