नेपाल की बाढ़ की रफ्तार 188 किमी प्रति घंटा, वैज्ञानिकों का दावा

नेपाल में अगस्त में आई विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ को लेकर वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला अनुमान सामने रखा है। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के अध्ययन के मुताबिक बाढ़ का औसत वेग करीब 188 किलोमीटर प्रति घंटा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि लांगटांग क्षेत्र से रसुवागढ़ी तक 22 किलोमीटर की दूरी इस प्रवाह ने महज सात मिनट में पूरी की।

  • नेपाल बाढ़: भोटेकोशी बाढ़ की औसत रफ्तार 188 किमी प्रति घंटा बताई गई।
  • वैज्ञानिक अध्ययन: लांगटांग से रसुवागढ़ी तक 22 किमी दूरी 7 मिनट में तय हुई।
  • भारी तबाही: बाढ़ और मलबे से पांच जिलों के कई इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ।

Nepal Flood Flow Estimated at 188 km/h : नेपाल में अगस्त में आई भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ को लेकर वैज्ञानिकों के अध्ययन में इसकी रफ्तार को लेकर नया दावा सामने आया है। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ का औसत वेग करीब 188 किलोमीटर प्रति घंटा था। इससे पहले नेपाली बाढ़ विशेषज्ञों ने इसकी गति करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान लगाया था।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 26 अगस्त को रसुवा के लांगटांग लिरुंग हिमाल में 5,150 मीटर से अधिक ऊंचाई पर चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ ग्लेशियर का हिस्सा भी नीचे आया। चट्टान, बर्फ, मिट्टी और पानी के इस बड़े मिश्रण ने तेजी से नीचे की ओर बहते हुए एक शक्तिशाली बाढ़ का रूप ले लिया।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि लांगटांग क्षेत्र से रसुवागढ़ी सीमा तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी बाढ़ ने लगभग सात मिनट में तय की। वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी तेज गति से चट्टान, बर्फ और मलबे के साथ पानी का प्रवाह नेपाल में पहले दर्ज नहीं किया गया था।

यह तेज प्रवाह भोटेकोशी नदी से होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंचा और रास्ते में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत पांच जिलों के 15 स्थानीय तह बाढ़ और मलबे से प्रभावित हुए। कई इलाकों में जमीन का कटाव हुआ और सड़क, पुल तथा अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

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अध्ययन के अनुसार, बाढ़ का प्रभाव करीब 200 किलोमीटर दूर चितवन के देवघाट तक भी पहुंचा। वहां नदी का प्रवाह बढ़कर लगभग 5,850 घनमीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गया। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चार घंटे से कम समय में करीब दो करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी नदी में आया।

इसके अलावा लगभग 3.05 करोड़ घनमीटर मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा भी बाढ़ के साथ बहा। इससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में तबाही और बढ़ गई।

WWA के इस अध्ययन में विभिन्न देशों के 20 से अधिक वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल रहे। रिपोर्ट में बाढ़ के पीछे चट्टान और ग्लेशियर के बड़े हिस्से के एक साथ नीचे गिरने को प्रमुख कारणों में बताया गया है।

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