नेपाल में बर्फ का कहर, 2,000 मीटर नीचे गिरा विशाल हिमखंड
नेपाल के रसुवागढ़ी में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे हिमालय में हुए बड़े हिमस्खलन की भयावह तस्वीर सामने आई है। विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ और हिमखंड लगभग 2,000 मीटर नीचे गिरे। इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ के गिरने से जबरदस्त ऊर्जा पैदा हुई, जिसका असर विस्फोट जैसा महसूस हुआ।
- नेपाल आपदा: रसुवागढ़ी में बर्फ और हिमखंडों के गिरने से बढ़ी तबाही।
- ग्लेशियर कोलैप्स: करीब 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ 2,000 मीटर नीचे गिरी।
- हिमस्खलन का असर: भारी ऊर्जा के चलते घटना का प्रभाव विस्फोट जैसा रहा।
Nepal Disaster: Massive Ice Fall Triggers Explosive Impact : नेपाल के रसुवागढ़ी में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। वैज्ञानिकों के शुरुआती अध्ययन में पता चला है कि पहाड़ी क्षेत्र से बर्फ और हिमखंडों का एक विशाल हिस्सा टूटकर करीब 2,000 मीटर नीचे आ गिरा था।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र केंद्रीय विभाग के प्रोफेसर डॉ. रंजन कुमार दाहाल के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कम से कम 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ के नीचे गिरने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक मात्रा इससे कहीं अधिक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
यह भी पढ़ें : मोदी का संदेश: सबसे बड़ा दान है जीवन बचाना
इस घटना की सबसे चौंकाने वाली बात इससे पैदा हुई ऊर्जा है। विशेषज्ञों के मुताबिक हजारों मीटर की ऊंचाई से इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ और हिमखंड के गिरने से जमीन पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा। इस प्रक्रिया से पैदा कंपन को 5.2 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया गया।
सैटेलाइट डेटा से यह भी संकेत मिला है कि हिमस्खलन करीब 1.3 किलोमीटर लंबा था। नीचे की ओर बढ़ते हुए इसने लगभग 500 से 800 मीटर चौड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। रास्ते में मौजूद बर्फ, चट्टान और अन्य मलबा भी इसकी गति के साथ जुड़ता गया, जिससे इसका प्रभाव और बढ़ गया।
यह भी पढ़ें : निकाय चुनाव से पहले BJP का संकल्प पत्र तैयार, मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वैज्ञानिकों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बर्फ के ढेर की वास्तविक मोटाई और कुल मात्रा का सटीक पता लगाना है। शुरुआती आकलन में बर्फीले मलबे की मोटाई करीब 60 से 70 मीटर मानी गई है। इसी आधार पर कुल सामग्री का अनुमान करीब 4 करोड़ घन मीटर तक पहुंचता है।
डॉ. दाहाल ने हालांकि बेहद सावधानी बरतते हुए न्यूनतम अनुमान के तौर पर भी 2.5 करोड़ घन मीटर बर्फ के गिरने की बात कही है। दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों ने शुरुआती स्तर पर यह मात्रा 10 करोड़ घन मीटर तक होने की संभावना जताई है। इसका मतलब है कि जांच पूरी होने के बाद तस्वीर अभी और बड़ी सामने आ सकती है।



