नेपाल में जलविद्युत परियोजना से 439 लोग अब भी लापता
नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद निर्माणाधीन 216 मेगावाट अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में राहत और बचाव अभियान जारी है। परियोजना के मुताबिक अब तक 877 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 39 शव बरामद हुए हैं। 78 लोग संपर्क में आए हैं और 439 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
- अपर त्रिशूली-1 परियोजना में 439 लोग अब भी लापता।
- 877 लोगों का रेस्क्यू किया गया, 39 शव बरामद।
- खोज और बचाव अभियान में सेना, पुलिस, विशेषज्ञ और प्रशिक्षित दल जुटे।
439 Still Missing at Nepal’s Upper Trishuli-1 Project : नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने निर्माणाधीन 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना को भी बुरी तरह प्रभावित किया। परियोजना स्थल पर काम कर रहे लोगों में से 439 अब भी संपर्क में नहीं आए हैं। राहत और खोज अभियान लगातार जारी है।
परियोजना की प्रवर्द्धक नेपाल वाटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के अनुसार, अब तक 877 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इसके अलावा 78 लोग संपर्क में आए हैं, जबकि 39 लोगों के शव बरामद किए गए हैं।
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कंपनी के मुताबिक बाढ़ के समय परियोजना स्थल पर करीब 1,433 लोग मौजूद थे। इनमें नेपाली और विदेशी नागरिकों के साथ परियोजना की प्रवर्द्धक कंपनी, सलाहकार संस्थाओं, निर्माण कंपनियों और अन्य ठेकेदारों के कर्मचारी शामिल थे। यहां नेपाली, कोरियाई, चीनी, भारतीय और अन्य देशों के नागरिक काम कर रहे थे।
लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों के साथ कोरियाई विशेषज्ञ और परियोजना की टीमें जुटी हुई हैं। संभावित स्थानों पर तलाश के लिए सरकारी एजेंसियों, सुरक्षा बलों, तकनीकी विशेषज्ञों और बचाव दलों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है।
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परियोजना की भूमिगत सुरंगों, पावरहाउस और अन्य संरचनाओं में लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए मलबा और कीचड़ हटाया जा रहा है। इसके अलावा आसपास की पहाड़ियों, गांवों और दूसरे संभावित इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशिक्षित खोजी कुत्तों, पर्वतारोहियों और विशेष रूप से प्रशिक्षित बचावकर्मियों की मदद भी ली जा रही है।
कंपनी ने बताया कि बांध स्थल से मुख्य सुरंग की ओर जाने वाले मार्ग पर बाढ़ के दौरान एक ट्रक के पलटने की जानकारी भी मिली है। इस घटना से जुड़े संभावित इलाकों की भी जांच की जा रही है।
बचाव अभियान के सामने भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कें, परिवहन में दिक्कत, बुनियादी सुविधाओं की कमी, भूमिगत ढांचों में मौजूद खतरे और दोबारा भूस्खलन की आशंका के बीच टीमें काम कर रही हैं।



