सरकार मौका दे तो आयुर्वेद पद्धति से ढूंढ निकालेंगे कोविड-19 का इलाज : डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी

डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी, Dr .Ravishankar Polisetty
डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी, Dr .Ravishankar Polisetty

आयुर्वेद पैथी के इतिहास में दुनिया में पहली बार आयुर्वेद के सिद्धांत यानि वात, पित्त और कफ का एनीमल मॉडल तैयार किया गया है। यह मेडिकल रिसर्च डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने किया है जो एक कार्डियक सर्जन हैं। वह पिछले 18 वर्षो से आयुर्वेद के सिद्धांत और उनकी चिकित्सा पर रिसर्च कर रहे है। डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा, Covid-19 महामारी (Epidemic) काल में यह हमारे लिए अच्छा मौका है, हम अपनी चिकित्सा पद्धति से दुनिया में नंबर वन बन सकते हैं, बस हमें एक मौका दीजिए।

आयुर्वेद पैथी के इतिहास में दुनिया में पहली बार आयुर्वेद के सिद्धांत यानि वात, पित्त और कफ का एनीमल मॉडल तैयार किया गया है। इस रिसर्च में वात, पित्त और कफ का अलग अलग प्रभाव दिखाया गया है। यह मेडिकल रिसर्च डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने किया है जो एक कार्डियक सर्जन हैं। वह पिछले 18 वर्षो से आयुर्वेद के सिद्धांत और उनकी चिकित्सा पर रिसर्च कर रहे है। इन्होंने अपनी रिसर्च के आयुर्वेदिक पद्धति के मूल वात, पित्त और कफ का एक एनिमल मॉडल तैयार किया किया है। वात, पित्त और कफ को अलग अलग ग्रुप में तीन विभिन्न मॉडल बनाए हैं। रविशंकर पॉलीशेट्टी की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह बॉडी में वात, पित्त और कफ क्या काम करते हैं और इनके इनबैलेंस क्या होते हैं और बैलेंस की वजह से कैसे बॉडी खुद ब खुद हील करती है।

डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी पिछले 18 वर्षो से आयुर्वेद के सिद्धांत और उनकी चिकित्सा पर रिसर्च कर रहे है।

रविशंकर पहले ऐसेे मेडिकल साइंटिस्ट हैं जिन्होंने एनिमल मॉडल में यानि जन्तु परिशोधन में हार्ट अटैक मॉडल क्रिएट करके यह वात पित्त, कफ के हार्ट में बैलेंस करने की वजह से पार्ट ऑफ हार्ट मतलब जब हार्ट की सैल में मृत्यू होती है उसे मृत्यू से बाहर निकालकर हार्ट में कैसे रिजनरेशन कैसे किया जाए यह रिसर्च उन्हीं के द्वारा किया गया है।

भारत के अलावा दुनिया के अमेरिका, कनाडा जैसे देशा में डॉ.रविशंकर ने इसको पैटेंट किया है। इसको प्रोटेक्ट करते हुए 42 पैंटेंट फाइल किए हैं और 16 बाकी रह गए हैं। वात, पित्त और कफ सभी 42 ऑर्गन में नाड़ी परीक्षण के जरिए जो हमारे ऋषि मुनियों और ग्रंथों में जो नाड़ी परीक्षण करने का जो विधान बताया गया है उसको साइंटिफिक को रिलेशन बताकर इसका एक डिवाइस भी बनाया है। इसका प्रभाव यह हुआ जो पूरा नॉलेज जो हमने इस साइंटिफिक रिसर्च के माध्यम से जाना इसको हम पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद मानते हैं। जब जब नया शास्त्र निकलता है तब तब उस नया शास्त्र को रिलेट करते हुए रिसर्च कीजिए ऐसा महर्षि चरक, महर्षि शुशुर्थ, महर्षि बेल, महर्षि गर्ग ओर महर्षि भारद्वाज कहते थे। यह थ्यौरी अपनाते हुए मैंने यह रिसर्च किया। हार्ट,ब्रेन, किडनी, लीवर, पेंकरियार्स का रीजनरेशन का टेक्रिक निकाला है आयुर्वेद के माध्यम से।

