ईरान पर फिर हमले का खतरा, मंडराए अमेरिकी ड्रोन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए कथित ईरानी हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी ड्रोन को रोके जाने के ईरानी दावे ने क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ा दिया है।

  • ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका फिर तेज हुई।
  • अमेरिकी ड्रोन को रोकने का IRGC ने किया दावा।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य और समुद्री तनाव बढ़ा।

Iran Faces Renewed US Strike Threat: जॉर्डन में अमेरिकी कर्मियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े जवाब की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका जोरदार कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने साथ ही दावा किया कि ईरान के वित्तीय तंत्र, सैन्य ढांचे और नेतृत्व को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया जा चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका आगे कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।

अमेरिकी ड्रोन को रोकने का ईरानी दावा

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने पूर्वी होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को रोका। अल जजीरा और CBS News की रिपोर्टों के अनुसार, लगभग एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद इस रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां सैन्य तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ सकती है।

पहले भी कई बार हो चुकी सैन्य कार्रवाई

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीनों में कई बार सैन्य टकराव देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी कार्रवाई में रडार साइट, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और मिसाइल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन कार्रवाइयों को ईरान की ओर से सामने आई धमकियों या हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। जून में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में कथित उल्लंघनों के चलते स्थिति फिर बिगड़ गई।

ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

तनाव बढ़ने के दौरान ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित होने की बात कही गई। 30 अगस्त को अमेरिका ने लराक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी। इसके बाद ट्रंप की ताजा चेतावनी ने संभावित नए सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।

टैंकर पर तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला

इस बीच यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय ओमान के खसाब के पास एक टैंकर पर तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों के पीछे कौन था। समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि होर्मुज से होने वाली शिपिंग में किसी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

जॉन बोल्टन ने आर्थिक दबाव बढ़ाने की पैरवी की

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरानी तेल पर अमेरिकी रोक को प्रभावी कदम बताया। उनका कहना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और इस नीति को आगे जारी रखा जाना चाहिए। बोल्टन ने चीन को भी अमेरिकी दबाव अभियान के लिए बड़ी चुनौती बताया। उनके मुताबिक चीन लंबे समय से ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है और वित्तीय व्यवस्था के जरिए ईरान को आर्थिक मदद मिलती रही है। उन्होंने ईरान की मदद करने वाले देशों, खासकर चीन, के खिलाफ कार्रवाई की वकालत की।

ट्रंप बोले- अमेरिका के लिए छोटी लड़ाई

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ जारी टकराव को अमेरिका के लिए अपेक्षाकृत छोटी लड़ाई बताया। उन्होंने ईरान से जुड़े संघर्ष को लेकर सामने आई चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह अमेरिका के लिए कोई बड़ी लड़ाई नहीं है। ट्रंप ने ईरान को एक असफल देश भी बताया और संकेत दिया कि अमेरिकी दबाव आगे भी जारी रह सकता है।

82वीं एयरबोर्न यूनिट की तैनाती 2027 तक

अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के परिवारों को मध्य पूर्व में सैनिकों की तैनाती के संबंध में जानकारी दी गई है। फोर्ट ब्रैग के अधिकारियों की ओर से परिवारों को भेजे गए पत्र में बताया गया कि तैनाती करीब 12 महीने तक चलने की उम्मीद है और यह 2027 तक जारी रह सकती है। मेजर जनरल ब्रैंडन टेगटमेयर और कमांड सार्जेंट मेजर जेम्स ब्रैडशॉ ने परिवारों को लिखे पत्र में यह जानकारी साझा की।

रिफाइनरों से मिलेंगे ट्रंप

इस बीच ट्रंप मंगलवार को तेल रिफाइनरों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बैठक करने वाले हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, बैठक में छोटे, मध्यम और बड़े रिफाइनर एवं डिस्ट्रीब्यूटर शामिल होंगे। आंतरिक सचिव डग बर्गम और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी दी गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि प्रशासन के नए आर्थिक दबाव अभियान का उद्देश्य ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाना है। उनके मुताबिक अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की दिशा में कदम उठाए। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका तनाव का अगला रुख सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक दबाव पर भी निर्भर करेगा।

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