नेपाल में बाढ़ की तबाही, 38 दिन बाद भी उद्गम स्थल से दूर सरकार
नेपाल में भोटेकोसी से त्रिशूली और नारायणी नदियों तक पहुंची विनाशकारी बाढ़ के 38 दिन बाद भी सरकारी टीम आपदा के वास्तविक उद्गम स्थल तक नहीं पहुंच पाई है। नेपाल अब वहां की स्थिति समझने के लिए चीन से मिले सैटेलाइट और हाई-रिजॉल्यूशन डेटा का सहारा ले रहा है।
- नेपाल बाढ़: 38 दिन बाद भी नेपाली टीम आपदा के उद्गम स्थल तक नहीं पहुंच सकी।
- चीन से सैटेलाइट डेटा: नेपाल सरकार चीन से हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और जरूरी सूचनाएं ले रही है।
- बाढ़ का नुकसान: आपदा में 1,453 शव बरामद हुए, जबकि 5,285 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।
Nepal Flood: Government Still Away From Disaster Origin: नेपाल में भोटेकोसी नदी से शुरू होकर त्रिशूली और नारायणी नदियों तक पहुंची विनाशकारी बाढ़ को 38 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद नेपाल सरकार की टीम उस जगह तक नहीं पहुंच सकी है, जहां से इस आपदा की शुरुआत मानी जा रही है। इसके उलट, चीन की टीम बाढ़ के अगले ही दिन संबंधित क्षेत्र में पहुंच गई थी।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि नेपाली टीम अभी तक उद्गम स्थल पर नहीं पहुंची है। उनके अनुसार, वहां जाने के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरत है और संसाधनों की कमी भी एक चुनौती है।
उप्रेती ने कहा कि नेपाल को चीन से लगातार जरूरी सूचनाएं मिल रही हैं। चीन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे सैटेलाइट और हाई-रिजॉल्यूशन डेटा का अध्ययन किया जा रहा है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक की मदद से मौके की स्थिति का आकलन किया जा सकता है और हर स्थिति में अधिकारियों का खुद वहां पहुंचना जरूरी नहीं है।
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आपदा से जुड़े अहम आंकड़ों के लिए चीन से मिल रही जानकारी पर निर्भरता ऐसे समय में सामने आई है, जब यह हादसा नेपाली क्षेत्र में हुआ है। नेपाल और चीन के बीच मौसम एवं जलवायु संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर हाल ही में समझौता ज्ञापन भी हुआ है।
26 अगस्त को भोटेकोसी नदी के रास्ते त्रिशूली और नारायणी में आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं और चितवन सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। बाढ़ के साथ आई तबाही ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया और राहत एवं तलाश अभियान लंबे समय से जारी है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक मानव अंगों सहित 1,453 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 5,285 लोग अभी भी लापता हैं। बरामद शवों में 1,334 को सुरक्षित रूप से जमीन में संरक्षित किया गया है और 112 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं।
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मृतकों की पहचान के लिए 1,330 लोगों के डीएनए नमूने लिए गए हैं। इसके अलावा लापता लोगों के 2,061 परिजनों के डीएनए नमूने भी जुटाए गए हैं, ताकि पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने नुकसान और पुनर्निर्माण की जरूरत का आकलन करने के लिए त्वरित क्षति एवं आवश्यकता आकलन टीम बनाई थी। हालांकि, यह टीम भी आपदा के उद्गम स्थल तक पहुंचे बिना अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है।
प्रारंभिक आकलन में बाढ़ से करीब 4 खरब 8 अरब 28 करोड़ 91 लाख नेपाली रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 7 खरब 23 अरब 31 करोड़ 52 लाख नेपाली रुपये की जरूरत बताई गई है।



