ईरान का पलटवार! अमेरिकी बेस पर हमले का दावा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक और स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। आईआरजीसी ने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बताई गई है। वहीं, जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने अधिकांश ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
- ईरान का पलटवार: आईआरजीसी ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हमले का दावा किया।
- अमेरिकी बेस निशाने पर: अल-अजराक एयर बेस के लड़ाकू विमान हैंगर और शेल्टर को निशाना बनाने की बात कही गई।
- तेल टैंकर कार्रवाई: अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल टैंकरों को नष्ट करने की पुष्टि की।
Iran Claims Retaliatory Strike on US Base in Jordan: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आईआरजीसी ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी एयर बेस पर जवाबी हमला करने का दावा किया है। ईरानी संगठन के मुताबिक, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने अल-अजराक एयर बेस को निशाना बनाया। यह हमला अमेरिकी सेना की ओर से ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ की गई कार्रवाई के जवाब में बताया गया है।
आईआरजीसी के बयान के अनुसार, हमले में उस हैंगर को निशाना बनाया गया, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों की मरम्मत, रखरखाव, तैयारी और तैनाती के लिए किया जाता है। इसके अलावा लड़ाकू विमानों के लिए बनाए गए एक शेल्टर को भी निशाना बनाने का दावा किया गया। आईआरजीसी ने हमले में अमेरिकी पक्ष को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही है।
हालांकि, जॉर्डन की सेना ने हमले को लेकर अलग तस्वीर पेश की। उसके मुताबिक, ईरान की ओर से कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 18 को जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। सेना ने बताया कि बाकी दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं और शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
यह भी पढ़ें:हमारे लिए कोई चुनाव छोटा नहीं, कार्यकर्ता की जीत के लिए बहाएंगे खून-पसीना : मदन राठौड़
यह घटनाक्रम अमेरिकी सेना की उस कार्रवाई के बाद सामने आया है, जिसमें सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल टैंकरों को निशाना बनाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ये कार्रवाई ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के आसपास की गई थी। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम केंद्र है।
सेंटकॉम ने दावा किया कि इन जहाजों को निशाना बनाने से पहले उनके चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था। अमेरिकी सेना के अनुसार, हमले के बाद जहाजों को इस स्थिति में पहुंचा दिया गया कि वे आगे संचालन करने में सक्षम नहीं रहे। किसी चालक दल के सदस्य के मारे जाने या घायल होने की जानकारी भी अमेरिकी पक्ष ने नहीं दी।
अमेरिकी सेना ने जिन टैंकरों के नाम बताए, उनमें एम/टी कविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन-1, एम/टी रिस्को और एम/टी डेर्या शामिल हैं। सेंटकॉम ने इन जहाजों को आईआरजीसी द्वारा संचालित कच्चे तेल के टैंकर बताते हुए आरोप लगाया कि वे ऐसे वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके जरिए ईरानी सैन्य संगठन और उससे जुड़े क्षेत्रीय समूहों को धन पहुंचाया जाता था।
इसी बीच अमेरिका ने यह भी कहा कि आईआरजीसी ने दो मौकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए एक अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, सेंटकॉम ने युद्धपोत की पहचान, हमले की सटीक जगह या दागी गई मिसाइलों की संख्या सार्वजनिक नहीं की। अमेरिकी कमान के मुताबिक, दोनों कथित हमलों में युद्धपोत सुरक्षित रहा और किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई।
ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और अब जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमले के दावे ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। मौजूदा घटनाक्रम में दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक नुकसान का आकलन स्वतंत्र रूप से सामने आना अभी बाकी है।



