रूस ने फिर दिखाई मिसाइल ताकत, ICBM का परीक्षण

रूस ने लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। अर्खांगेल्स्क क्षेत्र के प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से दागी गई मिसाइल का टेस्ट वॉरहेड हजारों किलोमीटर दूर कामचटका के कुरा ट्रेनिंग रेंज तक पहुंचा। मॉस्को के मुताबिक परीक्षण का उद्देश्य मिसाइल की तकनीकी क्षमता और उड़ान प्रदर्शन को परखना था।

  • ICBM परीक्षण: रूस ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
  • हजारों किमी लक्ष्य: प्लेसेत्स्क से लॉन्च मिसाइल का वॉरहेड कामचटका पहुंचा।
  • रणनीतिक ताकत: परीक्षण को रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स की ट्रेनिंग एक्सरसाइज से जोड़ा गया।

Russia Tests Long-Range ICBM :  रूस ने अपनी रणनीतिक मिसाइल क्षमता के प्रदर्शन के तहत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया है। मिसाइल को उत्तर-पश्चिमी रूस के अर्खांगेल्स्क क्षेत्र में स्थित प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से लॉन्च किया गया। परीक्षण के दौरान इसका टेस्ट वॉरहेड सुदूर पूर्व में कामचटका प्रायद्वीप स्थित कुरा ट्रेनिंग रेंज तक पहुंचा।

रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक परीक्षण में तय किए गए सभी कार्य और लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। मंत्रालय ने कहा कि इस परीक्षण से मिसाइल की तकनीकी क्षमताओं और उसकी उड़ान संबंधी विशेषताओं की पुष्टि हुई है।

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हालांकि रूस ने इस्तेमाल की गई मिसाइल का सटीक मॉडल सार्वजनिक नहीं किया है। रक्षा मंत्रालय ने इसे मोबाइल-लॉन्च सॉलिड-फ्यूल सिस्टम बताया। यह परीक्षण रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स की एक ट्रेनिंग एक्सरसाइज का हिस्सा था।

अभ्यास के दौरान मोबाइल ICBM लॉन्च बैटरी को एक दूरस्थ क्षेत्र में तैनात किया गया। इसके बाद मिसाइल को तैयार करने से लेकर लॉन्च करने तक की पूरी प्रक्रिया को अभ्यास के तौर पर अंजाम दिया गया। इस तरह रूस ने मोबाइल मिसाइल यूनिट की परिचालन क्षमता को भी परखा।

रूस के रणनीतिक हथियारों में आरएस-28 सरमत ICBM को खास महत्व दिया जाता है। रूस पहले इसके परीक्षण कर चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह मिसाइल कई री-एंट्री व्हीकल्स के जरिए भारी परमाणु पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है।

सरमत के साथ हाइपरसोनिक ग्लाइडर तकनीक के इस्तेमाल की क्षमता का भी उल्लेख किया जाता रहा है। इस तरह के ग्लाइडर तेज गति से उड़ान भरते हुए अपनी दिशा बदल सकते हैं, जिससे पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स के कमांडर जनरल सर्गेई काराकाएव ने पहले कहा है कि रूसी सेना साल के अंत तक अपनी पहली मिसाइल रेजिमेंट को नए हथियार सिस्टम से लैस करने की दिशा में काम कर रही है।

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राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई मौकों पर आरएस-28 सरमत को रूस की महत्वपूर्ण रणनीतिक मिसाइल क्षमता का हिस्सा बता चुके हैं। उनके मुताबिक, इसकी लंबी दूरी और भारी पेलोड ले जाने की क्षमता रूस की रणनीतिक ताकत को बढ़ाती है।

मॉस्को लंबे समय से अपनी मिसाइल क्षमताओं के विकास को बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और रणनीतिक संतुलन से जोड़ता रहा है। रूस का तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में उसकी रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। हालिया ICBM परीक्षण इसी व्यापक रणनीतिक तैयारी की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

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