भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी से खुलेंगे निवेश और स्वच्छ ऊर्जा के नए रास्ते

मेलबर्न में आयोजित बिजनेस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का समय आ गया है। उन्होंने उद्योग जगत से साझेदारी मजबूत करने का आह्वान करते हुए दोनों देशों को वैश्विक विकास का भरोसेमंद साझेदार बताया।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को निवेश और व्यापार के नए अवसरों से जोड़ने पर जोर।
  • स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा में संयुक्त सहयोग बढ़ाने की अपील।
  • निवेश बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों और पेंशन फंडों को भारत आने का निमंत्रण।

India-Australia Partnership to Unlock New Investment and Clean Energy Opportunities : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच दोनों देश भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की तकनीकों और टिकाऊ विकास का भी आधार बनेगा।

मेलबर्न में आयोजित ‘इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों के प्रभावी समाधान तैयार कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में लागू हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात बढ़ा है और कारोबारियों के लिए नए बाजार खुले हैं। साथ ही उन्होंने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता भी जताई।

मोदी ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि देश वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक और संसाधन भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम संसाधनों के कारण दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में बंदरगाह, सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों और शहरी बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश के अवसर उपलब्ध हैं। सरकार लगातार आधारभूत ढांचे का विस्तार कर रही है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों को मजबूत संभावनाएं मिल रही हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के एआई मिशन, क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर कार्यक्रमों को सरकारी स्तर पर 10 अरब डॉलर से अधिक का समर्थन दिया गया है। उन्होंने डेटा सेंटर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीकों में भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग को भविष्य की जरूरत बताया।

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ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंडों और निवेशकों को भारत में निवेश का निमंत्रण देते हुए मोदी ने कहा कि भारत स्थिर, सुरक्षित और दीर्घकालिक निवेश का मजबूत केंद्र बन चुका है। उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास में सहयोग का भी स्वागत किया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों का गिफ्ट सिटी में कैंपस खोलना दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का संकेत है।

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारत के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया के प्रांतों के बीच उनकी विशेष क्षमताओं के आधार पर सीधी आर्थिक साझेदारी विकसित की जाए। उनका मानना है कि महत्वपूर्ण खनिज, विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्रों में इस मॉडल से दोनों देशों को व्यापक लाभ मिलेगा।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मुक्त हिंद-प्रशांत की समान सोच के आधार पर भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह सहयोग नए निवेश, नई तकनीक और नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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