जापान की सैन्य तैनाती से चीन नाराज

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने के बीच चीन ने जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास पर कड़ा विरोध जताया है। बीजिंग ने जापान में लंबी दूरी के हमलावर हथियारों की तैनाती को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे कदम क्षेत्रीय तनाव, हथियारों की होड़ और सैन्य टकराव का खतरा बढ़ा सकते हैं।

  • जापान की सैन्य तैनाती: लंबी दूरी के हमलावर हथियारों को लेकर चीन ने जताई आपत्ति।
  • चीन का विरोध: बीजिंग ने जापान-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया के सैन्य अभ्यास पर सवाल उठाए।
  • टाइफॉन मिसाइल सिस्टम: अभ्यास में अमेरिकी मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम की मौजूदगी से बढ़ी चिंता।

China Objects to Japan’s Military Deploymentx : एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर सामने आया है। चीन ने जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के साथ-साथ जापान में लंबी दूरी के रणनीतिक हमलावर हथियारों की तैनाती का विरोध किया है।

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन के मुताबिक, जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के साथ ‘ओरिएंट शील्ड 26’ अभ्यास में हिस्सा ले रही है। यह सैन्य अभ्यास 8 से 24 सितंबर तक जापान के होक्काइडो और कागोशिमा क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : लोकतंत्र में संवाद जरूरी: राज्यपाल

रिपोर्टों के अनुसार, इस अभ्यास में पहली बार अमेरिका का टाइफॉन मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल है। चीन का कहना है कि जापान में इस तरह के हथियारों की मौजूदगी क्षेत्र के दूसरे देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है।

जियांग बिन ने आरोप लगाया कि ‘सुरक्षा कवच’ के नाम पर सैन्य अभ्यास के जरिए लंबी दूरी के हमलावर हथियारों की तैनाती को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां अन्य देशों के वैध सुरक्षा हितों को प्रभावित करती हैं और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए जोखिम पैदा करती हैं।

यह भी पढ़ें : बिग बॉस 20 में आसिफ खान का फूटा गुस्सा

चीन ने जापान पर लंबी दूरी के हथियार विकसित करने और विदेशों में अपनी सैन्य गतिविधियों का दायरा बढ़ाने का भी आरोप लगाया। जियांग के अनुसार, ये कदम जापान के शांतिवादी संविधान और रक्षा-केंद्रित सुरक्षा नीति के सिद्धांतों से मेल नहीं खाते।

उन्होंने जापान की सैन्य नीति को ‘मिलिटरीवाद के नए रूप’ की ओर बढ़ता कदम बताया। चीन का कहना है कि ऐसी रणनीति से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ-साथ अलग-अलग सैन्य गुटों के बीच टकराव की आशंका भी बढ़ सकती है।

Related Articles

Back to top button