रिजनरेशन ऑफ टीश्यू कैसे किया जाता है। वात, पित्त और कफ का जब शरीर के पूरे 42 आर्गन में प्रमाण होता है तो बॉडी ऑटोमैटिक अपने स्टेमसेल्स को रोलफ्रेट करने की शक्ति रखती है और हर अंग का रिजनरेशन करती है। पूरा दुनिया में भारत के इस साइंस के माध्यम से हैल्थ कैपिटल बन सकता है।

डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा, ऐसे समय में जब कोविड-19 का पूरी दुनिया में प्रकोप फैला है। इसको हम पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद के जरिए इसको मात दे सकते हैं। एलोपैथी साइंस के हिसाब से ऐसे हार्ट पैशेंट जिनकी ना सर्जरी हो सकती है और ना स्टेंड डाले जा सकते हैं और हार्ट फंक्शन तीस पर्सेंट से कम होता है ऐसा पैशेंट को हमने रिक्रुट करके दिखाया है।

ऐसे समय में जब कोविड-19 का पूरी दुनिया में प्रकोप फैला है। इसको हम पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद के जरिए इसको मात दे सकते हैं। इस आयुर्वेद पद्धति के जरिए हमने सीरियस हार्ट डिसीजेज, एलजी, इंफेक्ट डिसीजेज, मधुमेह, बीपी, किडनी और अस्थमा जैसे बीमारियों को आयर्वुेद के माध्यम से हमने उबारा है। एलोपैथी साइंस के हिसाब से ऐसे हार्ट पैशेंट जिनकी ना सर्जरी हो सकती है और ना स्टेंड डाले जा सकते हैं और हार्ट फंक्शन तीस पर्सेंट से कम होता है ऐसा पैशेंट को हमने रिक्रुट करके दिखाया है।

ऐसे ही कैसे में हमने डायबिटीज, अस्थमा, बीपी को हमने सही करके दिखाया है। सिर्फ पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद के जरिए हमने यह कर दिखाया है। डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा, कोरोना काल में यह हमारे लिए अच्छा मोका है, हम अपनी चिकित्सा पद्धति से दुनिया में नंबर वन बन सकते हैं, बस हमें एक मोका दीजिए। हमने कोरोना से संबंधित हमने 129 रिसर्च डॉक्यूमेंट पढ़े है जिससे यह बात सामने आती है कि इसका वैक्सीन बनाना फिलहाल नामुमकिन है।

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क्योंकि, इसके लक्ष्ण कई बार बदल चुके हैं ऐसे में अलग अलग लक्ष्ण का वैक्सीन बनाना आसान नहीं और इस तरह यह वैक्सीन किसी काम का नहीं होगा। इसके अलावा डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने प्लाजमा पद्धति से कोरोना के इलाज को असफल बताते हुए कई उदाहरण दिए। डॉ. रविशंकर ने कहा, हमारा दावा है कि हमें अगर मौका मिले तो हम पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद के माध्यम से इसका इलाज ढूंढ निकलाने में कामयाब होंगे।

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हमारे पास 50 साल से पॉली साइंटिफिक आयुर्वेद पर रिसर्च करने वाले डॉक्टर और साइंटिफिक मौजूद हैं। ऐसे में अगर हम इस आयुर्वेद रिसर्च के जरिए कोविड-19 का इलाज सबसे पहले ढूंढने में कामयाब जरूर होंगे जिसकी हमे पूरी उम्मीद है, तो पूरे विश्व में हमारे हज़ारों वर्ष पुरानी और विश्वसनीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति परंपरा का लोहा पूरी दुनिया मानने लगेगी और विश्व मेडिकल क्षेत्र में हम भारत को बहुत आगे ले जा सकेंगे। पीएम मोदी से अपील करते हुए डॉ. रविशंकर पॉलीशेट्टी ने कहा, बस जरूरत है हमें सरकार के सहयोग ओर एक मौका दिए जाने का।