नेपाल में 4,655 लापता, तीन महीने बाद मृत घोषित करने की तैयारी

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब भी 4,655 लोग लापता हैं। सरकार ऐसे लोगों को तीन महीने तक तलाश के बावजूद नहीं मिलने पर मृत घोषित कर मृत्यु पंजीकरण की कानूनी व्यवस्था करने की तैयारी में है। अब तक 1,436 शव बरामद हुए हैं, जिनमें 1,292 की पहचान नहीं हो सकी है।

  • नेपाल बाढ़ के बाद 4,655 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
  • तीन महीने तक तलाश के बाद नहीं मिलने पर मृत घोषित करने का प्रस्ताव।
  • 1,436 शव बरामद, इनमें 1,292 की पहचान अभी बाकी है।

Nepal Plans Death Registration for Long-Term Missing Flood Victims : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद लापता लोगों को लेकर सरकार अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की आपदा के बाद तीन महीने तक तलाश की जाती है और उसका कोई पता नहीं चलता, तो उसे मृत मानकर मृत्यु पंजीकरण किया जा सकेगा।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता एवं डीआईजी अविनारायण काफ्ले के मुताबिक, बाढ़ के बाद अभी 4,655 लोग लापता हैं। उनकी तलाश के लिए अभियान जारी है।

सरकार ने इस संबंध में ‘विपद् संबंधी कुछ नेपाल ऐन को संशोधन करने संबंधी ऐन, 2083’ के जरिए कानूनी प्रावधान तैयार किए हैं। इसके तहत गंभीर आपदा की स्थिति में लापता और मृत लोगों से जुड़े मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। प्रस्तावित संशोधन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन ऐन, 2074 में नई धारा जोड़ने का प्रावधान है।

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बुधवार तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,436 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से 1,292 शवों की पहचान नहीं हो पाई है। इन शवों को सुरक्षित रखने के साथ दफनाने की प्रक्रिया भी की गई है। पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, अब तक 1,286 शवों और 1,997 परिजनों के डीएनए नमूने लिए गए हैं। इनमें से करीब आधे नमूनों की जांच रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। पहचान होने पर दफन किए गए शवों को संबंधित परिवारों को सौंपने की व्यवस्था रहेगी।

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सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में लापता व्यक्ति के परिवार को मिलने वाली राहत का भी प्रावधान किया जा रहा है। तीन महीने तक तलाश के बाद व्यक्ति नहीं मिलने पर उसके परिवार को अन्य मृतकों के परिवारों की तरह सरकारी राहत उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

भोटेकोशी क्षेत्र को तीन महीने के लिए आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस दौरान खोज और बचाव अभियान जारी रहेगा। निर्धारित अवधि के बाद भी यदि किसी लापता व्यक्ति का पता नहीं चलता है तो प्रस्तावित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका मृत्यु पंजीकरण किया जा सकेगा।

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